“आंसू सूख गए पर नहीं तय हुई जवाबदेही!” बेतवा पुल हादसे के 80 दिन… 6 मौतों पर सिर्फ ‘फाइलों का खेल’
हमीरपुर के बेतवा पुल हादसे में छह श्रमिकों की मौत के करीब 80 दिन बाद भी अंतिम जवाबदेही तय नहीं हुई है। तकनीकी जांच में निर्माण सामग्री में बड़ी खामी नहीं मिली, जबकि तेज आंधी-तूफान के दौरान काम जारी रहना प्रमुख वजह बताई गई।
Hamirpur: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल के पियर-5 और सेगमेंट गिरने से छह श्रमिकों की मौत हुए करीब 80 दिन बीत चुके हैं, लेकिन हादसे की अंतिम जवाबदेही अब तक तय नहीं हो सकी है। 28/29 मई की रात हुए इस हादसे के बाद तकनीकी जांच में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में कोई बड़ी खामी सामने नहीं आने की बात कही गई है। वहीं, तेज आंधी-तूफान के दौरान निर्माण कार्य जारी रहना हादसे की प्रमुख वजह बताई जा रही है।
जुलाई के पहले सप्ताह में मिली तकनीकी जांच रिपोर्ट
हादसे के बाद शासन स्तर से गठित तीन सदस्यीय टीम ने एक जून को मौके पर पहुंचकर पियर-5 से कंक्रीट, सरिया, कपलर और एग्रीगेट के नमूने लिए थे। इन नमूनों की जांच आईआईटी-बीएचयू में कराई गई। बताया जा रहा है कि तकनीकी जांच रिपोर्ट जुलाई के पहले सप्ताह में ही सेतु निगम को मिल गई थी और इसे शासन को भेज दिया गया है।
जांच में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में बड़ी खामी नहीं मिलने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में तेज आंधी-तूफान के दौरान निर्माण कार्य जारी रहना हादसे की प्रमुख वजहों में शामिल बताया गया है।
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सहायक अभियंता निलंबित
हादसे के बाद सहायक अभियंता गजेंद्र कुमार चौधरी को निलंबित किया गया था। वहीं डीपीएम दिलीप कुमार के खिलाफ विभागीय जांच जारी है। हालांकि, दोनों के खिलाफ कार्रवाई फिलहाल जांच के दायरे तक ही सीमित है। छह श्रमिकों की मौत के लिए अंतिम रूप से किसकी जिम्मेदारी तय होगी, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। वहीं, निर्माण कार्य से जुड़ी द शेल्टर कंपनी को ब्लैकलिस्ट और डिबार किया जा चुका है। इसके बावजूद हादसे में हुई छह मौतों की अंतिम प्रशासनिक और विभागीय जवाबदेही तय नहीं हो सकी है।
जिला प्रशासन की जांच समिति भी बनी थी
हादसे के बाद जिला प्रशासन की ओर से भी जांच समिति गठित की गई थी। हालांकि, शासन स्तर पर तकनीकी जांच शुरू होने के बाद जिला स्तरीय समिति को भंग कर दिया गया। हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिजनों को आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। अब परिजन और स्थानीय लोग जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहे हैं।
स्टेबिलिटी जांच के बाद शुरू होगा निर्माण
हादसे के बाद निर्माणाधीन पूरे पुल की स्थिरता यानी स्टेबिलिटी की जांच कराई जानी है। अधिकारियों के अनुसार, स्टेबिलिटी जांच पूरी होने और पुल के सुरक्षित पाए जाने के बाद ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया जाएगा। फिलहाल, तकनीकी रिपोर्ट सामने आने के बावजूद छह श्रमिकों की मौत के मामले में अंतिम जवाबदेही तय नहीं होने से कई सवाल बने हुए हैं। अब निगाहें शासन स्तर पर होने वाली आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।