इंदौर ISKCON मंदिर में भगवान जगन्नाथ हुए अस्वस्थ, काढ़ा और दवा से हो रही सेवा, 15 दिन बाद होंगे दर्शन
इंदौर के ISKCON मंदिर में इन दिनों एक अनोखी धार्मिक परंपरा निभाई जा रही है। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को स्नान पूर्णिमा के बाद ज्वर आने की मान्यता के चलते उनके दर्शन अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। मंदिर के पुजारी भगवान की सेवा में जुटे हैं और परंपरा के अनुसार आयुर्वेदिक
इंदौर के ISKCON मंदिर में इन दिनों एक अनोखी धार्मिक परंपरा निभाई जा रही है। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को स्नान पूर्णिमा के बाद ज्वर आने की मान्यता के चलते उनके दर्शन अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। मंदिर के पुजारी भगवान की सेवा में जुटे हैं और परंपरा के अनुसार आयुर्वेदिक काढ़ा, हल्का भोजन और विश्राम कराया जा रहा है।
भगवान की सेवा में जुटे पुजारी
मंदिर प्रबंधन के अनुसार स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का विभिन्न पवित्र नदियों और तीर्थों के जल से विशेष अभिषेक किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस महा स्नान के बाद भगवान को ज्वर हो जाता है। इसी वजह से उन्हें 15 दिनों तक विश्राम कराया जाता है और इस दौरान श्रद्धालुओं के दर्शन बंद रहते हैं।
इंदौर ISKCON मंदिर में पुजारी भगवान की सेवा उसी तरह कर रहे हैं, जैसे किसी बीमार व्यक्ति की देखभाल की जाती है। भगवान को कंबल ओढ़ाया गया है और समय-समय पर थर्मामीटर से उनका तापमान प्रतीकात्मक रूप से मापा जा रहा है। भोग के समय उन्हें अदरक, शहद, लौंग, काली मिर्च, दालचीनी, सोंठ और अन्य आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से तैयार विशेष काढ़ा अर्पित किया जा रहा है। साथ ही हल्के भोजन के रूप में खिचड़ी और सुपाच्य प्रसाद चढ़ाया जा रहा है।
जगन्नाथ मंदिर की ‘अनासर’ परंपरा क्या है?
भगवान जगन्नाथ के मंदिरों में स्नान पूर्णिमा के बाद मनाई जाने वाली इस परंपरा को ‘अनासर’ कहा जाता है। मान्यता है कि 108 कलशों के पवित्र जल से स्नान कराने के बाद भगवान को ज्वर आ जाता है। इसलिए वे 15 दिनों तक सार्वजनिक दर्शन नहीं देते और विश्राम करते हैं।
इस दौरान मंदिर के गर्भगृह में केवल पुजारियों को सेवा करने की अनुमति होती है। श्रद्धालु भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं कर पाते, लेकिन मंदिर में पूजा और अन्य धार्मिक गतिविधियां जारी रहती हैं। यह परंपरा सिर्फ इंदौर ही नहीं, बल्कि पुरी सहित देश के कई जगन्नाथ मंदिरों में वर्षों से निभाई जा रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान भी अपने भक्तों की तरह मानवीय भावों का अनुभव करते हैं, इसलिए उनके बीमार होने और स्वस्थ होने की यह परंपरा आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
रथयात्रा से पहले क्यों बंद रहते हैं दर्शन?
भगवान जगन्नाथ के बीमार होने की यह अवधि रथयात्रा से पहले की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में गिनी जाती है। मान्यता है कि विश्राम और उपचार के बाद भगवान पूरी तरह स्वस्थ होकर नए स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसके बाद भव्य रथयात्रा निकाली जाती है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करते हैं और लाखों श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं।
इंदौर ISKCON मंदिर में भी इसी परंपरा का पालन किया जा रहा है। मंदिर प्रशासन के अनुसार भगवान अब 19 जुलाई को रथयात्रा के अवसर पर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की संभावना है। मंदिर में रथयात्रा की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे निर्धारित तिथि पर पहुंचकर भगवान के दर्शन करें और धार्मिक आयोजन में शामिल होकर इस विशेष पर्व का हिस्सा बनें।