MY हॉस्पिटल में स्ट्रेचर पर बच्चे को घसीटने का मामला, 2 कर्मचारियों पर गिरी गाज, BVG कंपनी पर 1 लाख का जुर्माना

इंदौर के MY हॉस्पिटल में सामने आए एक संवेदनशील मामले ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक गंभीर रूप से बीमार बच्चे को उसके माता-पिता द्वारा स्ट्रेचर पर अस्पताल परिसर से सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल तक ले जाने का वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। मामले की जांच

Jun 9, 2026 - 11:30
MY हॉस्पिटल में स्ट्रेचर पर बच्चे को घसीटने का मामला, 2 कर्मचारियों पर गिरी गाज, BVG कंपनी पर 1 लाख का जुर्माना

इंदौर के MY हॉस्पिटल में सामने आए एक संवेदनशील मामले ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक गंभीर रूप से बीमार बच्चे को उसके माता-पिता द्वारा स्ट्रेचर पर अस्पताल परिसर से सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल तक ले जाने का वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। मामले की जांच कराई गई, जिसमें कई स्तरों पर लापरवाही सामने आई।

जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए हेल्प डेस्क इंचार्ज और सिक्योरिटी ऑफिसर की सेवाएं समाप्त कर दीं। इसके अलावा अस्पताल की व्यवस्थाएं संभालने वाली BVG कंपनी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं तीन नर्सों, एक डॉक्टर और एक वार्ड बॉय की एक दिन की सैलरी काटने का फैसला लिया गया है। अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों से भी जवाब मांगा गया है।

कैसे सामने आई बड़ी चूक?

मामला उस समय चर्चा में आया जब न्यूरोलॉजिकल समस्या से जूझ रहे एक बच्चे को MY हॉस्पिटल से सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल भेजा गया। आरोप है कि मरीज की स्थिति को देखते हुए संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टर को खुद उसकी जांच करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बजाय बच्चे को दूसरे अस्पताल रेफर करने का निर्देश दे दिया गया।

भीषण गर्मी में बच्चे के माता-पिता को उसे स्ट्रेचर पर लेकर अस्पताल परिसर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक जाना पड़ा। इस दौरान किसी समुचित परिवहन व्यवस्था या अस्पताल सहायता की व्यवस्था नहीं की गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए। कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने इसे मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा गंभीर मामला बताया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कराई।

सरकारी अस्पतालों में मरीज सुविधा और जवाबदेही पर फिर उठे सवाल

यह घटना केवल एक अस्पताल की लापरवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी बहस छेड़ती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल परिसर के भीतर सुरक्षित और त्वरित ट्रांसफर सिस्टम होना बेहद जरूरी है। विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर रोगियों के मामले में ऐसी व्यवस्थाएं और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

जांच के बाद MY हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट अशोक यादव और विभागाध्यक्ष (HOD) परेश सिसोदिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनसे पूछा गया है कि ऐसी स्थिति क्यों बनी और भविष्य में इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग ने भी सभी सरकारी अस्पतालों को मरीजों की आवाजाही, रेफरल प्रक्रिया और आपातकालीन सहायता सेवाओं को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

फिलहाल प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यवस्था में सुधार किए जाएंगे। हालांकि यह मामला एक बार फिर यह याद दिलाता है कि अस्पतालों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ संवेदनशील और जवाबदेह कार्यप्रणाली भी उतनी ही जरूरी है।