खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे: भारत के कड़े रुख से थर्राया पाकिस्तान, अपनी नाकामी छुपाने के लिए रचा जल संकट का ड्रामा
सिंधु जल संधि स्थगित होने से बौखलाया पाकिस्तान! असीम मुनीर ने दी युद्ध की धमकी, पर पाक के अपने आंकड़े खोल रहे उसके जल प्रबंधन की पोल। जानिए भारत कैसे चिनाब व रावी नदी पर प्रोजेक्ट्स तेज कर रोक रहा अपने हिस्से के पानी की बर्बादी।
New Delhi: पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 1960 की ऐतिहासिक सिंधु जल संधि (IWT) को स्थगित करने का जो कड़ा फैसला लिया था, उसने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक हड़कंप मचा दिया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से लेकर पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर तक इस फैसले को युद्ध की कार्रवाई करार दे रहे हैं।
6 जुलाई को हुई कोर कमांडरों की बैठक के बाद पाकिस्तानी सेना ने सैन्य तैयारी तक का संकेत दे दिया है। लेकिन भारत का रुख एकदम साफ है ‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।’
अड़ंगेबाजी और विक्टिम कार्ड की खुली पोल
दशकों से भारत जब भी अपनी नदियों पर सुरक्षा और तकनीकी सुधारों के साथ कोई पनबिजली या सिंचाई परियोजना शुरू करता, पाकिस्तान तुरंत अडंगा लगा देता। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को निचले बहाव वाला पीड़ित देश बताकर सहानुभूति बटोरना उसकी पुरानी आदत रही है। हालांकि, पाकिस्तान के अपने ही सरकारी दस्तावेज उसके झूठ की पोल खोलते हैं।
आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान में हर साल करीब 35 MAF पानी बिना किसी इस्तेमाल के समंदर में बह जाता है और नहरों के रिसाव के कारण 30 से 40 फीसदी पानी बर्बाद होता है। यानी समस्या भारत का रुख नहीं, बल्कि पाकिस्तान का खुद का खराब जल प्रबंधन है।
चिनाब और रावी पर बड़ा एक्शन
पाकिस्तान के झूठे दावों को दरकिनार कर अब भारत ने अपने हक के पानी का 100% इस्तेमाल करने की तैयारी पूरी कर ली है। चिनाब बेसिन पर 1,856 मेगावाट का सवालकोट, 1,000 मेगावाट का पाकल दुल, 850 मेगावाट का रातले, 624 मेगावाट का किरू और 540 मेगावाट का क्वार हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट अब रफ्तार पकड़ चुके हैं। ये प्रोजेक्ट न केवल भारत की क्लीन एनर्जी की जरूरत पूरी करेंगे, बल्कि जम्मू-कश्मीर और आसपास के राज्यों के लिए वरदान साबित होंगे।
उझ परियोजना और गाद (सेडिमेंट) की सफाई
इसके अलावा रावी नदी की सहायक नदी पर बन रही उझ बहुउद्देशीय परियोजना से उस पानी को रोका जाएगा जो अब तक बेकार होकर पाकिस्तान की सीमा में बह जाता था। इतना ही नहीं, आधुनिक तकनीक और low-level outlet की मदद से भारतीय बांधों में जमा गाद (सेडिमेंट) की सफाई का काम भी शुरू किया जा रहा है, जिसे पाकिस्तान की फिजूल आपत्तियों के कारण वर्षों से टालना पड़ा था। भारत अब अपनी सीमाओं के भीतर आधुनिक इंजीनियरिंग और तकनीक के बूते अपनी जल सुरक्षा को अंतिम रूप देने में जुट गया है।