राष्ट्रपति मुर्मू ने स्वीकार किया धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रह्लाद जोशी को मिला शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार, पढ़ें खबर

भारत के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर, भारत के संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत, केंद्रीय मंत्रिपरिषद से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला है, जहां शिक्षा मंत्रालय का प्रभार अब

Jul 25, 2026 - 21:30
राष्ट्रपति मुर्मू ने स्वीकार किया धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रह्लाद जोशी को मिला शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार, पढ़ें खबर

भारत के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर, भारत के संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत, केंद्रीय मंत्रिपरिषद से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला है, जहां शिक्षा मंत्रालय का प्रभार अब कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को अतिरिक्त जिम्मेदारी के तौर पर सौंपा गया है। यह निर्णय देश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का सूचक है, जो सरकार की प्राथमिकताओं और भविष्य की रणनीतियों को परिलक्षित करता है।

कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी, जो वर्तमान में खाद्य और उपभोक्ता मामलों के विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, अब शिक्षा मंत्रालय का भी कार्यभार संभालेंगे। यह निर्णय प्रधानमंत्री की अनुशंसा पर राष्ट्रपति द्वारा निर्देशित किया गया है, जिसके अनुसार जोशी को उनके मौजूदा विभागों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का महत्वपूर्ण प्रभार भी सौंपा गया है। इस अतिरिक्त जिम्मेदारी से उनके मंत्रिस्तरीय पोर्टफोलियो का विस्तार हुआ है और उन्हें देश की शिक्षा नीति और उसके क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर प्राप्त हुआ है। खाद्य और उपभोक्ता मामलों के साथ शिक्षा जैसे व्यापक और संवेदनशील क्षेत्र की बागडोर संभालना उनकी प्रशासनिक दक्षता और राजनीतिक अनुभव का एक बड़ा परीक्षण होगा।

विरोध प्रदर्शन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने सौंपा इस्तीफा

धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार दोपहर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका त्यागपत्र ऐसे समय में आया, जब राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) द्वारा एक विरोध प्रदर्शन चल रहा था। इस विरोध प्रदर्शन के बीच ही उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री मोदी को सौंपा था, जिसके बाद संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति द्वारा उसे स्वीकार कर लिया गया। अपने इस्तीफे के संबंध में प्रधान ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है और वह इसी भावना के साथ भविष्य में भी कार्य करते रहेंगे। उनका यह बयान सार्वजनिक जीवन के प्रति उनके समर्पण और देशहित को सर्वोपरि रखने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रह्लाद जोशी को मिली नई जिम्मेदारी

मंत्रिपरिषद में यह बदलाव तात्कालिक प्रभाव से लागू हो गया है, जिससे शिक्षा क्षेत्र में नई दिशा और नेतृत्व की अपेक्षा की जा रही है। प्रह्लाद जोशी का लंबा राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव अब देश के शैक्षिक परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उनके नेतृत्व में शिक्षा के क्षेत्र में नए सुधारों और नवाचारों को गति मिलने की उम्मीद है। शिक्षा मंत्रालय, देश के भविष्य और मानव संसाधन विकास की आधारशिला होने के नाते, हमेशा ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक रहा है। इस मंत्रालय की बागडोर अब एक अनुभवी कैबिनेट मंत्री के हाथों में है, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में नई नीतियों और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

भारत के राजनीतिक गलियारों में इस फेरबदल को एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। केंद्रीय मंत्रिपरिषद में किसी भी मंत्री के इस्तीफे और नए प्रभार के सौंपे जाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लिखित है। अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रियों को पद से हटा सकते हैं या उनके इस्तीफे को स्वीकार कर सकते हैं। यह संवैधानिक प्रावधान सरकार के सुचारु संचालन और मंत्रिस्तरीय जिम्मेदारियों के प्रभावी वितरण को सुनिश्चित करता है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रह्लाद जोशी को अतिरिक्त प्रभार मिलने से यह प्रक्रिया एक बार फिर रेखांकित हुई है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह परिवर्तन देश के भविष्य के लिए एक नई दिशा प्रदान करने की क्षमता रखता है।