MP में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की आउटसोर्सिंग पर कांग्रेस का विरोध, उमंग सिंघार बोले- गरीबों का इलाज मुनाफे का जरिया नहीं
मध्यप्रदेश में 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन की जिम्मेदारी निजी संस्थाओं को सौंपने के सरकार के फैसले को लेकर कांग्रेस हमलावर है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में कदम बताते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों
मध्यप्रदेश में 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन की जिम्मेदारी निजी संस्थाओं को सौंपने के सरकार के फैसले को लेकर कांग्रेस हमलावर है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में कदम बताते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा है।
उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की जिम्मेदारी सरकार की है और गरीबों को इलाज उपलब्ध कराना सरकार का दायित्व है। कांग्रेस नेता ने पूछा कि आखिर भाजपा सरकार सरकारी अस्पतालों को मजबूत करने के बजाय उन्हें ठेकेदारों के हवाले क्यों कर रही है।
क्या है मामला
मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने 16 जून को पायलट प्रोजेक्ट के तहत रीवा, देवास और गुना जिले के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) के प्रबंधन को आउटसोर्स करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। यह व्यवस्था शुरुआती तौर पर पांच साल के लिए लागू की जाएगी और इसके प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। सफल रहने पर इसे दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों तक भी बढ़ाया जा सकता है। सरकार के मॉडल में स्वास्थ्य केंद्रों का स्वामित्व सरकारी ही रहेगा। सरकार की ओर से भवन, दवाइयां और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि निजी संस्था को डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की व्यवस्था तथा रोजमर्रा के संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग को निजी संचालकों के चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।
सरकार के फैसले के पीछे ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी को प्रमुख वजह बताया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्वीकृत 1,320 विशेषज्ञ डॉक्टरों के पदों में केवल 113 पद भरे हुए हैं। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। चयनित 18 केंद्रों में भी डॉक्टरों की कमी के कारण विशेषज्ञ सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
कांग्रेस ने सरकार के फैसले का विरोध किया
इस मामले पर उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि सरकार स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी दूर करने के बजाय उन्हें निजी हाथों में सौंपने का रास्ता अपना रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इन्हें निजी संस्थाओं को नहीं सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने के बजाय सरकार उन्हें ठेकेदारों के हवाले क्यों कर रही है? कांग्रेस नेता ने कहा कि ग्रामीण और गरीब आबादी के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्र इलाज का महत्वपूर्ण सहारा हैं और स्वास्थ्य सेवाओं को निजी मुनाफे का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।