FIFA World Cup 2026: खेल फोटोग्राफी की दुनिया में गीतिका तालुकदार का बड़ा मुकाम, यहां पढ़े पूरी खबर
असम की खेल फोटो पत्रकार Gitika Talukdar ने मेहनत और लगन के दम पर खेल पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान बनाई। आज वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी हैं और तीसरी बार फीफा विश्व कप कवर करने की तैयारी कर रही हैं, जिससे वह युवाओं, खासकर लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
New Delhi: खेल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना आसान नहीं होता, लेकिन असम की महिला फोटो पत्रकार ने लगातार मेहनत, साहस और जुनून के दम पर यह कर दिखाया। चोटें लगीं, कैमरे टूटे, कई बार लोगों ने उनकी क्षमता पर सवाल उठाए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अब वह तीसरी बार फीफा विश्व कप को कवर करने की तैयारी कर रही हैं। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत और देश की महिलाओं के लिए गर्व की बात है।
शिक्षा के दम पर खेल पत्रकारिता में बनाई पहचान
प्रसिद्ध खेल फोटो पत्रकार Gitika Talukdar ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा Kendriya Vidyalaya से पूरी की। उनके पिता की स्थानांतरण वाली नौकरी के कारण उन्हें बचपन में अलग-अलग शहरों में पढ़ाई करने का अवसर मिला। आगे चलकर उन्होंने Seoul National University से ग्लोबल स्पोर्ट्स मैनेजमेंट (Global Sports Management) में उच्च शिक्षा प्राप्त की। अध्ययन के दौरान उन्होंने खेल मीडिया में लैंगिक असमानता (Gender Inequality in Sports Media) विषय पर शोध भी किया। उन्हें इस अध्ययन के लिए दक्षिण कोरिया के खेल एवं संस्कृति मंत्रालय की ओर से छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई।
छोटे स्तर से शुरू किया करियर
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत स्थानीय समाचार पत्रों और एजेंसियों के लिए काम करके की। शुरुआत में उन्हें बड़े आयोजनों में मौका नहीं मिलता था। कई बार उन्हें मैदान के किनारे घंटों इंतजार करना पड़ता था। पुरुष फोटोग्राफरों के बीच खुद को साबित करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। धीरे-धीरे उनकी तस्वीरों की गुणवत्ता और मेहनत ने लोगों का ध्यान खींचा। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को कवर करना शुरू किया। खासकर फुटबॉल मैचों की तस्वीरों में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाने लगी।
कई मुश्किलों का किया सामना
फोटो पत्रकारिता का काम जितना आकर्षक दिखता है, उतना आसान नहीं होता। मैच कवर करते समय कई बार उन्हें चोटें लगीं। तेज बारिश, भीड़ और धक्का-मुक्की के बीच कैमरे टूटे, उपकरण खराब हुए और लंबे समय तक लगातार काम करना पड़ा। इसके अलावा, महिला होने के कारण उन्हें कई बार भेदभाव का सामना भी करना पड़ा। कुछ लोगों ने यह तक कहा कि खेल पत्रकारिता महिलाओं के लिए नहीं है। लेकिन उन्होंने इन बातों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने हर चुनौती का सामना मजबूती से किया।
फीफा विश्व कप तीसरी बार कर रहीं कवरेज
खेल फोटोग्राफी के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुकीं फोटो पत्रकार अब तीसरी बार फीफा विश्व कप कवर कर रही हैं। इससे पहले वह दो फीफा विश्व कप टूर्नामेंटों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुकी हैं और कई यादगार पलों को अपने कैमरे में कैद कर चुकी हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली सराहना
उनकी मेहनत और बेहतरीन फोटोग्राफी के चलते उन्हें पहली बार फीफा विश्व कप कवर करने का अवसर मिला था, जो किसी भी खेल फोटो पत्रकार के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इसके बाद उनके काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली और उन्हें लगातार बड़े खेल आयोजनों में काम करने के अवसर प्राप्त हुए। विश्व कप के दौरान खींची गई उनकी कई तस्वीरें प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रकाशित हो चुकी हैं। अब आगामी फीफा विश्व कप के साथ वह अपने करियर का तीसरा विश्व कप कवर कर रही हैं, जिससे खेल फोटोग्राफी के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ जाएगा।
फीफा विश्व कप तक पहुंचने का सफर
उनकी मेहनत का सबसे बड़ा परिणाम तब सामने आया जब उन्हें पहली बार फीफा विश्व कप कवर करने का मौका मिला। यह किसी भी खेल फोटो पत्रकार के लिए बड़ा सपना माना जाता है। उनकी बेहतरीन तस्वीरों और प्रोफेशनल काम की वजह से उन्हें लगातार अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली। अब वह तीसरी बार फीफा विश्व कप कवर करने जा रही हैं। इससे पहले भी उन्होंने विश्व कप के कई यादगार पल अपने कैमरे में कैद किए हैं। उनकी तस्वीरें कई बड़े मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित हो चुकी हैं।
युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
आज वह हजारों युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनका कहना है कि अगर इंसान अपने काम के प्रति ईमानदार और मेहनती हो, तो कोई भी मुश्किल उसे रोक नहीं सकती। उन्होंने साबित किया कि सपनों को पूरा करने के लिए हिम्मत और लगातार प्रयास सबसे जरूरी होते हैं।