क्या सच में खत्म हुआ अमेरिका-ईरान टकराव? ट्रंप का बड़ा बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने का समझौता लगभग तैयार है और जल्द हस्ताक्षर हो सकते हैं। उन्होंने परमाणु हथियार न बनाने की शर्त पर सहमति का भी दावा किया है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
New Delhi: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचने के दावे किए जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच युद्ध और तनाव खत्म करने के लिए एक बड़ा समझौता लगभग तैयार है, और इस पर सप्ताहांत तक यूरोप में हस्ताक्षर हो सकते हैं। हालांकि, अब तक किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, जिससे इस दावे को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
वॉशिंगटन से बड़ा दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि ईरान के साथ चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए समझौता लगभग तैयार है। ट्रंप के मुताबिक, इस समझौते पर जल्द ही यूरोप में हस्ताक्षर हो सकते हैं।
कई देशों की भूमिका का दावा
ट्रंप ने बातचीत के दौरान यह भी बताया कि इस पूरे मुद्दे पर कई देशों के नेताओं से चर्चा हुई है। इनमें कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत और पाकिस्तान जैसे देश शामिल हैं। उनके अनुसार, इन देशों की भागीदारी से क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में बातचीत आगे बढ़ रही है।
‘युद्ध खत्म हो चुका है’
बाद में एक डिजिटल रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने बड़ा दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध अब खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि ईरान ने यह स्वीकार कर लिया है कि वह भविष्य में परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। ट्रंप ने कहा कि यही अमेरिका की सबसे बड़ी शर्त थी और इसी को लेकर यह पूरी बातचीत आगे बढ़ी है।
बयान और चेतावनी के बीच विरोधाभास
गौरतलब है कि कुछ ही घंटों पहले ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी भी दी थी। उन्होंने ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर नियंत्रण करने तक की धमकी दी थी। हालांकि, बाद में उनके रुख में बदलाव देखने को मिला और उन्होंने शांति वार्ता में प्रगति का संकेत दिया।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उम्मीद
ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर समझौता सफल होता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खोला जा सकता है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। इसके खुलने से वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल आपूर्ति पर सकारात्मक असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।