केन-बेतवा लिंक परियोजना पर आरोपों की सियासत, सरकारी आंकड़े बता रहे अलग कहानी, 50 हजार के दावे से मुआवजे तक जानिए पूरी हकीकत
छतरपुर/पन्ना। केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किए जाने के बाद विस्थापन, मुआवजे, पुनर्वास, पर्यावरण और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि सरकार और प्रशासन की ओर से सामने
छतरपुर/पन्ना। केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किए जाने के बाद विस्थापन, मुआवजे, पुनर्वास, पर्यावरण और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि सरकार और प्रशासन की ओर से सामने रखे गए आंकड़ों में तस्वीर अलग है। करीब 50 हजार लोगों के प्रभावित होने के दावे के मुकाबले प्रशासन ने यह संख्या लगभग 23 हजार बताई है। वहीं मुआवजे को लेकर दावा है कि विशेष पुनर्वास पैकेज की 96 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है। छूटे हुए पात्र लोगों के लिए दोबारा सर्वे भी कराया जा रहा है।
50 हजार लोगों के प्रभावित होने का दावा, प्रशासन ने बताई करीब 23 हजार आबादी
मझगवां, रूंझ, केन-बेतवा और नेगुवा परियोजनाओं को लेकर दावा किया जा रहा है कि इनसे करीब 50 हजार लोग प्रभावित हो रहे हैं। प्रशासन के मुताबिक चारों परियोजनाओं को मिलाकर प्रभावित आबादी करीब 23 हजार है।
मझगवां परियोजना में एक गांव पूरी तरह और सात गांव आंशिक रूप से प्रभावित हैं। यहां 1,450 परिवारों के 5,640 लोग प्रभावित बताए गए हैं। रूंझ परियोजना में एक गांव पूरी तरह और एक गांव आंशिक रूप से प्रभावित है। यहां 730 परिवारों के 1,906 लोग प्रभावित हैं।
केन-बेतवा लिंक परियोजना के पन्ना और छतरपुर क्षेत्र में सात गांव पूरी तरह और दो गांव आंशिक रूप से डूब क्षेत्र में प्रभावित हैं। इसके अलावा क्षतिपूर्ति वनीकरण के लिए 14 गांवों की जमीन ली गई है। प्रशासन के मुताबिक इससे कुल 5,039 परिवारों के 15,661 लोग प्रभावित हो रहे हैं। वहीं नेगुवा लघु परियोजना से किसी परिवार का विस्थापन नहीं हो रहा है।
12.50 लाख रुपये का विशेष पैकेज, 96 प्रतिशत भुगतान
केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित 22 गांवों के 5,039 परिवारों के पात्र हितग्राहियों के लिए 12.50 लाख रुपये प्रति परिवार की दर से विशेष पुनर्वास पैकेज मंजूर किया गया है। इसके लिए कुल 604.745 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि इस राशि का 96 प्रतिशत भुगतान प्रभावित परिवारों को किया जा चुका है।
छतरपुर जिले में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए भी व्यवस्था की जा रही है। करीदिया में 179, राईपुरा में 154 और सलैया में 70 प्लॉट आवंटित किए गए हैं। यहां बिजली और पानी जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
बारिश में घरों से निकालने के आरोप पर प्रशासन का जवाब
परियोजना का विरोध कर रहे लोगों ने आरोप लगाया है कि बारिश के दौरान प्रभावित परिवारों को बिना उचित वैकल्पिक व्यवस्था के घरों से हटाया गया। प्रशासन ने इस आरोप को गलत बताया है।
प्रशासन के मुताबिक पन्ना के आठ प्रभावित गांवों के लोगों को बारिश शुरू होने से पहले ही दूसरी जगह शिफ्ट किया जा चुका था। फिलहाल बारिश के बीच किसी परिवार को जबरन घर से नहीं हटाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों ने 12.50 लाख रुपये के एकमुश्त पुनर्वास पैकेज का विकल्प चुना था।
40 लाख पेड़ों और 100 से ज्यादा बाघों पर असर का दावा
परियोजना के विरोध में पर्यावरण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि परियोजना से 21 आदिवासी बहुल गांवों के साथ करीब 40 लाख पेड़ों और पन्ना टाइगर रिजर्व के 100 से ज्यादा बाघों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
इस पर सरकार का कहना है कि परियोजना को पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) के बाद आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरी मिली है। पन्ना टाइगर रिजर्व के संरक्षण के लिए इंटीग्रेटेड लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान बनाया गया है। इसके साथ कैचमेंट एरिया ट्रीटमेंट प्लान और वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट प्लान पर भी काम किया जा रहा है।
प्रशासन के मुताबिक Stage-II वन स्वीकृति की शर्तों के तहत FRL से 10 मीटर नीचे तक पेड़ों की कटाई नहीं की गई है। प्रभावित वन क्षेत्र में वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत पात्र परिवारों की संख्या भी शून्य बताई गई है।
सुप्रीम कोर्ट और NGT में रोक के दावे पर क्या है सरकारी पक्ष?
विरोध के दौरान परियोजना से जुड़े कानूनी मामलों का मुद्दा भी उठाया गया है। इस पर सरकार और प्रशासन का कहना है कि परियोजना क्षेत्र की 6,017 हेक्टेयर वन भूमि से जुड़ी Stage-I, Stage-II और Wildlife Clearance की सभी शर्तों का पालन किया जा रहा है।
सरकारी पक्ष के मुताबिक वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट या नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में परियोजना से संबंधित कोई मामला लंबित नहीं है और परियोजना के काम पर किसी तरह की अदालती रोक भी नहीं है।
महिलाओं को रात में खदेड़ने के आरोप को प्रशासन ने बताया गलत
विरोध प्रदर्शन के दौरान दो से पांच हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती और रात करीब दो बजे 50 महिलाओं को लगभग 10 किलोमीटर तक खदेड़ने के आरोप भी लगाए गए हैं।
प्रशासन ने इन आरोपों को गलत और भ्रामक बताया है। प्रशासन का कहना है कि दौधन बांध निर्माण स्थल पर कुछ लोगों ने पथराव किया और सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ कर काम रोकने की कोशिश की थी। इसके बाद स्थिति संभालने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक पुलिस बल लगाया गया। इस मामले में उपद्रव करने वालों के खिलाफ प्रकरण भी दर्ज किए गए हैं।
पन्ना के लिए 202.50 करोड़ रुपये अतिरिक्त, 14 गांवों में फिर होगा सर्वे
मुआवजे और पुनर्वास को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने पन्ना जिले के लिए 202.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट मंजूर किया है।
छतरपुर कलेक्टर मृणाल मीणा ने 11 अगस्त 2026 को प्रभावित 14 गांवों में दोबारा सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। इसका मकसद ऐसे पात्र लोगों की पहचान करना है, जो मुआवजे या पुनर्वास के लाभ से छूट गए हैं।
इसके अलावा पांच गांवों के 59 लोगों के लिए 7.37 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई है। मार्च 2024 तक 18 साल की उम्र पूरी कर चुके 313 हितग्राहियों को भी विशेष पैकेज का लाभ देने के लिए भुगतान की प्रक्रिया चल रही है।
मझगवां और रूंझ के प्रभावितों के लिए भी 12.50 लाख रुपये का पैकेज
मझगवां और रूंझ बांध परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के लिए भी राज्य सरकार ने 10 जुलाई 2026 को केन-बेतवा की तर्ज पर 12.50 लाख रुपये प्रति परिवार का विशेष पैकेज मंजूर किया है। इसका भुगतान अभी चल रहा है।
सरकारी पक्ष के मुताबिक इनमें ऐसे परिवार भी शामिल हैं, जिन्हें पहले इन परियोजनाओं में ₹5 लाख तक का मुआवजा मिल चुका है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने इनके लिए भी 12.50 लाख रुपये प्रति परिवार का विशेष पैकेज मंजूर किया है।
आंदोलन को लेकर सरकार ने उठाए राजनीतिक मंशा पर सवाल
सरकार और प्रशासन की ओर से सामने रखे गए पक्ष में आंदोलन के पीछे राजनीतिक मंशा होने का भी दावा किया गया है। इसमें जय किसान संगठन के अमित भटनागर का जिक्र करते हुए बताया गया है कि वे आम आदमी पार्टी के टिकट पर बिजावर विधानसभा सीट से 2018 और 2023 में चुनाव लड़ चुके हैं। सरकारी पक्ष के मुताबिक 2018 में उन्हें 1.34 प्रतिशत और 2023 में 2.49 प्रतिशत वोट मिले थे। आंदोलन से जुड़ी दिव्या अहिरवार को भी आम आदमी पार्टी की पार्षद बताया गया है।
सरकारी पक्ष का आरोप है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए इस मुद्दे को हवा दी जा रही है। यह भी दावा किया गया है कि आंदोलन में ऐसे लोग ज्यादा शामिल हैं, जिन्हें मझगवां और रूंझ परियोजनाओं में पहले 5 लाख रुपये तक का मुआवजा मिल चुका है और अब उनके लिए 12.50 लाख रुपये प्रति परिवार का विशेष पैकेज भी मंजूर किया जा चुका है।
सरकार की ओर से यह आरोप भी लगाया गया है कि परिवारों में बढ़ी हुई बालिग सदस्य संख्या के आधार पर और अधिक मुआवजा दिलाने का भरोसा देकर लोगों को आंदोलन के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
सरकार का दावा- कोई पात्र व्यक्ति नहीं रहेगा मुआवजे से वंचित
पूरे विवाद पर सरकार और प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों के मुआवजे और पुनर्वास को लेकर लगातार काम किया जा रहा है। केन-बेतवा परियोजना में विशेष पुनर्वास पैकेज की 96 प्रतिशत राशि के भुगतान का दावा किया गया है। इसके बाद भी छतरपुर के 14 प्रभावित गांवों में दोबारा सर्वे कराया जा रहा है, ताकि कोई वास्तविक पात्र व्यक्ति लाभ से वंचित न रहे।
पन्ना के लिए 202.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट, पांच गांवों के 59 लोगों के लिए 7.37 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि और मार्च 2024 तक 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके 313 हितग्राहियों को विशेष पैकेज देने की प्रक्रिया को भी सरकार प्रभावित परिवारों के हित में उठाए गए कदम के रूप में बता रही है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना को सरकार बुंदेलखंड के विकास और क्षेत्र में पानी की समस्या के समाधान के लिए बेहद अहम बता रही है। वहीं परियोजना को लेकर जारी विरोध के बीच सरकार का कहना है कि प्रभावित परिवारों के मुआवजे और पुनर्वास का ध्यान रखा जा रहा है और दोबारा सर्वे के बाद छूटे हुए पात्र लोगों को भी योजना का लाभ दिया जाएगा।