अमेरिका के पूर्वी तट पर ‘नॉर-ईस्टर’ का कहर: 425 उड़ानें रद्द, डूबने लगीं सड़कें; रेड अलर्ट जारी
अमेरिका के पूर्वी तट पर मौसम ने अचानक ऐसा रुख बदला कि कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गईं और समुद्र की लहरें खतरनाक ऊंचाई तक पहुंच गईं। तेज हवाओं और भारी बारिश के बीच अब भी खतरा पूरी तरह टला नहीं है।
New Delhi: अमेरिका के पूर्वी तट पर इस समय शक्तिशाली नॉर-ईस्टर तूफान का असर देखने को मिल रहा है। यह तूफान मिड-अटलांटिक से लेकर न्यू इंग्लैंड तक भारी बारिश, तेज हवाएं, ऊंची समुद्री लहरें और तटीय बाढ़ लेकर आया है। राष्ट्रीय मौसम सेवा ने भी तटीय इलाकों में बाढ़, खतरनाक समुद्री धाराओं और तेज हवाओं को लेकर चेतावनी जारी की है।
1 लाख से ज्यादा घरों की बिजली गुल
तूफान के दौरान पेड़ और उनकी शाखाएं गिरने से बिजली की लाइनें प्रभावित हुईं। एक समय पर 1 लाख से ज्यादा घरों और कारोबारों की बिजली चली गई थी। शनिवार दोपहर तक न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क, कनेक्टिकट और पेंसिल्वेनिया में 88 हजार से ज्यादा ग्राहक बिजली संकट से जूझ रहे थे। कई इलाकों में बिजली बहाल करने का काम जारी रहा। तेज हवाओं के कारण गिरे पेड़ों और तारों ने राहत कार्य को भी मुश्किल बनाया।
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425 उड़ानें रद्द, 1300 से ज्यादा लेट
तूफान का असर हवाई यातायात पर भी पड़ा है। फ्लाइट ट्रैकिंग कंपनी FlightAware के आंकड़ों के अनुसार शनिवार को करीब 425 उड़ानें रद्द की गईं, जबकि 1,338 से ज्यादा उड़ानों में देरी हुई। खराब मौसम के कारण कई कार्यक्रम, कॉन्सर्ट और खेल आयोजन भी प्रभावित हुए।
सड़कों पर भरा पानी, नावों से आवाजाही
न्यू जर्सी और न्यूयॉर्क के कई तटीय इलाकों में पानी भरने से हालात बिगड़ गए। कुछ स्थानों पर लोग बाढ़ वाली सड़कों पर छोटी नावों और कयाक की मदद से निकलते नजर आए। सर्फ सिटी और आसपास के इलाकों में घरों तक पानी पहुंच गया, जबकि समुद्र तटों पर तेज लहरों से कटाव भी हुआ। मौसम विभाग के अनुसार समुद्र में लहरों की ऊंचाई कई स्थानों पर बेहद खतरनाक रही। अटलांटिक सिटी के पास समुद्री क्षेत्र में 12 से 16 फीट तक की लहरें और तेज हवाएं दर्ज की गईं।
क्या होता है नॉर-ईस्टर?
नॉर-ईस्टर अमेरिका के पूर्वी तट के पास बनने वाला एक शक्तिशाली तूफानी सिस्टम है। इसका नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इसके दौरान तट की ओर आने वाली हवाएं आमतौर पर उत्तर-पूर्व दिशा से चलती हैं। यह सिस्टम ठंडी और गर्म हवाओं के टकराव से मजबूत हो सकता है। इसके साथ तेज हवाएं, भारी बारिश, ऊंची समुद्री लहरें और तटीय बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
इस बार खतरा क्यों ज्यादा है?
इस तूफान की एक बड़ी वजह इसका धीमी गति से आगे बढ़ना भी बताई जा रही है। लंबे समय तक किसी क्षेत्र में खराब मौसम बने रहने से बारिश और तटीय बाढ़ का असर बढ़ सकता है। इसके अलावा, इस समय प्रशांत महासागर में एल नीनो मजबूत हो रहा है। NOAA के सितंबर 2026 के आकलन के मुताबिक, उत्तरी गोलार्ध की शरद और सर्दियों में बहुत मजबूत एल नीनो की संभावना 90 फीसदी से अधिक है। हालांकि किसी एक तूफान को सीधे एल नीनो से जोड़ना सावधानी के साथ किया जाना चाहिए।
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खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं
मौसम विभाग ने तटीय इलाकों में ऊंची लहरों, बाढ़ और तेज हवाओं को लेकर चेतावनी जारी रखी है। शनिवार और रविवार के दौरान ऊंचे ज्वार के कारण तटीय बाढ़ का खतरा और बढ़ने की आशंका जताई गई थी।