भोपाल में आवासीय क्षेत्रों पर नगर निगम की बड़ी कार्रवाई, 15 से ज्यादा प्रतिष्ठान किए सील, व्यापारियों में बढ़ी चिंता
भोपाल में आवासीय इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम ने शनिवार को बड़ा अभियान चलाया। दरअसल कार्रवाई के दौरान 15 से अधिक प्रतिष्ठानों को सील किया गया। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में उठाया गया है। शहर के कई इलाकों में लंबे समय से रहवासी मकानों में दुकानें, क्लीनिक, शोरूम
भोपाल में आवासीय इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम ने शनिवार को बड़ा अभियान चलाया। दरअसल कार्रवाई के दौरान 15 से अधिक प्रतिष्ठानों को सील किया गया। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में उठाया गया है। शहर के कई इलाकों में लंबे समय से रहवासी मकानों में दुकानें, क्लीनिक, शोरूम और अन्य व्यवसाय संचालित होने की शिकायतें मिल रही थीं।
दरअसल नगर निगम का कहना है कि कार्रवाई से पहले संबंधित लोगों को नोटिस दिए गए थे। वहीं व्यापारी संगठनों का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त समय और कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं दिया गया। इसी वजह से शहर में इस कार्रवाई को लेकर बहस तेज हो गई है।
किन इलाकों पर पड़ा असर?
वहीं नगर निगम ने अरेरा कॉलोनी, बावड़ियाकलां, रोहित नगर समेत कई प्रमुख आवासीय क्षेत्रों में उन भवनों पर कार्रवाई शुरू की, जहां नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। अधिकारियों के मुताबिक इस अभियान से पहले 1000 से अधिक नोटिस जारी किए गए थे। कई भवन मालिकों ने नोटिस मिलने के बाद स्वयं अपना व्यवसाय बंद कर दिया, जबकि कई प्रतिष्ठानों को सील करना पड़ा। कार्रवाई के दौरान बावड़ियाकलां में एक टैटू शॉप को सील करने पहुंचे निगम कर्मचारियों और भाजपा पार्षद के पति रामबाबू पाटीदार के बीच तीखी बहस भी हुई। उनका कहना था कि यदि नियम लागू किए जा रहे हैं तो पूरे शहर में एक समान कार्रवाई होनी चाहिए। दूसरी ओर नगर निगम ने स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी विशेष क्षेत्र को निशाना बनाकर नहीं, बल्कि अदालत के आदेशों के पालन के तहत चलाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आगे भी नियमों के मुताबिक अभियान जारी रहेगा।
व्यापारियों की आपत्ति क्या है?
वहीं कार्रवाई के बाद व्यापारी संगठनों ने नगर निगम के फैसले पर कई सवाल उठाए हैं। व्यापारियों का कहना है कि वे वर्षों से कमर्शियल दर पर बिजली बिल, संपत्ति कर और अन्य सरकारी शुल्क जमा कर रहे हैं। उनके पास ट्रेड लाइसेंस, जीएसटी रजिस्ट्रेशन और अन्य जरूरी दस्तावेज भी हैं। उनका तर्क है कि शहर में लंबे समय से नया मास्टर प्लान लागू नहीं हुआ और पर्याप्त कमर्शियल क्षेत्र विकसित नहीं किए गए। ऐसे में मजबूरी में कई कारोबार आवासीय भवनों से संचालित हो रहे हैं। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने भी कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगाने और मिक्स लैंड यूज जैसी व्यवस्था लागू करने की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि अस्पताल, बैंक, क्लीनिक और अन्य जरूरी सेवाएं भी इन्हीं इलाकों से संचालित होती हैं, इसलिए अचानक सीलिंग से लोगों की सुविधा और हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।