ट्विशा शर्मा केस में बड़ा अपडेट, पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत खारिज, अदालत ने आरोपों की गंभीरता को माना अहम

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामले में पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को फिलहाल राहत नहीं मिली है। दरअसल विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। गिरिबाला सिंह पर अपनी बहू और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा को कथित रूप से दहेज के लिए प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप

Jul 25, 2026 - 21:30
ट्विशा शर्मा केस में बड़ा अपडेट, पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत खारिज, अदालत ने आरोपों की गंभीरता को माना अहम

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामले में पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को फिलहाल राहत नहीं मिली है। दरअसल विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। गिरिबाला सिंह पर अपनी बहू और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा को कथित रूप से दहेज के लिए प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप हैं। मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है।

दरअसल अदालत का यह फैसला दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद आया। पहले इस मामले की सुनवाई एक अन्य विशेष अदालत में होनी थी, लेकिन न्यायाधीश ने स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया। इसके बाद मामला विशेष न्यायाधीश राम प्रताप मिश्र की अदालत में पहुंचा, जहां बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था। शनिवार शाम अदालत ने जमानत याचिका खारिज करने का आदेश सुनाया।

CBI ने क्या दलीलें दीं?

वहीं सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत से मानवीय आधार पर जमानत देने की मांग की। अधिवक्ता ने कहा कि गिरिबाला सिंह महिला हैं, उम्रदराज हैं और कई स्वास्थ्य समस्याओं से गुजर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी करीब 100 वर्ष की माता उनकी देखभाल पर निर्भर हैं। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी ने जांच में सहयोग किया है और जेल में रहने के दौरान उनके घर में चोरी की घटना भी हुई थी।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि गिरिबाला सिंह आर्थिक रूप से सक्षम हैं। उन्हें नियमित वेतन और युद्ध वीरांगना पेंशन मिलती है, इसलिए दहेज मांगने का आरोप उचित नहीं माना जाना चाहिए। दूसरी ओर, CBI ने इन सभी तर्कों का विरोध किया। एजेंसी ने अदालत को बताया कि केवल महिला होने या उम्र अधिक होने के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि जेल प्रशासन की मेडिकल रिपोर्ट में आरोपी की स्वास्थ्य स्थिति सामान्य बताई गई है। CBI ने अदालत को यह भी बताया कि इससे पहले उच्च न्यायालय उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुका है और जांच के दौरान उन्होंने वॉयस सैंपल देने से भी इनकार किया था।

अदालत ने जमानत क्यों नहीं दी?

दरअसल CBI ने अदालत के सामने यह आशंका भी जताई कि यदि गिरिबाला सिंह को जमानत मिलती है तो जांच प्रभावित हो सकती है। एजेंसी के अनुसार, जांच के दौरान आरोपी पर मामले से जुड़े कुछ लोगों से संपर्क करने और सीसीटीवी फुटेज से संबंधित जानकारी जुटाने के प्रयास के आरोप भी सामने आए हैं। अभियोजन पक्ष का कहना था कि जमानत मिलने की स्थिति में गवाहों को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

इन दलीलों पर विचार करने के बाद विशेष अदालत ने माना कि मामले की जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है और आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। इसी आधार पर अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी। फिलहाल गिरिबाला सिंह न्यायिक हिरासत में रहेंगी और CBI अपनी जांच आगे बढ़ाएगी।

Anand Sahay पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और ब्रेकिंग न्यूज़ तथा राष्ट्रीय खबरों को कवर करने में विशेष रुचि रखते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण कर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।