दोस्ती गहरी, फिर भी दूरी! भारत-इजरायल युद्ध के मैदान में एक साथ क्यों नहीं आजमाते अपनी ताकत?
भारत और इजरायल के बीच रक्षा संबंध बेहद मजबूत हैं और इजरायल भारत का तीसरा बड़ा हथियार सप्लायर है। इसके बावजूद दोनों देश नियमित संयुक्त सैन्य अभ्यास नहीं करते। जानिए इसके पीछे की असली भू-राजनीतिक वजहें और रणनीतिक सोच।
New Delhi: भारत और दुनिया के प्रमुख देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास होना बेहद आम बात है। राजस्थान के जोधपुर में चल रहे बहुराष्ट्रीय अभ्यासों में अमेरिका के F-35 और जापान के F-2 लड़ाकू विमान अपनी ताकत दिखा रहे हैं।
भारत नियमित रूप से अमेरिका, फ्रांस, रूस और जापान जैसे देशों के साथ थल, जल और नभ में अभ्यास करता है। लेकिन सवाल यह उठता है कि भारत का सबसे भरोसेमंद और तीसरा सबसे बड़ा हथियार सप्लायर ‘इजरायल’ इस सूची से गायब क्यों है?
हथियारों का बड़ा बाजार, फिर भी मैदान खाली
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत अपने सैन्य हथियारों का लगभग 15% हिस्सा इजरायल से खरीदता है। बराक मिसाइल से लेकर हेरॉन ड्रोन तक, भारतीय सेना इजरायली तकनीक पर काफी हद तक निर्भर है।
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इसके बावजूद, दोनों देशों के बीच स्थायी द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास का कोई व्यवस्थित ढांचा नहीं बन पाया है। इतिहास में 2017 और 2021 के ‘ब्लू फ्लैग’ अभ्यास जैसे कुछ गिने-चुने मौके ही रहे हैं जब दोनों देशों के सैनिक एक साथ दिखे।
गाजा संघर्ष और इजरायल की मजबूरियां
सैन्य अभ्यासों के न होने की सबसे बड़ी और ताजा वजह है इजरायल का लगातार युद्ध में उलझे रहना। अक्टूबर 2023 में हुए आतंकी हमलों के बाद से इजरायली रक्षा बल (IDF) गाजा, लेबनान, सीरिया और यमन जैसे कई मोर्चों पर एक साथ लड़ रहा है।
ऐसे में इजरायल के पास शांतिपूर्ण सैन्य अभ्यासों के लिए न तो संसाधन उपलब्ध हैं और न ही समय। हाल ही में भारत में आयोजित सबसे बड़े हवाई अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ में भी इजरायल इसी वजह से शामिल नहीं हो सका।
मध्य पूर्व का पेच और भारत का संतुलन
इस दूरी के पीछे केवल युद्ध ही नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक कूटनीति भी एक बड़ा कारण है। भारत के अरब देशों और खाड़ी देशों के साथ भी बेहद मजबूत आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं। यदि भारत इजरायल के साथ सीधे तौर पर बड़ा द्विपक्षीय युद्ध अभ्यास करता है, तो इससे मध्य पूर्व में भारत के संतुलन को धक्का लग सकता है।
भारत अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखने के लिए इजरायल के साथ रक्षा तकनीक और खुफिया जानकारी तो साझा करता है, लेकिन खुले तौर पर सैन्य अभ्यास करने से बचता है।