Nepal Flood: मलबे के पहाड़, बंद सुरंगें और अंदर फंसी जिंदगियां; नेपाल में भारतीय वायुसेना का सबसे बड़ा रेस्क्यू मिशन
नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की कई सुरंगों में लोगों के फंसे होने की आशंका है। राहत अभियान में भारत भी मदद के लिए आगे आया है। भारतीय सेना की विशेष टनल रेस्क्यू टीम नेपाली सेना के साथ मिलकर सुरंगों में तलाशी और बचाव अभियान चला रही है।
New Delhi: नेपाल में भारी बारिश और बाढ़ ने कई इलाकों में तबाही मचा दी है। त्रिशूली नदी घाटी और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में बाढ़ और मलबे के कारण स्थिति मुश्किल बनी हुई है। कई जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में कर्मचारी और मजदूर फंस गए हैं।
इन लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए नेपाल के राहत दल लगातार अभियान चला रहे हैं। अब भारत की विशेष टनल सर्च एंड रेस्क्यू टीम भी इस अभियान में शामिल हो गई है। भारतीय विशेषज्ञ नेपाली सेना और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर प्रभावित इलाकों में काम कर रहे हैं।
चिलिमे और लांगटांग में चलाया गया तलाशी अभियान
भारतीय टीम ने नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग क्षेत्र में मौजूद हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में तलाशी शुरू की। यहां खराब मौसम, पानी, कीचड़ और भारी मलबा रेस्क्यू टीम के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है।
लांगटांग क्षेत्र में भारतीय और नेपाली जवान एक सुरंग के अंदर तक पहुंचने में सफल रहे। तलाशी के दौरान टीम को एक शव मिला, जिसे सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद सुरंग में फंसे अन्य लोगों की तलाश और तेज कर दी गई है।
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मलबे से बंद है सुरंग का रास्ता
रसुवा जिले के पास स्थित एक टनल साइट पर भारी मात्रा में मिट्टी और मलबा जमा हो गया है। इसके कारण सुरंग का प्रवेश मार्ग बंद हो गया है। भारतीय टीम नेपाली सुरक्षा बलों की 82 सदस्यीय संयुक्त टीम के साथ मिलकर रास्ता साफ करने में जुटी है। रेस्क्यू टीम का मुख्य लक्ष्य सुरंग के अंदर फंसे लोगों तक पहुंचना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है। लगातार खराब मौसम के कारण बचाव कार्य में सावधानी बरती जा रही है।
350 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
नेपाली सेना अब तक अपर त्रिशूली हाइड्रोपावर परियोजना की सुरंग से करीब 350 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल चुकी है। इनमें कई भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं।हालांकि, अभी भी अलग-अलग सुरंगों में 100 से ज्यादा लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में भारतीय और नेपाली टीमें संयुक्त रूप से लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं।
सिल्क्यारा टनल हादसे के विशेषज्ञ भी टीम में
नेपाल भेजी गई भारतीय विशेष टीम में 11 तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। इनमें इंजीनियर और सुरंग बचाव अभियान का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ भी हैं। टीम के कुछ सदस्य उत्तराखंड के सिल्क्यारा सुरंग हादसे के दौरान बचाव अभियान में शामिल रह चुके हैं। सिल्क्यारा में कठिन परिस्थितियों में सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों को बाहर निकालने का अनुभव अब नेपाल के रेस्क्यू अभियान में काफी उपयोगी साबित हो रहा है।
डीएनए जांच में भी नेपाल की मदद कर रहा भारत
सुरंग बचाव अभियान के अलावा भारत ने मृतकों की पहचान में मदद के लिए भी विशेषज्ञों की टीम नेपाल भेजी है। 19 सदस्यीय फॉरेंसिक टीम काठमांडू पहुंची है। यह टीम डीएनए सैंपल की जांच के जरिए मृतकों की पहचान करने में नेपाल पुलिस और स्थानीय प्रशासन की सहायता कर रही है। इससे हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाने में मदद मिलेगी।
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भारतीय वायुसेना ने पहुंचाई राहत सामग्री
भारत ने राहत अभियान के लिए जरूरी सामान भी नेपाल भेजा है। भारतीय वायुसेना के विमानों, जिसमें सी-130जे हरक्यूलिस जैसे विमान शामिल हैं, के जरिए राहत सामग्री पहुंचाई गई है। इसमें पोर्टेबल जनरेटर, दवाइयां, पानी साफ करने वाली टैबलेट, टेंट और कंबल समेत जरूरी सामान शामिल हैं। भारत और नेपाल की टीमें मिलकर दुर्गम पहाड़ी इलाकों में फंसे लोगों तक मदद पहुंचाने में जुटी हैं। नेपाल सरकार और भारतीय दूतावास पूरे अभियान पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल प्राथमिकता सुरंगों में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालने की है।