नेपाल में तबाही के बाद नई शुरुआत, कल से खुलेंगे 65 स्कूल; बाढ़ का डर झेल रहे बच्चों की होगी काउंसलिंग

कई बच्चे रात में अचानक डरकर उठ जाते हैं, कुछ पूरी तरह खामोश हो गए हैं, जबकि कई आपदा से जुड़ी किसी भी आवाज को सुनकर सहम जाते हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में पुनर्वास के साथ-साथ बच्चों को मानसिक आघात से बाहर निकालने की कोशिशें भी तेज कर दी गई हैं।

Sep 8, 2026 - 10:30
नेपाल में तबाही के बाद नई शुरुआत, कल से खुलेंगे 65 स्कूल; बाढ़ का डर झेल रहे बच्चों की होगी काउंसलिंग

काठमांडू: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ को करीब दो हफ्ते पूरे होने वाले हैं, लेकिन नुवाकोट, रसुवा और आसपास के जिलों में तबाही का मंजर देखने वाले बच्चे अब भी गहरे सदमे में हैं। किसी ने बाढ़ में अपने परिवार के सदस्य खोए हैं तो किसी की आंखों के सामने घर और जिंदगी उजड़ गई। अब ये बच्चे एक अदृश्य डर के साथ जी रहे हैं।

कई बच्चे रात में अचानक डरकर उठ जाते हैं, कुछ पूरी तरह खामोश हो गए हैं, जबकि कई आपदा से जुड़ी किसी भी आवाज को सुनकर सहम जाते हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में पुनर्वास के साथ-साथ बच्चों को मानसिक आघात से बाहर निकालने की कोशिशें भी तेज कर दी गई हैं।

मेडिकल टीमें कर रहीं काउंसलिंग

प्रभावित क्षेत्रों में पहुंची मेडिकल टीमें बच्चों की मानसिक सेहत सुधारने के लिए काउंसलिंग कर रही हैं। नुवाकोट के बिदुर में प्रशासन बुधवार से 65 स्कूल दोबारा खोलने की तैयारी कर रहा है। बाढ़ से पहले यहां 79 स्कूल संचालित हो रहे थे।

बिदुर की डिप्टी मेयर प्रभा बोगटी ने कहा कि स्कूलों में ऐसी व्यवस्था की जाएगी जिससे बच्चे धीरे-धीरे सामान्य माहौल में लौट सकें और आसानी से पढ़ाई शुरू कर सकें।

आपदा के 13वें दिन देश ने दी श्रद्धांजलि

नेपाल में आपदा के 13वें दिन राष्ट्रीय शोक मनाया गया। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहा और लोगों ने दीये व मोमबत्तियां जलाकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी।

अब तक इस आपदा में 1,380 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5,500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। वहीं, करीब 121 लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका जताई गई है।

नेपाल का बचाव अभियान ज्यादा चुनौतीपूर्ण

भारत में 2023 के सिलक्यारा सुरंग हादसे में 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाने वाले ऑस्ट्रेलियाई सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स अब नेपाल के चिलिमे जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं।

उन्होंने कहा कि नेपाल का बचाव अभियान सिलक्यारा से ज्यादा चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि यहां एक साथ कई जगहों पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ रहा है।

भारत के सीमावर्ती इलाकों में बढ़ा खतरा

नेपाल की बाढ़ का असर भारत के पूर्वी सीमांत क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। महराजगंज, कुशीनगर और आसपास के इलाकों में जलभराव और नमी के कारण मादा क्यूलेक्स मच्छरों के पनपने की संभावना बढ़ गई है, जो जापानी इंसेफेलाइटिस बीमारी का प्रमुख वाहक माना जाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, बाढ़ का पानी लंबे समय तक जमा रहने से दलदली परिस्थितियां बन सकती हैं, जिससे बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है। प्रभावित इलाकों में तेज बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने से ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है।

तराई क्षेत्रों में विशेष निगरानी की जरूरत

जंतु विशेषज्ञ सुनील कुमार के अनुसार, क्यूलेक्स मच्छर जापानी इंसेफेलाइटिस का मुख्य वाहक है और यह तराई क्षेत्रों में अधिक पाया जाता है।

गोरखपुर मंडल के महराजगंज, कुशीनगर और देवरिया जिले गंडक नदी के आसपास बसे हैं, जहां नमी वाला वातावरण मच्छरों के लिए अनुकूल माना जाता है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016 से 2019 के बीच गोरखपुर मंडल में जापानी इंसेफेलाइटिस से करीब 1,125 लोगों की मौत दर्ज की गई थी।

MpToday Editor MP Today के पास 27 years का journalism experience है। इस दौरान MP Today ने Madhya Pradesh की कई बड़ी media agencies और news organizations के साथ काम किया है और ground reporting से लेकर editorial analysis तक मजबूत पहचान बनाई है। MP Today की टीम ने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, विकास, crime और public interest news पर लगातार काम किया है। लंबे अनुभव और reliable sources की वजह से MP Today हमेशा accurate, fast और trustworthy news देने के लिए जाना जाता है।