सीएम डॉ मोहन यादव के निर्देश का असर, ग्वालियर जिले में मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य बढ़ा

सीएम डॉ मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने पिछले दिनों 22 जून को मछुआ कल्याण और मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये थे कि प्रदेश को मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रत्येक जिले में एक हैचरी बनाने के निर्देश दिये थे। इसका असर

Jun 28, 2026 - 20:30
सीएम डॉ मोहन यादव के निर्देश का असर, ग्वालियर जिले में मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य बढ़ा

सीएम डॉ मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने पिछले दिनों 22 जून को मछुआ कल्याण और मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये थे कि प्रदेश को मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रत्येक जिले में एक हैचरी बनाने के निर्देश दिये थे। इसका असर दिखाई देने लगा है। ग्वालियर जिले ने इसी क्रम में इस वर्ष मछली उत्पादन के लक्ष्य को पिछले साल की तुलना में बढ़ाया है।

मत्स्य विभाग ने ग्वालियर जिले में इस वित्तीय वर्ष 2026-27 में मछली उत्पादन का लक्ष्य 4 हजार मैट्रिक टन रखा है। बता दें पिछले साल ये लक्ष्य 3 हजार 62 मैट्रिक टन था। जिले में इन दिनों प्रदेश सरकार मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत मछली पालन से जुड़े किसानों को विशेष प्रोत्साहन भी दे रही है।

हरसी और ककैटो जलाशय में बनेंगे केज

मत्स्य विभाग ने इस साल मछली पालन को बढ़ावा देने के लिये हरसी व ककैटो जलाशय में 1500 केज स्थापित कराने का लक्ष्य रखा है। विभाग के मुताबिक हरसी जलाशय के 1502 हैक्टेयर जल क्षेत्र में 500 केज व ककैटो जलाशय के 472 हैक्टेयर जल क्षेत्र में एक हजार केज स्थापित कराए जायेंगे।

क्या होती है केज विधि?

उल्लेखनीय है कि उन्नत मत्स्य पालन के लिये केज विधि अपनाई जाती है। केज से आशय जालीदार पिंजरे या संरचना से है, जिसे जलाशयों व नदियों इत्यादि में स्थापित कर मछली पालन किया जाता है। मछलियों को केज के अंदर प्राकृतिक जल प्रवाह के बीच रखा जाता है। साथ ही उन्हें नियमित रूप से संतुलित आहार दिया जाता है। इस विधि से कम लागत में अधिक मत्स्य उत्पादन प्राप्त होता है। इस विधि से मछली पालन से मछलियों की वृद्धि तेजी से होती है।

विभाग ने ग्वालियर जिले में मत्स्य बीज की उपलब्धता के लिये इस वित्तीय वर्ष में 270 लाख स्टैंडर्ड फ्राई मत्स्य बीज उत्पादन का लक्ष्य रखा है। पिछले साल 149 स्टैंडर्ड फ्राई मत्स्य बीज का उत्पादन हुआ था। मछुआ समृद्धि योजना के तहत स्मार्ट फिश पार्लर निर्माण के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

Anand Sahay पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और ब्रेकिंग न्यूज़ तथा राष्ट्रीय खबरों को कवर करने में विशेष रुचि रखते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण कर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।