भोपाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 कार्यशाला, भविष्य की शिक्षा और रोजगार पर हुआ बड़ा मंथन, विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों से हुए 30 अहम MoU

भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला में वक्ताओं ने मानसिक तनाव को दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती बताया और इसके समाधान के लिए योग को आवश्यक माना। मंगलवार को प्रशासन अकादमी में “उभरते ज्ञान क्षेत्र, उन्नत पाठ्यक्रम: दृष्टि, दिशा एवं क्रियान्वयन” विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यशाला में शिक्षाविदों और विशेषज्ञों

Aug 4, 2026 - 16:30
भोपाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 कार्यशाला, भविष्य की शिक्षा और रोजगार पर हुआ बड़ा मंथन, विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों से हुए 30 अहम MoU

भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला में वक्ताओं ने मानसिक तनाव को दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती बताया और इसके समाधान के लिए योग को आवश्यक माना। मंगलवार को प्रशासन अकादमी में “उभरते ज्ञान क्षेत्र, उन्नत पाठ्यक्रम: दृष्टि, दिशा एवं क्रियान्वयन” विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यशाला में शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि आज मानसिक तनाव एक वैश्विक चुनौती का रूप ले चुका है, जिसका एकमात्र समाधान योग में निहित है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि समाज में बढ़ती समस्याओं का एक मुख्य कारण भारतीय जीवन मूल्यों से दूरी है। डॉ. कोठारी ने ‘विकसित भारत’ के निर्माण का आधार शिक्षा को बताते हुए कहा कि ज्ञान, चरित्र और कौशल के समन्वय से ही शिक्षा पूर्ण होती है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति से युवाओं में नैतिक मूल्यों का विकास: मुख्यमंत्री

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से युवा पीढ़ी नैतिक मूल्यों से जुड़ रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह नीति युवाओं को समय की मांग के अनुरूप शिक्षित एवं प्रशिक्षित कर देश और प्रदेश को मजबूती प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद से उच्च शिक्षा विभाग ने इसके विभिन्न आयामों पर सराहनीय कार्य किया है। कार्यशाला के दौरान उच्च शिक्षा विभाग ने विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के साथ 30 महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए।

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पाठ्यक्रमों में शामिल होगी भारतीय ज्ञान परंपरा: इंदर सिंह परमार

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने राज्य सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रमों में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य ऐसे पाठ्यक्रम तैयार करना है, जिनमें ज्ञान के साथ-साथ कौशल विकास भी समाहित हो। मंत्री परमार ने विद्यार्थियों के प्लेसमेंट सुनिश्चित करने और उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था विकसित करने पर विशेष बल देने की बात कही।

बहुविषयक शिक्षा की जरूरत पर जोर

भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा ने वर्तमान समय में बहुविषयक शिक्षा (मल्टी-डिसिप्लिनरी एजुकेशन) की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन का असर पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ रहा है, इसलिए शिक्षा में वैज्ञानिक सोच और आपदा प्रबंधन को शामिल करना अनिवार्य है। डॉ. महापात्रा ने वर्ष 2030 तक एक ऐसा इकोसिस्टम विकसित करने की आवश्यकता बताई, जो समय रहते आपदाओं की चेतावनी दे सके। साथ ही, मौसम विभाग ने शोधार्थियों को आवश्यक डेटा उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया।

उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने विभाग की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों में हजारों सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति से महाविद्यालयों में फैकल्टी की कमी दूर हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), इंजीनियरिंग, डिजिटल तकनीक और फैकल्टी डेवलपमेंट पर भी विशेष ध्यान दे रहा है।

राष्ट्रीय संस्थानों से हुए कुल 30 MoU

कार्यशाला के दौरान उच्च शिक्षा विभाग ने देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ कुल 30 एमओयू किए। इनमें आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी मद्रास, आईआईटी गुवाहाटी, आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी, आईआईटी रुड़की, आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी इंदौर, भारत मौसम विज्ञान विभाग, अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, ट्रॉपिकल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, एएमपीआरआई, भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय, मध्यप्रदेश पुलिस, श्रम विभाग, राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान तथा क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान भोपाल जैसे प्रमुख संस्थान शामिल थे।

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इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा को उद्योग, अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल कौशल, जलवायु अध्ययन, पर्यावरण, साइबर सुरक्षा, स्टार्टअप, सुशासन और रोजगार के अवसरों से जोड़ना है। इन एमओयू के माध्यम से विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर रोजगार के अवसर प्रदान किए जा सकेंगे। यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगी और विद्यार्थियों को वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करेगी।

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Anand Sahay पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और ब्रेकिंग न्यूज़ तथा राष्ट्रीय खबरों को कवर करने में विशेष रुचि रखते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण कर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।