जमीन कब्जाने से लेकर वसूली तक: जानिए इस्लामाबाद में ईशनिंदा कानून पर क्या कहती है यह रिपोर्ट
इस्लामाबाद में ईशनिंदा कानूनों के खुलेआम दुरुपयोग पर सरकारी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। संसदीय समिति को सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक, निजी दुश्मनी, संपत्ति हड़पने और आपसी विवादों के चलते दर्ज कराए गए ज्यादातर मामले झूठे और बिना सबूत के पाए गए। इससे अल्पसंख्यक समुदाय सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
Islamabad: ईशनिंदा कानूनों (Blasphemy Laws) के गलत इस्तेमाल को लेकर एक सरकारी रिपोर्ट में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। संसदीय समिति को सौंपी गई इस रिपोर्ट से पता चलता है कि हाल के वर्षों में दर्ज किए गए ईशनिंदा के कई मामले जांच के दौरान झूठे या सबूतों के अभाव वाले पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, इस कानून का इस्तेमाल अक्सर निजी दुश्मनी निकालने, पारिवारिक विवाद सुलझाने और संपत्ति हड़पने के लिए किया गया है।
चारों प्रांतों से इकट्ठा किया गया डेटा
सिंध, पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा (KPK) और बलूचिस्तान की पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों ने सीनेट की मानवाधिकार समिति को यह रिपोर्ट सौंपी। अधिकारियों ने बताया कि कई मामलों में जांच के दौरान आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं मिला। हालांकि, आरोपों के बाद आरोपी और उनके परिवारों को सामाजिक बदनामी, कानूनी अड़चनों और कभी-कभी हिंसा का सामना करना पड़ा।
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पांच वर्षों में मामलों में भारी वृद्धि
रिपोर्ट के अनुसार, धारा 295-C के तहत सबसे ज्यादा मामले कुल 116 पंजाब में दर्ज किए गए। सिंध में धारा 295-B के तहत 96 और धारा 295-C के तहत 29 मामले सामने आए। पांच साल की अवधि में, खैबर पख्तूनख्वा में 90 से ज्यादा और बलूचिस्तान में 28 मामले दर्ज किए गए। कुल 333 मामलों की जांच से पता चला कि उनमें से ज्यादातर में ठोस सबूतों की कमी थी।
अल्पसंख्यकों पर बहुत ज्यादा असर
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईसाई और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय ऐसे मामलों से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। अक्सर, अदालत का फैसला आने से पहले ही भीड़ आरोपी को निशाना बनाती है, जिससे आरोपी और उनके परिवारों की जिंदगी पर बुरा असर पड़ता है।
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मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता
मानवाधिकार संगठन वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटीज (VOPM) ने कहा है कि झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न होने से ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। संगठन निर्दोष लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानून के सही इस्तेमाल की जरूरत पर जोर देता है। साथ ही, यह भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बेबुनियाद शिकायतें करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करता है।