इंदौर के खजराना सिविल अस्पताल को लेकर फैली भ्रांतियों का प्रशासन ने किया खंडन, कहा “जमीन का कब्जा नहीं मिलने से अटका निर्माण”

इंदौर के खजराना क्षेत्र में प्रस्तावित 100 बिस्तर वाले सिविल अस्पताल को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स के बाद जिला प्रशासन ने स्पष्टीकरण जारी किया है अस्पताल निर्माण अभी शुरू ही नहीं हुआ है। न दवाइयों की खरीद हुई, न चिकित्सा उपकरण खरीदे गए और न ही इसके लिए कोई धनराशि जारी हुई। इसका मुख्य

Jul 7, 2026 - 10:30
इंदौर के खजराना सिविल अस्पताल को लेकर फैली भ्रांतियों का प्रशासन ने किया खंडन, कहा “जमीन का कब्जा नहीं मिलने से अटका निर्माण”

इंदौर के खजराना क्षेत्र में प्रस्तावित 100 बिस्तर वाले सिविल अस्पताल को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स के बाद जिला प्रशासन ने स्पष्टीकरण जारी किया है अस्पताल निर्माण अभी शुरू ही नहीं हुआ है। न दवाइयों की खरीद हुई, न चिकित्सा उपकरण खरीदे गए और न ही इसके लिए कोई धनराशि जारी हुई। इसका मुख्य कारण है स्वास्थ्य विभाग को आवंटित भूमि का अभी तक वास्तविक कब्जा न मिलना।

कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने कहा कि अस्पताल निर्माण में देरी का मुख्य कारण स्वास्थ्य विभाग को आवंटित भूमि का वास्तविक कब्जा अब तक नहीं मिलना है। जानकारी में बताया गया कि खजराना की 0.700 हेक्टेयर भूमि अस्पताल के लिए आवंटित तो की गई थी, लेकिन वह अभी नगर निगम इंदौर के कब्जे में है। 6 जुलाई को हुई बैठक में कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग को आश्वासन दिया कि जल्द ही भूमि का कब्जा दिलाकर निर्माण कार्य शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

जिला प्रशासन ने जारी किया स्पष्टीकरण

इंदौर जिला प्रशासन ने खजराना में प्रस्तावित सिविल अस्पताल को लेकर फैली भ्रांतियों पर साफ किया है कि अस्पताल निर्माण अभी शुरू ही नहीं हुआ है। न दवाइयों की खरीद हुई, न चिकित्सा उपकरण खरीदे गए और न ही इसके लिए कोई धनराशि जारी हुई। प्रशासन के अनुसार अस्पताल के लिए स्वीकृत स्वास्थ्यकर्मी वर्तमान में शहर के विभिन्न शासकीय अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं। संबंधित कर्मचारियों को नियमानुसार वेतन दिया जा रहा है तथा उनके कार्य का प्रमाणीकरण भी संबंधित संस्थानों द्वारा किया जा रहा है। साथ ही प्रशासन ने स्पष्ट किया कि खजराना सिविल अस्पताल के लिए किसी चिकित्सक की पदस्थापना के आदेश अब तक जारी नहीं किए गए हैं।

जिला प्रशासन ने बताया कि अस्पताल निर्माण के लिए ग्राम खजराना की 0.700 हेक्टेयर भूमि स्वास्थ्य विभाग को आवंटित की गई थी, लेकिन उसका वास्तविक हस्तांतरण अभी तक नहीं हो पाया है। फिलहाल इस भूमि का उपयोग नगर निगम इंदौर द्वारा किया जा रहा है, जिसके कारण भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी।

कलेक्टर ने कहा जल्द कब्जा दिलाया जाएगा

प्रशासन के मुताबिक 6 जुलाई को आयोजित बैठक में कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्वास्थ्य विभाग को आश्वस्त किया कि आवंटित भूमि को खाली कराकर विभाग को सौंपने की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी कर भवन निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने वर्ष 2021 में अस्पताल के लिए कुल 87 पद स्वीकृत किए थे। इनमें अब तक 29 स्टाफ नर्स, 5 फार्मासिस्ट और 1 लैब टेक्नीशियन की पदस्थापना की जा चुकी है। अस्पताल भवन तैयार नहीं होने के कारण इन कर्मचारियों की सेवाएं फिलहाल शहर के अन्य सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में ली जा रही हैं।

खरीद और वित्तीय आवंटन के दावों का खंडन

जिला प्रशासन ने उन खबरों का भी खंडन किया है जिनमें अस्पताल के नाम पर बड़े पैमाने पर खर्च, दवा-उपकरणों की खरीदी और वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। प्रशासन का कहना है कि अस्पताल निर्माण शुरू नहीं होने के कारण अब तक किसी प्रकार की औषधि, चिकित्सा उपकरण या अन्य सामग्री की खरीद नहीं की गई है और न ही इसके लिए कोई बजट जारी किया गया है। प्रशासन ने कहा कि भूमि का विधिवत हस्तांतरण और भवन निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद ही परियोजना की आगामी प्रक्रिया शुरू होगी। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे अपुष्ट या भ्रामक खबरों के बजाय प्रशासन की आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।

क्या है मामला

खजराना क्षेत्र में सिविल अस्पताल की स्थापना की योजना वर्ष 2020 में घोषित की गई थी, ताकि खजराना और आसपास के इलाकों की बढ़ती आबादी को स्थानीय स्तर पर बेहतर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। परियोजना के लिए बाद में स्वास्थ्य विभाग ने आवश्यक मानव संसाधन भी स्वीकृत किए, लेकिन अस्पताल भवन का निर्माण शुरू नहीं हो सका। हाल के दिनों में इस परियोजना को लेकर सवाल उठे कि अस्पताल अस्तित्व में आए बिना उसके नाम पर कर्मचारियों की पदस्थापना की जा रही है। इस मुद्दे पर विपक्ष ने अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी।