भोपाल में जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में आए कमलनाथ, कहा “‘सरकार राजहठ छोड़कर मांगें मानें”

भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न और जूनियर डॉक्टरों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर मध्यप्रदेश की सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने डॉक्टरों के प्रदर्शन पर लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार संवाद के बजाय […]

Sep 8, 2026 - 15:30
भोपाल में जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में आए कमलनाथ, कहा “‘सरकार राजहठ छोड़कर मांगें मानें”

भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न और जूनियर डॉक्टरों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर मध्यप्रदेश की सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने डॉक्टरों के प्रदर्शन पर लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार संवाद के बजाय “लाठी-डंडे की भाषा” बोल रही है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टरों पर जिस तरह कार्रवाई की गई वह शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि सरकार को राजहठ छोड़कर डॉक्टरों की मांगों पर ध्यान देना चाहिए।

‘हर वर्ग आंदोलन के लिए मजबूर’

कमलनाथ ने सरकार पर प्रदेश में ऐसा माहौल बनाने का आरोप लगाया है जिसमें अलग-अलग वर्गों को अपनी मांगों के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में स्कूल के बच्चों, शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों, किसानों, व्यापारियों और अब डॉक्टरों के आंदोलनों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।

उन्होंने सरकार पर समस्याओं के समाधान में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को “राजहठ” छोड़कर डॉक्टरों की मांगों पर बातचीत करनी चाहिए। उनका कहना है कि विवाद का जल्द समाधान जरूरी है, ताकि डॉक्टरों के आंदोलन का असर मरीजों के इलाज पर न पड़े।

क्या है डॉक्टरों की मांग

भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज से जुड़े एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर राजधानी में आंदोलन कर रहे हैं। इनका मौजूदा स्टाइपेंड 14,337 है और उनकी मांग है कि इसे बढ़ाकर 30,000 प्रतिमाह किया जाए। इससे पहले भी प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों ने इस मांग को लेकर आंदोलन किया था।

7 सितंबर को भोपाल में डॉक्टर मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च कर रहे थे, जिन्हें पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोका। इस दौरान वाटर कैनन का इस्तेमाल हुआ और पुलिस द्वारा लाठीचार्ज भी किया गया। डॉक्टरों का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारी घायल हुए। इसके बाद 8 सितंबर को ये आंदोलन और तेज हो गया है। आंदोलनरत डॉक्टर्स ने हमीदिया अस्पताल में नियमित ओपीडी और निर्धारित ओटी सेवाओं के बहिष्कार का ऐलान किया। हालांकि आपातकालीन सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है।

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