अमेरिका जैसी राह पर चला चीन, भारतीय स्टार्टअप्स के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है ड्रैगन का ये ‘सीक्रेट प्लान’

चीन अपने एडवांस AI मॉडल्स जैसे DeepSeek, Qwen, Doubao और GLM-5.2 को भारत और अमेरिका समेत अन्य देशों में सीमित करने की तैयारी में है। जानिए इसका भारत के स्टार्टअप्स और AI इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा।

Jul 8, 2026 - 12:30
अमेरिका जैसी राह पर चला चीन, भारतीय स्टार्टअप्स के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है ड्रैगन का ये ‘सीक्रेट प्लान’

New Delhi: चीन अपने एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल्स को लेकर बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन भविष्य में अपने सबसे ताकतवर AI मॉडल्स का इस्तेमाल भारत, अमेरिका और अन्य देशों में सीमित कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो इसका सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों और स्टार्टअप्स पर पड़ेगा, जो कम लागत में चीनी AI तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।

क्यों AI पर रोक लगाने की तैयारी में है चीन?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन सरकार AI को एक रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी तकनीक मान रही है। इसी वजह से वह अपने नए और एडवांस AI मॉडल्स को देश के बाहर आसानी से उपलब्ध नहीं कराना चाहती।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के अधिकारियों ने Alibaba, ByteDance और Z.ai जैसी बड़ी AI कंपनियों के साथ बैठक भी की है। इस बैठक में विदेशी डेवलपर्स के लिए क्लोज्ड-सोर्स AI मॉडल्स की पहुंच सीमित करने पर चर्चा हुई। इसके अलावा AI तकनीक की चोरी या लीक रोकने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों को और सख्त बनाने की भी तैयारी है।

किन AI मॉडल्स पर लग सकती है रोक?

फिलहाल चीन ने किसी एक AI मॉडल का नाम नहीं लिया है, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक भविष्य में आने वाले एडवांस मॉडल्स पर यह रोक लागू हो सकती है।

इनमें प्रमुख रूप से DeepSeek, Qwen (Alibaba), Doubao (ByteDance) और GLM-5.2 (Z.ai) जैसे AI मॉडल्स शामिल हो सकते हैं। माना जा रहा है कि इन मॉडल्स की पहुंच चीन के बाहर सीमित की जा सकती है।

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भारत पर क्या होगा असर?

चीनी AI मॉडल्स को अमेरिकी AI प्लेटफॉर्म की तुलना में काफी सस्ता माना जाता है। यही वजह है कि भारत के कई स्टार्टअप्स, डेवलपर्स और टेक कंपनियां कम खर्च में AI सेवाओं के लिए इनका इस्तेमाल कर रही हैं।

अगर चीन इन मॉडल्स पर रोक लगाता है, तो भारतीय कंपनियों को महंगे AI प्लेटफॉर्म का सहारा लेना पड़ सकता है। इससे AI प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ेगी और छोटे स्टार्टअप्स के लिए नई तकनीक अपनाना मुश्किल हो सकता है।

तकनीक के साथ बढ़ रही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा

ऐसा माना जा रहा है कि, यह मामला सिर्फ तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक राजनीति भी है। इससे पहले अमेरिका भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर कुछ एडवांस AI चिप्स और तकनीकों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा चुका है। अब चीन भी अपनी अत्याधुनिक AI तकनीक को देश के भीतर सुरक्षित रखने की रणनीति अपना रहा है।

इससे साफ है कि आने वाले समय में AI तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ तकनीकी क्षमता पर नहीं, बल्कि देशों के आपसी संबंधों और नीतियों पर भी निर्भर करेगा।

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