शिक्षा व्यवस्था पर जीतू पटवारी के सरकार से सवाल, बोले “Demographic Dividend संकट में”, श्वेतपत्र की मांग
मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार से सवाल किए हैं। भोपाल प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है लेकिन शिक्षा और रोजगार के अवसरों की कमी के कारण यह जनसांख्यिकीय […]
मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार से सवाल किए हैं। भोपाल प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है लेकिन शिक्षा और रोजगार के अवसरों की कमी के कारण यह जनसांख्यिकीय अवसर चुनौती में बदलता जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में 10 करोड़ से अधिक युवा उच्च शिक्षा से बाहर हैं, लगभग 12 करोड़ बच्चे स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर रहे हैं और लगभग 8.7 करोड़ युवा शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण से बाहर हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत के सामने एक ओर जन्मदर में लगातार गिरावट के कारण आने वाले वर्षों में युवा आबादी का हिस्सा कम होने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में बच्चे और युवा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से नहीं जुड़ पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अनुसार भारत की कुल प्रजनन दर 2014 में 2.3 से घटकर 2024 में 1.9 हो चुकी है। अनुमान के मुताबिक 2026-30 में यह 1.8 और 2031-35 में 1.7 तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि भारत पहले ही 2.1 के Replacement Level से नीचे जा चुका है।
जीतू पटवारी ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार से किए सवाल
जीतू पटवारी ने कहा कि कक्षा 1 से 5 तक 92.4 प्रतिशत बच्चे पहुंचते हैं, जबकि कक्षा 1 से 8 तक यह आंकड़ा 82.8 प्रतिशत और कक्षा 1 से 10 तक 62.9 प्रतिशत रह जाता है। कक्षा 1 से 12वीं तक सिर्फ 47.2 प्रतिशत बच्चे पहुंच रहे हैं। कांग्रेस ने इस आधार पर कहा कि 100 बच्चों में लगभग 52.8 बच्चे 12वीं तक पहुंचने से पहले ही शिक्षा व्यवस्था से बाहर हो जाते हैं।
उन्होंने सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी का मुद्दा भी उठाया। कांग्रेस नेता ने कहा कि 2014-15 में देश में 11.07 लाख सरकारी स्कूल थे, जो 2025-26 में घटकर 10.05 लाख रह गए। यानी करीब 1.02 लाख सरकारी स्कूलों की शुद्ध कमी दर्ज की गई। मध्यप्रदेश में इसी अवधि के दौरान करीब 30,650 सरकारी स्कूलों की कमी का दावा किया गया।
शिक्षकों की कमी को लेकर भी जीतू पटवारी ने सरकार से सवाल किए। उन्होंने रहा कि मध्यप्रदेश में 2,269 Single-Teacher Schools बताए गए हैं, जिनमें करीब 2.29 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि देश में 5,663 Zero-Enrolment Schools हैं, जहां एक भी बच्चा नामांकित नहीं है। उन्होंने नीति आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 36 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में 50 से कम विद्यार्थी हैं और इनमें केवल एक या दो शिक्षक हैं।
गरीबी और आर्थिक मजबूरी का भी शिक्षा पर असर
जीतू पटवारी ने बच्चों के स्कूल छोड़ने के पीछे गरीबी और पारिवारिक जिम्मेदारियों का मुद्दा उठाया। Economic Survey 2025-26 और PLFS 2023-24 के आंकड़ों के आधार पर कहा गया कि 14 से 18 वर्ष की उम्र में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों में 44 प्रतिशत ने परिवार की आय बढ़ाने के लिए काम करने और 28 प्रतिशत ने घरेलू काम में व्यस्तता को कारण बताया। वहीं 8 प्रतिशत ने शिक्षा को जरूरी नहीं माना, जबकि 1 प्रतिशत ने स्कूल की दूरी और 19 प्रतिशत ने अन्य कारण बताए। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में Secondary शिक्षा की उपलब्धता को लेकर भी कांग्रेस ने अंतर बताया।
उच्च शिक्षा के दायरे से में करोड़ों युवा बाहर
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने उच्च शिक्षा में कम नामांकन को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि AISHE 2023-24 के आधार पर Higher Education का Gross Enrolment Ratio लगभग 30 प्रतिशत बताया गया। इसमें उच्च शिक्षा में कुल नामांकन 4.50 करोड़ और 18-23 वर्ष की अनुमानित आबादी लगभग 15 करोड़ बताई गई। लगभग 10.5 करोड़ युवा Higher Education GER coverage से बाहर हैं।
कांग्रेस ने तुलनात्मक आंकड़ों के जरिए भारत के उच्च शिक्षा GER को भी रेखांकित किया। भारत का GER लगभग 32 प्रतिशत है वहीं यूनाइटेड किंगडम 80 प्रतिशत, अमेरिका 79 प्रतिशत, जर्मनी 77 प्रतिशत, चीन 72 प्रतिशत, जापान 65 प्रतिशत और दक्षिण अफ्रीका 24 प्रतिशत के आंकड़े दिए गए।
उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि Centrally Funded Higher Educational Institutions में 34 प्रतिशत Teaching Posts खाली हैं। स्वीकृत 41,351 पदों में से 27,133 पद भरे और 14,042 पद खाली बताए गए हैं। संस्थानवार आंकड़ों में आईआईआईटी में 54 प्रतिशत, आईआईटी में 39 प्रतिशत और Central Universities में 29 प्रतिशत पद खाली होने की बात कही दावा किया गया।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों की स्थिति और गंभीर है। कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रदेश के 17 सरकारी विश्वविद्यालयों में 1,949 स्वीकृत पदों में से 1,585 पद खाली हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर के 1,069 पदों में सिर्फ 276 पद भरे है और 93 विषयों में एक भी असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं है। कांग्रेस नेता ने पांच सरकारी विश्वविद्यालयों राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय, छिंदवाड़ा, क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय, गुना, क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय, खरगोन, महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर और रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय, सागर में एक भी असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं होने का उल्लेख किया।
सरकार से किए छह सवाल
जीतू पटवारी ने सरकार से पूछा है कि जब कक्षा 1 के 100 बच्चों में सिर्फ 47.2 बच्चे 12वीं तक पहुंच रहे हैं तो Retention बढ़ाने और Dropout रोकने के लिए क्या योजना है। उन्होंने सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी, Single-Teacher Schools, उच्च शिक्षा में कम GER और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में रिक्त पदों को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा।
कांग्रेस नेता ने कहा कि युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है, लेकिन इसके लिए हर बच्चे को स्कूल, हर युवा को उच्च शिक्षा और कौशल तथा युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने होंगे। उन्होंने कहा कि यदि बड़ी संख्या में बच्चे स्कूल से बाहर हो रहे हैं, शिक्षक पद खाली हैं, सरकारी स्कूलों की संख्या घट रही है और उच्च शिक्षा में करोड़ों युवा प्रवेश से बाहर हैं तो Demographic Dividend अपने आप Education Dividend में नहीं बदल सकता।
सरकार से की श्वेत पत्र जारी करने की मांग
उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था के आंकड़ों पर श्वेतपत्र जारी करने, रिक्त शिक्षक पदों को भरने, सरकारी स्कूलों और विश्वविद्यालयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने तथा शिक्षा से रोजगार तक स्पष्ट और समयबद्ध रोडमैप प्रस्तुत करने की मांग की।
“छात्रों की गूंज” का मुख्य उद्देश्य शिक्षा की सुरक्षा, छात्रों के अधिकारों की आवाज़ को बुलंद करना और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सार्थक संवाद करना है।
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— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) September 16, 2026