Nepal Flood: नेपाल में त्रिशूली बनी तबाही की नदी! एक के बाद एक पुल सैलाब में समाए
नेपाल में बाढ़ का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। त्रिशूली नदी का जलस्तर बढ़ने से 130 मीटर लंबा घ्यालचोक-चरौंदी झूला पुल बह गया। पुल टूटने से करीब 400 परिवारों का मुख्य संपर्क मार्ग बंद हो गया है। इस बीच भारत की फॉरेंसिक टीम मृतकों की पहचान में नेपाल की मदद कर रही है।
New Delhi: नेपाल के मध्य हिस्से में रविवार सुबह त्रिशूली नदी एक बार फिर उफान पर आ गई। तेज बहाव के कारण गंडकी प्रांत के गोरखा जिले में बना एक महत्वपूर्ण झूला पुल नदी की धारा में बह गया। अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ करीब तीन घंटे तक बनी रही। बताया गया कि सुबह करीब साढ़े 11 बजे पानी के तेज बहाव ने पुल को अपनी चपेट में ले लिया। पुल बहने के बाद आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
400 परिवारों का मुख्य रास्ता बंद
यह करीब 130 मीटर लंबा घ्यालचोक-चरौंदी पुल गंडकी ग्रामीण नगरपालिका 7 और 8 के लोगों के लिए आने-जाने का प्रमुख साधन था। पुल के जरिए घ्यालचोक के लोग पृथ्वी राजमार्ग के पास स्थित चरौंदी तक पहुंचते थे। पुल टूटने के बाद दोनों क्षेत्रों का पृथ्वी राजमार्ग से सीधा संपर्क प्रभावित हो गया है। अब ग्रामीणों को आने-जाने के लिए दूसरे रास्तों का सहारा लेना पड़ेगा।
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किसानों की बढ़ी मुश्किलें
पुल केवल लोगों के आवागमन के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं था, बल्कि स्थानीय किसानों के लिए भी यह जरूरी रास्ता था। घ्यालचोक के ग्रामीण दूध से बने उत्पाद और सब्जियां इसी पुल के रास्ते चरौंदी स्थित कृषि सहकारी संस्था तक पहुंचाते थे।
पुल के बह जाने से किसानों के सामने अपनी सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद बाजार तक पहुंचाने की समस्या खड़ी हो गई है। यदि जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हुई तो किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
पहले भी बह चुका है पुल
त्रिशूली नदी में बाढ़ के कारण इस क्षेत्र में पुल टूटने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ में धवाडीघाट का पुल भी बह गया था। यह पुल घ्यालचोक-चरौंदी पुल से नदी की धारा की दिशा में कुछ दूरी पर स्थित था।
धवाडीघाट पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद स्थानीय लोग घ्यालचोक-चरौंदी पुल को वैकल्पिक रास्ते के तौर पर इस्तेमाल कर रहे थे। अब दूसरा पुल भी बह जाने से लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही
नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जनजीवन प्रभावित किया है। अधिकारियों के अनुसार, शनिवार तक बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में 788 लोगों की मौत हो चुकी थी। कई इलाकों में अब भी शव मिलने का सिलसिला जारी है। प्रशासन ने भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने की चेतावनी भी जारी की है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और राहत-बचाव दलों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है।
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मृतकों की पहचान में भारत करेगा मदद
नेपाल में बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण उनकी पहचान भी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में भारत की 19 सदस्यीय फॉरेंसिक टीम नेपाल की मदद कर रही है। टीम डीएनए सैंपल की जांच के जरिए मृतकों की पहचान में नेपाल पुलिस और स्थानीय प्रशासन का सहयोग करेगी। इससे अज्ञात शवों की पहचान करने और उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।