“कश्मीर भारत का था और रहेगा”: UN में पेटल गहलोत के तीखे वार से घबराया पाकिस्तान

संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण के बाद भारत ने जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए आतंकवाद, कश्मीर और पाकिस्तान के लोकतांत्रिक ढांचे से जुड़े मुद्दे उठाए।

Sep 27, 2026 - 20:30
“कश्मीर भारत का था और रहेगा”: UN में पेटल गहलोत के तीखे वार से घबराया पाकिस्तान

New Delhi: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बयानों का कड़ा जवाब दिया। भारत ने ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ का उपयोग करते हुए स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है। साथ ही, पाकिस्तान में आतंकवाद, सेना के दखल और मानवाधिकारों की स्थिति पर तीखा प्रहार करते हुए उसके दावों को बेनकाब किया।

पेटल गहलोत ने दिया पाकिस्तान को जवाब

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत की ओर से पेटल गहलोत, फर्स्ट सेक्रेटरी, स्थायी मिशन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बयान पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत की स्थिति स्पष्ट की।

भारत की ओर से पाकिस्तान की सरकार को लेकर कड़ी टिप्पणी भी की गई। गहलोत ने पाकिस्तान के राजनीतिक ढांचे पर सवाल उठाते हुए कहा कि वहां वास्तविक सत्ता को लेकर भ्रम नहीं होना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान में सेना की भूमिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए।

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लोकतंत्र और मानवाधिकार के मुद्दे पर निशाना

भारत ने पाकिस्तान के मानवाधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े बयानों पर भी सवाल उठाया। गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान को पहले अपने यहां की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए और उसके बाद दूसरे देशों को लोकतंत्र और मानवाधिकारों पर उपदेश देना चाहिए। भारत ने पाकिस्तान में हाल के संवैधानिक बदलावों का भी जिक्र किया और सेना की भूमिका को लेकर अपनी आपत्ति सामने रखी। यह टिप्पणी पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक व्यवस्था पर भारत की प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आई।

कश्मीर पर भारत ने दोहराया अपना रुख

जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के बयान पर भारत ने अपनी पुरानी स्थिति दोहराई। गहलोत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK की स्थिति का भी मुद्दा उठाया। भारतीय पक्ष ने वहां के लोगों के अधिकारों और स्थानीय परिस्थितियों को लेकर सवाल खड़े किए। वहीं, पाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर को लेकर भारत के रुख का विरोध करता रहा है।

9/11 और ओसामा बिन लादेन का भी जिक्र

भारत ने अपने जवाब में अमेरिका में हुए 9/11 आतंकी हमलों का भी संदर्भ दिया। गहलोत ने ओसामा बिन लादेन का जिक्र करते हुए कहा कि वह पाकिस्तान में लंबे समय तक छिपा रहा था। भारत ने इस उदाहरण का इस्तेमाल आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के रिकॉर्ड पर सवाल उठाने के लिए किया। गहलोत ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में इस तरह के उदाहरणों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

ऑपरेशन सिंदूर का हवाला, आतंकवाद पर चेतावनी

भारत ने सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर अपनी सुरक्षा नीति को भी स्पष्ट किया। गहलोत ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल जारी रखेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद जारी रहता है तो उसके परिणाम होंगे। भारत ने यह भी कहा कि आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाना मिलने की धारणा अब पहले जैसी नहीं रह गई है।

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धार्मिक असहिष्णुता के मुद्दे पर भी सवाल

भारत ने पाकिस्तान के धार्मिक सहिष्णुता से जुड़े बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। गहलोत ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति और धार्मिक मामलों से जुड़े कानूनों को लेकर सवाल उठाए। भारत का कहना था कि पाकिस्तान को दूसरे देशों को धार्मिक सहिष्णुता का पाठ पढ़ाने से पहले अपने यहां अल्पसंख्यकों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। पाकिस्तान की ओर से भारत पर लगाए गए आरोपों को लेकर दोनों देशों के बीच संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पहले भी तीखी बहस होती रही है।

UN में फिर आमने-सामने भारत-पाकिस्तान

UNGA में भारत की यह प्रतिक्रिया शहबाज शरीफ के भाषण के बाद आई, जिसमें उन्होंने कश्मीर और भारत-पाकिस्तान संबंधों से जुड़े मुद्दे उठाए थे। भारत ने Right of Reply के जरिए उन दावों का जवाब दिया और आतंकवाद को दोनों देशों के बीच विवाद का प्रमुख मुद्दा बताया।

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