इंदौर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, म्यूल अकाउंट गिरोह का पर्दाफाश, 6 आरोपी गिरफ्तार, एक फरार
इंदौर में साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे “ऑपरेशन मैट्रिक्स” के तहत मंगलवार को एरोड्रम थाना पुलिस ने म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जबकि एक आरोपी फरार है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के बैंक खातों में करोड़ों रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ […]
इंदौर में साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे “ऑपरेशन मैट्रिक्स” के तहत मंगलवार को एरोड्रम थाना पुलिस ने म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जबकि एक आरोपी फरार है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के बैंक खातों में करोड़ों रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ है और इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेनदेन में किया जा रहा था।
पुलिस के मुताबिक जांच में इन खातों से जुड़े करीब 200 मामले अलग अलग राज्यों में दर्ज की गई है। एरोड्रम थाने में एक लाख 44 हजार रुपए की साइबर ठगी की FIR दर्ज हुई थी। जांच में ठगी की रकम जिन बैंक खातों में पहुंची, उनमें सूरज जेसवाल और अमन चौहान के खाते सामने आए। बैंक डिटेल और KYC की जांच की गई तो सूरज जेसवाल के खाते में करीब 3 करोड़ 42 लाख रुपये, जबकि अमन चौहान के खाते में करीब साढ़े 17 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन मिला।
खाते को किराए पर लेकर ठगी को अंजाम देते थे स्कैमर्स
कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सूरज जेसवाल को गिरफ्तार कर पूछताछ की। पूछताछ में संगठित गिरोह का खुलासा हुआ और MIG क्षेत्र में दबिश देकर अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। नरेंद्र रावत डीसीपी इंदौर ने बताया कि इस गिरोह का मास्टरमाइंड हर्ष है, जो अलग-अलग लोगों से चार से 5 हजार रुपये में बैंक खाते किराए पर लेता था और फिर उनकी चेकबुक, ATM कार्ड और सिम का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों में सूरज जेसवाल, हर्ष, संदीप उर्फ सौरभ, उमन उर्फ पवन, हरिओम और आयुष शामिल हैं। जबकि अमन चौहान फरार बताया जा रहा है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग बैंकों के 34 ATM/डेबिट कार्ड, 12 पासबुक, 24 चेकबुक, एक वाई-फाई राउटर, 8 मोबाइल फोन, 1 लाख 8 हजार रुपये नकद और एक डायरी जब्त की है।
खातों पर 200 मामले दर्ज, जांच शुरू
पुलिस के मुताबिक इन खातों के खिलाफ देशभर में करीब 200 FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि करोड़ों रुपये की रकम किन राज्यों और किन लोगों से आई और आगे कहां ट्रांसफर हुई। साथ ही इस पूरे नेटवर्क जुड़े लोगों की भी जांच की जा रही है। मामले में संगठित अपराध की धारा 112 BNS भी बढ़ाई गई है। पुलिस अब बैंक कर्मचारियों की भूमिका और बैंकिंग सिस्टम में हुए करोड़ों के ट्रांजेक्शन की भी जांच करेगी। पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ बैंक खाते उपलब्ध कराने वाला नेटवर्क नहीं, बल्कि साइबर ठगी के लिए म्यूल अकाउंट तैयार करने वाला संगठित गिरोह है। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है। आगे अन्य कई खुलासे होने की उम्मीद है।
शकील अंसारी की रिपोर्ट