मिडिल ईस्ट में किस बड़े तूफान की आहट? रातों-रात बदला खेल, अमेरिका के वार के बाद ईरान का खतरनाक पलटवार
अमेरिका के लारक द्वीप पर हमले के कुछ घंटों बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले की बात कही है। वहीं जॉर्डन ने आठ मिसाइलों को रोकने का दावा किया है।
New Delhi: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव सोमवार को एक बार फिर बढ़ गया। अमेरिकी सेना ने ईरान के लारक द्वीप के पास मौजूद दो मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाया। इसके कुछ समय बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने जवाबी कार्रवाई की घोषणा की। ईरानी मीडिया के मुताबिक, IRGC ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। ईरान ने इसे अमेरिका की कार्रवाई का जवाब बताया है।
किंग हुसैन और अल-अजराक एयरबेस पर हमले का दावा
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड के अनुसार, उसके हमले का निशाना जॉर्डन स्थित किंग हुसैन एयरबेस और अल-अजराक एयरबेस थे। ईरानी पक्ष का दावा है कि इन ठिकानों पर मौजूद अमेरिकी सैन्य ढांचे और लड़ाकू विमानों की तैनाती वाले क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। ईरानी सरकारी मीडिया ने हमले में सैन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने का दावा किया है। हालांकि, नुकसान की इस जानकारी की स्वतंत्र रूप से पूरी पुष्टि नहीं हुई है।
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जॉर्डन ने 8 मिसाइलों को रोकने की बात कही
ईरानी हमले के दावे के बाद जॉर्डन की सेना ने बताया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई आठ बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया। जॉर्डन के मुताबिक, इन मिसाइलों को जमीन पर गिरने से पहले ही नष्ट कर दिया गया। सेना ने कहा कि मिसाइलों से नागरिकों या संपत्ति को खतरा पैदा नहीं होने दिया गया। शुरुआती जानकारी में किसी के घायल होने की पुष्टि भी नहीं हुई है।
अमेरिका ने लारक द्वीप पर क्यों किया हमला?
अमेरिका ने लारक द्वीप पर अपनी सैन्य कार्रवाई को जरूरी और सीमित अभियान बताया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के अनुसार, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े लोग होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहे थे।
अमेरिकी सेना के मुताबिक, इस गतिविधि से अंतरराष्ट्रीय जहाजों और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खतरा हो सकता था। इसी वजह से लारक द्वीप के पास मौजूद दो ईरानी लॉन्चरों को निशाना बनाया गया।
ईरान ने नुकसान और जवाबी कार्रवाई की बात कही
लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ईरानी पक्ष ने अपने सैनिकों और नागरिकों के मारे जाने या घायल होने की बात कही। हालांकि, मृतकों और घायलों की स्पष्ट संख्या सामने नहीं आई है। इसके बाद IRGC ने अमेरिका को जवाब देने की चेतावनी दी थी। सोमवार को ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की घोषणा कर दी। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने इस अभियान को हमलावर को जवाब देने वाली कार्रवाई बताया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी दुनिया की नजर
इस पूरे घटनाक्रम में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे अहम है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या जहाजों की आवाजाही में रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है। अमेरिका का कहना है कि वह इस समुद्री मार्ग में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना चाहता है। दूसरी ओर ईरान अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का लगातार विरोध कर रहा है।
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पश्चिम एशिया में बढ़ा टकराव का खतरा
लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले और उसके बाद जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी जवाबी कार्रवाई से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य हमलों का यह नया दौर आगे और बढ़ सकता है। फिलहाल जॉर्डन, अमेरिका और ईरान की सेनाएं घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस टकराव को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित रहने के बजाय वैश्विक ऊर्जा और व्यापार पर भी पड़ सकता है।