नेपाल में कुदरत का महाविनाश: अचानक आई बाढ़ ने ऐसी मचाई तबाही कि गांव श्मशान में बदल गए
नेपाल में भोटेकोशी नदी और ग्लेशियर फटने से आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। मरने वालों की संख्या 1,344 हो गई है, जबकि 4,900 लोग अब भी लापता हैं। सेना और पुलिस की टीमें बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं।
Kathmandu: नेपाल में प्रकृति का एक ऐसा रौद्र रूप देखने को मिला है जिसने पूरे इलाके में चीख-पुकार मचा दी है। भोटेकोशी नदी का उफान और अचानक ग्लेशियर टूटने के कारण आई अचानक बाढ़ ने हंसते-खेलते गांवों को श्मशान में बदल दिया है।
नेपाल पुलिस की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस भीषण त्रासदी में अब तक 1,344 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। हर तरफ बिखरा मलबा और बहते पानी का शोर तबाही की खौफनाक दास्तान बयां कर रहा है।
हजारों जिंदगियों की तलाश: 4,900 लोग अभी भी लापता
तबाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शनिवार सुबह तक करीब 4,898 लोग लापता दर्ज किए गए हैं। लापता लोगों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रभावित इलाकों में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं।
मलबे के नीचे से जिंदगियों को तलाशने के लिए नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के हजारों जवान दिन-रात एक किए हुए हैं। भारी मलबे और टूटे रास्तों के बावजूद रेस्क्यू टीमें दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
मकान और पुल बहे: 32 हजार से ज्यादा लोग बेघर
बाढ़ और भूस्खलन की इस दोहरी मार से सबसे ज्यादा नुकसान चितवन, नवलपरासी, नुवाकोट, रसुवा और धाडिंग जिलों में हुआ है, जहां से लगातार शव बरामद हो रहे हैं। आपदा की वजह से 7,570 से अधिक घर ताश के पत्तों की तरह ढह गए और करीब 32,000 लोग बेघर होकर सड़कों पर आ चुके हैं। कई महत्वपूर्ण हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स, मुख्य सड़कें और संपर्क पुल पानी के तेज बहाव में बह गए हैं, जिससे बिजली और यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है।
राहत-बचाव कार्य में जुटीं सेना की टुकड़ियां
तबाही के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती मलबे को हटाने और प्रभावित लोगों तक खाने-पीने का सामान पहुंचाने की है। सेना के जवान अपनी जान जोखिम में डालकर बहते पानी के बीच फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल रहे हैं।
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अस्थायी शिविर बनाकर पीड़ितों को शरण दी जा रही है। लेकिन लगातार हो रही तबाही और टूटे संपर्क मार्गों के कारण राहत कार्य में काफी बाधाएं आ रही हैं। पूरी दुनिया की नजरें अब नेपाल की इस भयानक त्रासदी पर टिकी हैं।