US Iran Talks: बड़ा समझौता या महायुद्ध? अमेरिका-ईरान बैठक के बीच ट्रंप की इस चेतावनी से सहमा तेहरान
स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की वार्ता सकारात्मक रही। दोनों पक्ष हाई-लेवल कमेटी और लेबनान में शांति के लिए डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल बनाने पर सहमत हुए हैं। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से इस दिशा में बड़ी प्रगति हुई है।
Switzerland: अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड के लेक ल्यूसर्न में चल रही पहले दौर की हाई-प्रोफाइल बातचीत सकारात्मक माहौल में खत्म हो गई है। इस महत्वपूर्ण वार्ता का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करना और लेबनान में शांति स्थापित करना है। इस बैठक का आयोजन पाकिस्तान और कतर की लगातार मध्यस्थता के बाद संभव हो सका है।
वार्ता के समापन के बाद दोनों मध्यस्थ देशों ने एक साझा बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की है कि बैठक बेहद रचनात्मक रही और कई जटिल मुद्दों पर आपसी सहमति बनाने में सफलता मिली है।
प्रतिबंध हटने पर ईरानी विदेश मंत्री की पहली प्रतिक्रिया
इस वार्ता के सफल समापन पर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने पाकिस्तान और कतर के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस मध्यस्थता से लेबनान युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी प्रगति हुई है। अराघची ने बताया कि समझौते के तहत ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर लगी रोक को हटा दिया गया है, साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में की गई नाकेबंदी भी खत्म हो गई है।
इसके अलावा ईरान की कुछ फ्रीज की गई संपत्तियों को भी जारी कर दिया गया है, जिससे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण और विकास योजनाओं की शुरुआत की जा सकेगी। उन्होंने ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ को सबसे बड़ी परीक्षा बताया है।
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हाई-लेवल कमेटी का गठन और उसकी जिम्मेदारी
साझा बयान के अनुसार, दोनों पक्ष एक ‘हाई-लेवल कमेटी’ बनाने पर सहमत हुए हैं। यह कमेटी पूरी मध्यस्थता प्रक्रिया की राजनीतिक निगरानी करेगी। मुख्य वार्ताकार इस कमेटी को नियमित रूप से अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके साथ ही परमाणु मुद्दे, प्रतिबंधों की समीक्षा और हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विशिष्ट वर्किंग ग्रुप बनाए जाएंगे।
इस कमेटी ने आगामी 60 दिनों के भीतर एक अंतिम और स्थायी समझौते तक पहुंचने के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। इसके अतिरिक्त, होर्मुज स्ट्रेट से वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए दोनों देशों के बीच एक सीधी कम्युनिकेशन लाइन भी स्थापित की गई है।
लेबनान में युद्ध रोकने के लिए ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’
क्षेत्र में तुरंत शांति बहाल करने के लिए दोनों पक्ष लेबनान में सैन्य अभियानों को रोकने और MoU के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ बनाने पर राजी हुए हैं। यह सेल सीधे तौर पर दोनों पक्षों और लेबनान के बीच एक सेतु का काम करेगा, जिसमें मध्यस्थ देश तकनीकी और कूटनीतिक मदद प्रदान करेंगे। इस सिलसिले में आगे की तकनीकी और बारीक बातचीत स्विट्जरलैंड के बर्जेनस्टॉक रिज़ॉर्ट में इस सप्ताह के बाकी दिनों में भी जारी रहेगी।
डोनाल्ड ट्रंप की तेहरान को सख्त चेतावनी
एक तरफ जहां स्विट्जरलैंड में शांति वार्ता चल रही है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि ईरान को लेबनान में सक्रिय उन समूहों को तुरंत रोकना चाहिए, जिन्हें वह वित्तीय और सैन्य सहायता देता है।
उन्होंने धमकी देते हुए स्पष्ट किया कि यदि ईरान ने अपनी हरकतों पर लगाम नहीं लगाई, तो अमेरिका उस पर फिर से बहुत कड़ा हमला करेगा। ट्रंप ने पिछले हफ्ते हुए अमेरिकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि इस बार का हमला पहले से कहीं अधिक जोरदार और विनाशकारी होगा।