‘हम जुल्म के आगे सिर नहीं झुकाएंगे’: ईरानी राष्ट्रपति का अमेरिका-इस्राइल पर बड़ा प्रहार, भारत को बताया सच्चा मददगार
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका और इस्राइल को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ईरान किसी के आगे घुटने नहीं टेकेगा। उन्होंने भारत की मेजबानी की तारीफ की और दोनों देशों के बीच तकनीक व व्यापार में मिलकर आगे बढ़ने की उम्मीद जताई।
Tehran: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भारत दौरे के दौरान एक ऐतिहासिक संबोधन में स्पष्ट कर दिया कि उनका देश किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव या अत्याचार के आगे घुटने टेकने वाला नहीं है। भारतीय धार्मिक नेताओं, विद्वानों और उद्योग जगत की हस्तियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान का मुख्य उद्देश्य एक ऐसे न्यायपूर्ण समाज की स्थापना करना है, जहां किसी का शोषण न हो और सभी नागरिक स्वतंत्रता के साथ जी सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान की संप्रभुता और सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
अमेरिका-इस्राइल की नीतियों पर तीखा प्रहार
पेजेशकियन ने बिना किसी झिझक के अमेरिका और इस्राइल की साम्राज्यवादी नीतियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि क्रांति के बाद से ही ईरान को कमजोर करने, प्रतिबंध लगाने और आंतरिक मतभेद पैदा करने की तमाम कोशिशें की गईं, लेकिन ईरान अडिग रहा। पश्चिमी देशों द्वारा मानवाधिकारों की दुहाई दिए जाने को उन्होंने दोहरा रवैया बताया।
उन्होंने सवाल उठाया कि बेगुनाह बच्चों, वैज्ञानिकों, स्कूलों और अस्पतालों को निशाना बनाने वाले आखिर खुद को शांति का मसीहा कैसे कह सकते हैं? उन्होंने चेताया कि यदि ईरान को उकसाया गया तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
भारत की मेजबानी और दोस्ती की मिसाल
अपने संबोधन के दौरान ईरानी राष्ट्रपति का रुख भारत के प्रति बेहद आत्मीय और सम्मानजनक रहा। उन्होंने भारत सरकार और प्रधानमंत्री का दिल से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत की मेहमाननवाज़ी अद्भुत रही है।
दोनों देशों के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठकों को उन्होंने अत्यंत फलदायी बताया। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान का रिश्ता सदियों पुराना और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है, जिसे आज के दौर में और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने की सख्त जरूरत है।
तकनीक से व्यापार तक: साझा भविष्य का रोडमैप
पेजेशकियन ने भारत और ईरान के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों को रेखांकित किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देश मिलकर तकनीक, व्यापार, विज्ञान, संस्कृति और अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में एक नई शुरुआत कर सकते हैं।
ईरान अपने अनुभवों को भारत के साथ साझा करने और वैश्विक मंचों पर बराबरी के अधिकार की आवाज बुलंद करने का पक्षधर है। यह साझेदारी न केवल दोनों देशों के आर्थिक हितों को साधेगी, बल्कि क्षेत्र में शांति और संतुलन स्थापित करने में भी मददगार साबित होगी।