भारत के पास पर्याप्त कच्चा तेल भंडार, LPG उत्पादन में 40% का इजाफा, पश्चिम एशिया तनाव के बीच केंद्र सरकार ने दी जानकारी
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने भारत की ईंधन आपूर्ति को प्रभावित किया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने अंतर मंत्रालयी प्रेसवार्ता में बताया कि देश ‘युद्ध जैसे हालात’ का सामना कर रहा है, क्योंकि कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की वैश्विक आपूर्ति पर असर पड़ा है और
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने भारत की ईंधन आपूर्ति को प्रभावित किया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने अंतर मंत्रालयी प्रेसवार्ता में बताया कि देश ‘युद्ध जैसे हालात’ का सामना कर रहा है, क्योंकि कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की वैश्विक आपूर्ति पर असर पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय कीमतें भी काफी बढ़ गई हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि भारत सरकार ने इस स्थिति को संभालने के लिए कई स्तरों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं ताकि देश में किसी भी ईंधन की कमी न हो।
शर्मा ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने सीधे तौर पर भारत की कच्चे तेल, एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के साथ-साथ अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिला है। यह भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए एक बड़ी चुनौती है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से पूरा करता है।
सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए तुरंत कदम उठाए हैं। संयुक्त सचिव ने बताया कि भारत के पास पर्याप्त कच्चा तेल भंडार मौजूद है। इसके अलावा, अगले दो महीनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति की व्यवस्था पहले से ही सुनिश्चित कर ली गई है। एलपीजी और पीएनजी (पाइप्ड प्राकृतिक गैस) के मामले में भी स्थिति अनुकूल बनी हुई है, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं को घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
भारत में LPG उत्पादन में 40% का इजाफा
सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, देश की रिफाइनरियां इस समय अपनी पूरी क्षमता से या उससे भी अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं। इस सक्रिय दृष्टिकोण का नतीजा यह हुआ है कि घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 40% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि ऐसे समय में एक बड़ी राहत है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं तनाव में हैं।
LPG के लिए घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता
भारत अपनी एलपीजी जरूरतों के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है, जिसका लगभग 90% हिस्सा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। पश्चिम एशिया के हालात को देखते हुए, सरकार ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है: वाणिज्यिक आपूर्ति के बजाय घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। यह सुनिश्चित करेगा कि आम जनता को ईंधन की कमी का सामना न करना पड़े।
घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के क्रम में, शुरुआत में वाणिज्यिक एलपीजी आपूर्ति को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। बाद में, बाजार की स्थिति और घरेलू मांग को ध्यान में रखते हुए इसे धीरे-धीरे बहाल किया गया। पहले यह 20% पर बहाल हुई, फिर पीएनजी विस्तार के लिए व्यापार में सुगमता के आधार पर इसमें अतिरिक्त 10% की वृद्धि की गई। इसके बाद इसे बढ़ाकर 50% और अब 70% कर दिया गया है। इन उपायों के परिणामस्वरूप, लगभग 14 मार्च से अब तक 30,000 टन व्यावसायिक एलपीजी की आपूर्ति की जा चुकी है, जो बाजार को स्थिर रखने में मदद कर रहा है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह भी सुनिश्चित किया है कि सबसे अधिक प्रभावित और महत्वपूर्ण क्षेत्रों को आपूर्ति में प्राथमिकता मिले। सुजाता शर्मा ने बताया कि सरकार ने रेस्तरां, सड़क किनारे के ढाबों, होटलों और औद्योगिक कैंटीनों को विशेष प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही, बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों की ईंधन जरूरतों को भी प्राथमिकता सूची में रखा गया है।
5 किलो के सिलेंडर सीधे लाभार्थियों को वितरित
प्रवासी श्रमिकों को सीधे लाभ पहुंचाने के लिए लगभग 30,000 छोटे पांच किलो के सिलेंडर वितरित किए गए हैं। यह पहल उन लोगों के लिए एक बड़ी मदद है जिनके पास बड़े सिलेंडर खरीदने या रखने की सुविधा नहीं होती। औद्योगिक क्षेत्र में, इस्पात, ऑटोमोबाइल, वस्त्र, रंग, रसायन और प्लास्टिक जैसे महत्वपूर्ण उद्योगों को भी एलपीजी आपूर्ति में प्राथमिकता देने के आदेश जारी किए गए हैं, ताकि उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
भारत में पास पर्याप्त तेल और गैस मौजूद
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत में पर्याप्त कच्चा तेल, पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है। एलपीजी, एलएनजी और पीएनजी की आपूर्ति भी पूरी तरह से सुरक्षित है और इसमें कोई कमी नहीं है। कुछ स्थानों पर फैली अफवाहों के कारण पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी गई थीं, जिससे अनावश्यक घबराहट पैदा हुई। सरकार ने इन अफवाहों को खारिज करते हुए जनता से संयम बरतने की अपील की है।
संयुक्त सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि भले ही भारतीय कच्चे तेल की टोकरी की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई है, भारत सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कमी न हो। कई पड़ोसी देशों के विपरीत, जहां ईंधन की कीमतें आसमान छू गई हैं, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं की गई है। सरकार लगातार वैश्विक और घरेलू स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है ताकि ऊर्जा सुरक्षा बनी रहे।
India has ensured adequate availability of crude, petrol, diesel, LPG and PNG despite global disruptions, with domestic LPG production up nearly 40%. Domestic supply has been prioritised, while commercial LPG has been gradually restored to 70% with focus on key sectors. Despite… pic.twitter.com/Lco1tWjcqL
— PIB India (@PIB_India) March 27, 2026