BRICS समिट के लिए भारत पहुंचे व्लादिमीर पुतिन, आज PM मोदी के साथ होगी अहम बैठक
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार देर रात BRICS समिट में शामिल होने के लिए भारत पहुंचे। दरअसल रात करीब 3 बजे उनका विमान नई दिल्ली पहुंचा जहां विदेश राज्य मंत्री केवी सिंह ने उनका स्वागत किया। रेड कार्पेट और गार्ड ऑफ ऑनर के बाद उनका काफिला मौर्या शेरटन होटल के लिए रवाना हुआ। यूक्रेन युद्ध […]
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार देर रात BRICS समिट में शामिल होने के लिए भारत पहुंचे। दरअसल रात करीब 3 बजे उनका विमान नई दिल्ली पहुंचा जहां विदेश राज्य मंत्री केवी सिंह ने उनका स्वागत किया। रेड कार्पेट और गार्ड ऑफ ऑनर के बाद उनका काफिला मौर्या शेरटन होटल के लिए रवाना हुआ। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस के बाहर आयोजित किसी BRICS समिट में पुतिन की यह पहली व्यक्तिगत भागीदारी है।
दरअसल उनकी यात्रा को भारत-रूस संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है क्योंकि BRICS कार्यक्रम से पहले उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अलग से द्विपक्षीय बैठक तय है।
मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा सौदों पर रहेगी नजर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की बैठक में कई रक्षा परियोजनाओं पर बातचीत हो सकती है। इनमें Su-57 फाइटर जेट, S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की बाकी खेप और SU-30MKI लड़ाकू विमानों के अपग्रेड जैसे मुद्दे शामिल हैं। रूस पहले ही भारत को Su-57 फाइटर जेट की बिक्री के साथ भारत में उत्पादन और तकनीक साझा करने की पेशकश कर चुका है। भारत चाहता है कि इस सहयोग से भविष्य में स्वदेशी लड़ाकू विमान बनाने में भी तकनीकी मदद मिल सके। इसके अलावा ब्रह्मोस मिसाइल के नए और हल्के संस्करण ब्रह्मोस-NG पर भी चर्चा हो सकती है। यह मिसाइल मौजूदा ब्रह्मोस से हल्की होगी और इसे तेजस जैसे लड़ाकू विमानों से भी दागा जा सकेगा।
BRICS समिट से पहले व्यापार पर भी फोकस
वहीं पुतिन के भारत पहुंचने से पहले उनके काफिले की बख्तरबंद Aurus Senat लिमोजिन और अन्य सुरक्षा वाहन तीन रूसी ट्रांसपोर्ट विमानों से भारत लाए गए। उनके साथ आया IL-96-300PU विमान रूस का विशेष राष्ट्रपति विमान है जिसे चलता-फिरता कमांड सेंटर माना जाता है। रूस की एफएसओ सुरक्षा एजेंसी पुतिन की अंदरूनी सुरक्षा संभाल रही है, जबकि बाहरी सुरक्षा भारतीय एजेंसियों के जिम्मे है। उनके भोजन की अलग सुरक्षा जांच की व्यवस्था भी की गई है और रूस अपने रसोइयों का इस्तेमाल करेगा।