अमेरिका की अदालत ने ट्रंप को क्यों दिया झटका? H-1B वीजा पर अब क्या बदलेगा और भारतीयों को कितना होगा फायदा

अमेरिका की संघीय अदालत ने नए H-1B वीजा आवेदनों पर ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस को गैरकानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया है। इस फैसले से भारतीय आईटी पेशेवरों और विदेशी कुशल कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।

Jun 9, 2026 - 08:30
अमेरिका की अदालत ने ट्रंप को क्यों दिया झटका? H-1B वीजा पर अब क्या बदलेगा और भारतीयों को कितना होगा फायदा

New Delhi: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनकी H-1B वीजा नीति को लेकर बड़ा कानूनी झटका लगा है। अमेरिका की एक संघीय अदालत ने नए H-1B वीजा आवेदनों पर लगाए गए 1 लाख डॉलर (करीब 83 लाख रुपये) के अतिरिक्त शुल्क को गैरकानूनी करार देते हुए उसे रद्द करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि इस प्रकार का शुल्क लगाने के लिए संघीय सरकार के पास स्पष्ट कानूनी अधिकार नहीं था, इसलिए यह फैसला अमेरिकी कानून के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

अदालत ने क्या कहा?

बोस्टन की संघीय अदालत के जिला न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने सोमवार को अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाया गया यह शुल्क कानूनी सीमाओं से बाहर था। न्यायाधीश ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि संघीय सरकार के पास नए H-1B वीजा आवेदनों पर इतना बड़ा अतिरिक्त शुल्क लगाने का वैध अधिकार नहीं था। इसी आधार पर अदालत ने इस फैसले को अमान्य घोषित करते हुए इसे निरस्त करने का निर्देश दिया।

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क्या था विवाद?

यह मामला 20 डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल द्वारा दायर किए गए मुकदमे से जुड़ा था। इन राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के उस निर्णय को अदालत में चुनौती दी थी, जिसमें सितंबर महीने में नए H-1B वीजा आवेदनों पर 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस लगाने की घोषणा की गई थी।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इतना बड़ा शुल्क न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे विदेशी पेशेवरों और उन्हें नियुक्त करने वाली अमेरिकी कंपनियों पर भी भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। अदालत ने इन तर्कों पर विचार करने के बाद ट्रंप प्रशासन के फैसले को खारिज कर दिया।

भारतीय पेशेवरों के लिए बड़ी राहत

अदालत के इस फैसले को अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर, आईटी विशेषज्ञ और अन्य तकनीकी पेशेवर H-1B वीजा के माध्यम से रोजगार प्राप्त करते हैं।

यदि 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस लागू हो जाती, तो अमेरिका में नौकरी पाने की प्रक्रिया काफी महंगी हो सकती थी। इससे न केवल विदेशी पेशेवर प्रभावित होते, बल्कि उन्हें नियुक्त करने वाली कंपनियों को भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता। अदालत के फैसले से इन आशंकाओं पर फिलहाल विराम लग गया है।

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H-1B वीजा क्यों है महत्वपूर्ण?

H-1B वीजा अमेरिका का एक प्रमुख कार्य वीजा कार्यक्रम है। इसके तहत विदेशी विशेषज्ञों को तकनीक, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में काम करने की अनुमति दी जाती है। भारतीय पेशेवर इस वीजा श्रेणी के सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल हैं।

अमेरिका की कई बड़ी कंपनियां अपनी तकनीकी और पेशेवर जरूरतों को पूरा करने के लिए H-1B वीजा धारकों की नियुक्ति करती हैं। यही कारण है कि इस वीजा से जुड़ी नीतियों का सीधा प्रभाव भारतीय प्रतिभाओं और अमेरिकी उद्योगों दोनों पर पड़ता है।

आगे क्या?

अदालत के इस फैसले के बाद नए H-1B वीजा आवेदनों पर प्रस्तावित 1 लाख डॉलर का अतिरिक्त शुल्क लागू नहीं हो सकेगा। यह निर्णय विदेशी कुशल पेशेवरों, विशेष रूप से भारतीयों, और उन्हें रोजगार देने वाली अमेरिकी कंपनियों के लिए राहत लेकर आया है। साथ ही, यह फैसला यह भी स्पष्ट करता है कि वीजा नीतियों में बड़े बदलाव करते समय सरकार को कानूनी प्रक्रियाओं और अधिकारों का पालन करना होगा।

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