दिल्ली सत्य निकेतन हादसा: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, 10 सितंबर को सुनवाई
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला पीजी इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मंगलवार को मामले का उल्लेख सुप्रीम कोर्ट में किया गया। अदालत ने हादसे को गंभीरता से लेते हुए 10 सितंबर को सुनवाई करने का फैसला किया। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस […]
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला पीजी इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मंगलवार को मामले का उल्लेख सुप्रीम कोर्ट में किया गया। अदालत ने हादसे को गंभीरता से लेते हुए 10 सितंबर को सुनवाई करने का फैसला किया।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 10 सितंबर को सुनवाई तय की। जस्टिस अमानुल्लाह ने साफ कहा “हमारे दिमाग में कुछ है। हम परसों सुनवाई करेंगे। इसे राष्ट्रीय स्तर पर देखने की जरूरत है।”
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
सुप्रीम कोर्ट में सत्य निकेतन मामले की जानकारी कोर्ट की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने दी। उन्होंने बताया कि दिल्ली में अवैध निर्माण और भवन सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर निरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है। इसी दौरान सत्य निकेतन में पीजी के रूप में इस्तेमाल की जा रही इमारत ढह गई और सात लोगों की जान चली गई।
अदालत ने क्या कहा
मामले का उल्लेख होने के बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली हाईकोर्ट में हुई सुनवाई और वहां पारित आदेश की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी। उन्होंने हादसे को बेहद दुखद बताते हुए पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की। इसके बाद जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष लंबित मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अवैध निर्माण से जुड़े मामले से कुछ हद तक जुड़ता है। कोर्ट ने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर हाई कोर्ट में लंबित कार्यवाही को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किया जा सकता है। पीठ ने यह भी कहा कि इस तरह की समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर देखने की आवश्यकता है।
सुप्रीम कोर्ट के सामने पहले से है ये मामला
सुप्रीम कोर्ट पहले से ही दिल्ली-एनसीआर में अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन से जुड़े मामले की निगरानी कर रहा है। 9 जुलाई के आदेश के तहत लाजपत नगर, साकेत और मालवीय नगर जैसे इलाकों में इमारतों का निरीक्षण कराया गया था। इस प्रक्रिया में आईआईटी दिल्ली के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसरों समेत विशेषज्ञों को शामिल किया गया था।
अब सत्य निकेतन की घटना के बाद एमिकस क्यूरी ने इस निरीक्षण का दायरा बढ़ाकर पीजी, निजी हॉस्टल और छात्रों के लिए इस्तेमाल होने वाले अन्य आवासों तक करने की मांग की है। रिपोर्ट में इन भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा, स्वीकृत नक्शे, भूमि उपयोग, बिल्डिंग बायलॉज और फायर सेफ्टी मानकों की समयबद्ध जांच की जरूरत बताई गई है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने भी दिए अहम निर्देश
सत्य निकेतन हादसे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को सुनवाई करते हुए एमसीडी को दिल्ली में उसके अधिकार क्षेत्र के सभी पीजी और हॉस्टल का निरीक्षण करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह पता लगाने को कहा है कि इन इमारतों का निर्माण जरूरी मंजूरियों के साथ हुआ है या नहीं और कहीं भवन नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
हाईकोर्ट ने यह भी पूछा कि पीजी हॉस्टल को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली में कौन-कौन से वैधानिक या प्रशासनिक नियम लागू हैं। हादसे वाली इमारत के निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराने और यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश भी दिए गए हैं।