केन-बेतवा परियोजना पर सियासत तेज, विस्थापितों के समर्थन में उतरे राहुल गांधी, बोले- सत्य और सत्याग्रह से डरती है सरकार
देशभर में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से प्रभावित हजारों किसानों और आदिवासियों का मुद्दा अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। वर्षों से अपनी जमीन और आजीविका बचाने के लिए संघर्ष कर रहे इन विस्थापितों की आवाज को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपना समर्थन दिया है। उन्होंने केंद्र और मध्य प्रदेश की
देशभर में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से प्रभावित हजारों किसानों और आदिवासियों का मुद्दा अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। वर्षों से अपनी जमीन और आजीविका बचाने के लिए संघर्ष कर रहे इन विस्थापितों की आवाज को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपना समर्थन दिया है। उन्होंने केंद्र और मध्य प्रदेश की भाजपा सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि आदिवासियों के शांतिपूर्ण सत्याग्रह को भी कुचला जा रहा है।
सोमवार को राहुल गांधी ने इस आंदोलन से जुड़ा एक मार्मिक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें प्रभावितों का दर्द साफ झलक रहा है। इस वीडियो के साथ उन्होंने अपनी पोस्ट में स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के कारण आदिवासियों की पुश्तैनी जमीनें तो उनसे छीन ली गई हैं, लेकिन बदले में उन्हें न तो न्यायपूर्ण मुआवजा दिया गया है और न ही सम्मानजनक पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था की गई है। यह उनके संवैधानिक और मानवीय अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने अपनी पोस्ट में केंद्र सरकार की नीतियों पर सीधा सवाल उठाते हुए लिखा कि “सत्य और सत्याग्रह, दोनों से मोदी सरकार डरती है।” उन्होंने मध्य प्रदेश के उन आदिवासी भाई-बहनों के संघर्ष का जिक्र किया, जो अपनी जायज मांगों को लेकर जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल पर बैठे थे। राहुल गांधी ने कहा कि केन-बेतवा परियोजना के नाम पर इन आदिवासियों की जमीनें अधिग्रहित कर ली गईं, लेकिन उनके मूलभूत अधिकारों को पूरी तरह से अनदेखा किया गया है, जिससे उनका जीवन संकट में पड़ गया है।
राहुल गांधी ने आदिवासियों के पुश्तैनी अधिकारों पर विशेष जोर देते हुए कहा कि “सत्य यह है कि आदिवासी देश के पहले मालिक हैं।” उन्होंने दृढ़ता से यह बात रखी कि जल, जंगल और जमीन पर सबसे पहला अधिकार उन्हीं का है और उनका वर्तमान सत्याग्रह इसी पुश्तैनी अधिकार की रक्षा के लिए है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज यही अधिकार उनसे बलपूर्वक छीना जा रहा है, जिससे उनकी पहचान और अस्तित्व दोनों खतरे में हैं। यह सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता का परिचायक है।
राहुल गांधी का आरोप, विस्थापितों की मांगें नहीं सुन रही सरकार
इन विस्थापितों की मांगें बेहद सीधी और न्यायसंगत हैं। राहुल गांधी के अनुसार, वे केवल इतनी अपेक्षा कर रहे हैं कि उन्हें अपनी आजीविका चलाने के लिए उचित सहारा दिया जाए और सम्मानजनक तरीके से पुनर्वास की व्यवस्था की जाए, ताकि वे फिर से अपना जीवन पटरी पर ला सकें। हालांकि, उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार उनकी जायज मांगों को सुनने के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल कर उनके शांतिपूर्ण विरोध को दबाने का प्रयास कर रही है। यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का हनन है।
कांग्रेस सांसद ने प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी पार्टी की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इन प्रभावित आदिवासी भाई-बहनों और किसानों के साथ पूरी तरह खड़ी है और उन्हें न्याय दिलाने के लिए यह संघर्ष लगातार जारी रहेगा। राहुल गांधी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे अंततः इन प्रभावित परिवारों को न्यायपूर्ण मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास देना ही पड़ेगा, क्योंकि यह उनका अधिकार है और इसे छीना नहीं जा सकता।
राहुल गांधी द्वारा साझा किए गए वीडियो में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से प्रभावित लोग अपनी व्यथा सुनाते हुए और न्याय की मांग करते हुए आंदोलन करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो के बैकग्राउंड में शिक्षा पारीक की एक मार्मिक कविता के स्वर गूंज रहे हैं, जो इस पूरे आंदोलन के दर्द, संघर्ष और आदिवासियों के अटूट संकल्प को और भी गहराई से अभिव्यक्त करते हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने इस गंभीर राष्ट्रीय मुद्दे की ओर देशव्यापी ध्यान आकर्षित किया है और सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है।
सत्य और सत्याग्रह – दोनों से डरती है मोदी सरकार।
मध्य प्रदेश के आदिवासी भाई-बहन जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल पर इसलिए बैठे थे क्योंकि केन-बेतवा परियोजना में उनकी ज़मीन छीन ली गई, लेकिन उन्हें न न्यायपूर्ण मुआवज़ा मिला और न सम्मानजनक पुनर्वास।
“सत्य” यह है कि आदिवासी देश के पहले… pic.twitter.com/NaWDN1bVR0
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) July 27, 2026