“लालची, मतलबी, गद्दार..” TMC के बागी सांसदों पर महुआ मोइत्रा का तीखा हमला, बोलीं- इस्तीफा दें और BJP के टिकट पर चुनाव लड़ें

सियासी गलियारों में इन दिनों उठापटक का दौर कुछ ऐसा चल रहा है कि हर दिन कोई न कोई नई कहानी सामने आ जाती है। पश्चिम बंगाल की राजनीति तो जैसे भूचाल पर सवार है। तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी कलह ने अब ऐसा विकराल रूप ले लिया है कि पार्टी में टूट के बादल साफ-साफ

Jun 8, 2026 - 23:30
“लालची, मतलबी, गद्दार..” TMC के बागी सांसदों पर महुआ मोइत्रा का तीखा हमला, बोलीं- इस्तीफा दें और BJP के टिकट पर चुनाव लड़ें

सियासी गलियारों में इन दिनों उठापटक का दौर कुछ ऐसा चल रहा है कि हर दिन कोई न कोई नई कहानी सामने आ जाती है। पश्चिम बंगाल की राजनीति तो जैसे भूचाल पर सवार है। तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी कलह ने अब ऐसा विकराल रूप ले लिया है कि पार्टी में टूट के बादल साफ-साफ मंडराने लगे हैं। लोकसभा चुनावों में मिली हार के बाद अब पार्टी के सांसदों ने ही बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है, जिससे ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा का गुस्सा तो इन बागी सांसदों पर ऐसा फूटा कि उन्होंने सीधे-सीधे चुनौती दे डाली। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने पोस्ट में इन नेताओं को ‘लालची, मतलबी और गद्दार’ तक कह डाला। मोइत्रा ने तीखे तेवर दिखाते हुए साफ लफ्जों में कहा कि ये सभी सांसद 2024 में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीते थे, जनादेश एनडीए के लिए नहीं था। उनका सीधा प्रहार था कि अगर दम है तो ये ‘पीली पैंट वाले’ सभी बागी नेता अब भाजपा में शामिल हो जाएं, अपनी-अपनी सीटों से इस्तीफा दें और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर दिखाएं। ‘देखते हैं आप कितने बड़े हीरो हैं,’ यह कहकर उन्होंने इन नेताओं की असलियत सामने लाने का आह्वान किया।

यह सब तब हुआ जब तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ गईं। बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार समेत लगभग बीस तृणमूल सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखकर आधिकारिक तौर पर एनडीए का हिस्सा बनने की अपनी मंशा जाहिर करने का फैसला किया। यह कदम तृणमूल संसदीय दल में एक बड़ी टूट का स्पष्ट संकेत है।

काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में बगावत की शुरुआत

तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदार, जिन्हें पहले व्हिप के पद से हटाए जाने के बाद पार्टी से नाराजगी चल रही थी, उन्होंने इस बगावत का नेतृत्व किया। उनका तर्क है कि लोगों के फैसले को देखते हुए, उनका मानना है कि उनका “आगे का राजनीतिक रास्ता एनडीए के साथ होना चाहिए।” यह बात उन्होंने ऐसे समय कही है, जब पार्टी को एकजुटता की सबसे ज्यादा जरूरत है। दस्तीदार ने बताया कि उनके साथ तृणमूल के लगभग बीस सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी सौंपकर एनडीए का हिस्सा बनने की अपनी इच्छा को आधिकारिक रूप से दर्ज कराने का निर्णय लिया है।

वहीं, एक और बागी तृणमूल सांसद शर्मिला सरकार ने भी इस बात की पुष्टि की। उन्होंने कहा, “हम बीस सांसदों का एक अलग ग्रुप बना रहे हैं और एनडीए को सपोर्ट करने जा रहे हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि काकोली घोष दस्तीदार को उनकी चीफ व्हिप बनाया गया है और शताब्दी रॉय उनकी डिप्टी लीडर होंगी। यह घोषणा पार्टी के लिए एक और बड़ा झटका है, जो यह दर्शाता है कि असंतोष अब सतह पर आ चुका है।

ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 विधायकों का अलग गुट

यह पूरी घटना पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहले ही देखी जा चुकी एक प्रवृत्ति का दोहराव मात्र है। ठीक इसी तरह, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अट्ठावन विधायकों ने एक अलग समूह बनाया था और शिवसेना के पुराने पैटर्न से सीख लेते हुए, खुद को “असली” तृणमूल होने का दावा पेश किया था। उनकी शिकायत राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता के लिए पार्टी की पसंद शोभनदेब चटर्जी से थी। विधानसभा स्पीकर ने भी इस पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी को स्वीकार कर लिया था और उन्हें पार्टी के कमरे की चाबियां भी सौंप दी थीं।

इस तरह से, चुनाव में मिली हार के बाद पहले राज्य विधानसभा में और अब लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस में फूट पड़ गई है। यह सिर्फ सांसदों की दलबदल नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर गहरे पैठे असंतोष और नेतृत्व पर सवाल खड़े करने की एक बड़ी बानगी है। देखना यह होगा कि ममता बनर्जी इस सियासी झटके से कैसे निपटती हैं और क्या वे अपनी पार्टी को इस टूट से बचा पाती हैं या नहीं।