होर्मुज में महासंग्राम: अमेरिकी सेना के विनाशकारी हमले से ईरान में हाहाकार, 80 सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ बमबारी से बढ़ा तनाव
क्या मिडिल ईस्ट में शुरू हो चुका है महायुद्ध? होर्मुज स्ट्रेट में तीन तेल टैंकरों पर हमले के बाद अमेरिका ने लिया भयानक बदला। ईरान के 80 ठिकानों पर अमेरिकी सेना की भीषण बमबारी से दहल उठे कई शहर। आखिर इस तबाही के बाद अब क्या करेगा ईरान?
New Delhi: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बहुत बड़ा झटका लगा है। लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक संघर्ष के बीच एक बार फिर युद्ध की विनाशकारी चिंगारी भड़क उठी है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास अचानक बढ़े तनाव ने पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अमेरिकी सैन्य बल, यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस बात की पुष्टि कर दी है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ एक बड़ा और विनाशकारी सैन्य अभियान शुरू कर दिया है। इस बड़ी सैन्य कार्रवाई के तहत अमेरिकी बलों ने ईरान के 80 अलग-अलग सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ और बेहद सटीक हमले किए हैं। इस अचानक हुए बड़े हमले से न केवल ईरान बल्कि पूरे वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारी हड़कंप मच गया है।
कमर्शियल जहाजों पर हमले के बाद अमेरिका का पलटवार
अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि उसकी यह भारी बमबारी कोई एकतरफा आक्रामकता नहीं है, बल्कि ईरान की उकसावे वाली कार्रवाई का सीधा और कड़ा जवाब है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में निर्दोष नागरिकों वाले कमर्शियल (व्यावसायिक) जहाजों और तेल टैंकरों को जानबूझकर अपना निशाना बनाया था। अमेरिका का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है और ईरान की यह आक्रामकता पूरी तरह से गैर-जरूरी और बेहद खतरनाक है। अमेरिका ने कड़े शब्दों में कहा है कि ईरान ने इन हमलों के जरिए पिछले महीने ही हुए द्विपक्षीय सीजफायर (युद्धविराम) समझौते का साफ तौर पर उल्लंघन किया है, जिसके बाद अमेरिका को मजबूरन यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।
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होर्मुज में भड़की चिंगारी: तीन तेल टैंकरों पर हुआ था हमला
इस पूरे ताजा विवाद की जड़ होर्मुज स्ट्रेट में हुई वह घटना है, जिसने शांत हो रहे माहौल में दोबारा आग लगा दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईरान ने इस प्रमुख समुद्री मार्ग से गुजरने वाले तीन बड़े तेल टैंकरों को निशाना बनाकर उन पर हमला किया था। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। यही वजह है कि इन तीन तेल टैंकरों पर हुए हमले की खबर फैलते ही वैश्विक तेल बाजार में जबरदस्त दहशत पैदा हो गई और सप्लाई बाधित होने के डर से बाजार में खलबली मच गई।
इन प्रमुख ईरानी सैन्य ठिकानों पर बरपा अमेरिकी कहर
यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने एक बड़ी रणनीतिक योजना के तहत ईरान के 80 ठिकानों को एक साथ निशाना बनाया। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने जानकारी दी है कि इन विनाशकारी हमलों में मुख्य रूप से ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम (वायु रक्षा प्रणाली), तटीय निगरानी प्रणाली (कोस्टल सर्विलांस सिस्टम), सतह से हवा में मार करने वाली घातक मिसाइलों, एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों और ड्रोन लॉन्च पैड्स को तबाह करने का प्रयास किया गया है। इन हमलों की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दक्षिणी ईरान के सिरीक और बंदर अब्बास जैसे प्रमुख और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह शहरों में तेज धमाकों की खौफनाक आवाजें सुनी गई हैं।
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ईरान की सख्त चेतावनी: “राष्ट्रीय हितों की करेंगे रक्षा”
अमेरिका के इस भीषण हमले के बाद ईरान भी चुप नहीं बैठा है और उसने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक आधिकारिक पोस्ट जारी कर अमेरिका को सीधी और खुली चेतावनी दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका ने समझौते का गंभीर उल्लंघन किया है और उसे इसके नतीजों के बारे में सचेत रहना चाहिए। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों, संप्रभुता और देश की सुरक्षा की रक्षा के लिए जरूरी कोई भी सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। इस जवाबी बयान के बाद मिडिल ईस्ट में एक बार फिर पूर्ण युद्ध का खतरा मंडराने लगा है।
U.S. Central Command forces have begun launching a series of powerful strikes against Iran to impose heavy costs for targeting and attacking commercial shipping crewed by innocent civilians in an international waterway. The U.S. strikes are in response to Iranian attacks on three…
— U.S. Central Command (@CENTCOM) July 7, 2026