सेज यूनिवर्सिटी गर्ल्स हॉस्टल में छात्राओं का हंगामा, खाने में कीड़े मिलने का आरोप, 4 घंटे चला प्रदर्शन
इंदौर की सेज यूनिवर्सिटी के गर्ल्स हॉस्टल में मंगलवार को छात्राओं ने अव्यवस्थाओं को लेकर जमकर प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के साथ छात्राओं ने मैस के भोजन और स्वास्थ्य सुविधा से जुड़े मुद्दे उठाए। छात्राओं का आरोप है कि मैस के खाने में कई बार कीड़े निकल चुके हैं। शिकायत के […]
इंदौर की सेज यूनिवर्सिटी के गर्ल्स हॉस्टल में मंगलवार को छात्राओं ने अव्यवस्थाओं को लेकर जमकर प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के साथ छात्राओं ने मैस के भोजन और स्वास्थ्य सुविधा से जुड़े मुद्दे उठाए। छात्राओं का आरोप है कि मैस के खाने में कई बार कीड़े निकल चुके हैं। शिकायत के बाद भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई, जिससे छात्राओं को अपने स्वास्थ्य की चिंता सता रही है।
प्रदर्शन के दौरान बंद पड़े मेडिकल रूम का मुद्दा भी सामने आया। छात्राओं का कहना था कि हॉस्टल में मेडिकल रूम लंबे समय से बंद है और वहां ताला लगा हुआ है। ऐसे में किसी छात्रा की तबीयत अचानक खराब होने या आपात स्थिति आने पर तुरंत इलाज मिलना मुश्किल हो सकता है। करीब चार घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार मौके पर पहुंचे और छात्राओं से बातचीत की।
सेज यूनिवर्सिटी हॉस्टल में खाने को लेकर नाराजगी
सेज यूनिवर्सिटी के गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं ने मैस की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए। छात्राओं का कहना है कि भोजन में कीड़े मिलने की शिकायत पहले भी सामने आ चुकी है। बार-बार ऐसी स्थिति बनने से छात्राओं में नाराजगी बढ़ती गई।
छात्राओं के अनुसार, हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए मैस का खाना रोज की जरूरत है। अगर इसी भोजन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहें तो इसका सीधा असर छात्राओं के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। इसी वजह से प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने मैस व्यवस्था में तत्काल बदलाव की मांग रखी।
प्रदर्शन में शामिल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने भी छात्राओं की शिकायतों को गंभीर बताया। उनका कहना था कि हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को साफ और सुरक्षित भोजन मिलना जरूरी है। भोजन की गुणवत्ता को लेकर बार-बार शिकायत आने के बाद व्यवस्था में सुधार किया जाना चाहिए।
बंद मेडिकल रूम को लेकर भी उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने हॉस्टल के मेडिकल रूम का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। छात्राओं के मुताबिक मेडिकल रूम लंबे समय से बंद पड़ा है और वहां ताला लगा हुआ है। उनका कहना है कि हॉस्टल में बड़ी संख्या में छात्राएं रहती हैं, ऐसे में किसी भी समय स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है।
छात्राओं ने कहा कि रात या अचानक तबीयत खराब होने की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सुविधा मिलना जरूरी है। अगर हॉस्टल के अंदर ही मेडिकल रूम उपलब्ध हो तो छोटी बीमारी या अचानक हुई परेशानी में तुरंत मदद मिल सकती है। लेकिन कमरे के बंद होने से उन्हें दूसरी जगह जाना पड़ता है। छात्राओं की मांग थी कि मेडिकल रूम को तुरंत खोला जाए और वहां डॉक्टर या जरूरी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
चार घंटे तक चला प्रदर्शन, मौके पर पहुंचे रजिस्ट्रार
मामला बढ़ने के बाद करीब चार घंटे तक प्रदर्शन चलता रहा। छात्राएं अपनी मांगों को लेकर मौके पर डटी रहीं। इसके बाद सेज यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और छात्राओं से बातचीत की।
रजिस्ट्रार ने छात्राओं की शिकायतें सुनीं और समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने मैस के मौजूदा ठेकेदार को बदलने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही। इसके साथ ही बंद पड़े मेडिकल रूम को तत्काल खुलवाने और वहां डॉक्टर की व्यवस्था करने का आश्वासन भी दिया गया। रजिस्ट्रार के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। हालांकि, अब छात्राओं की नजर इस बात पर रहेगी कि दिए गए आश्वासन कितनी जल्दी जमीन पर लागू होते हैं।
छात्राओं ने कहा- स्वास्थ्य और सुरक्षा से समझौता नहीं
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के महानगर मंत्री देवेश गुर्जर ने कहा कि छात्राओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को बेहतर भोजन और जरूरत के समय चिकित्सा सुविधा मिलना उनका बुनियादी अधिकार है।
सेज यूनिवर्सिटी हॉस्टल में हुआ यह प्रदर्शन सिर्फ मैस के खाने तक सीमित नहीं रहा। इसमें स्वास्थ्य सुविधा, हॉस्टल की व्यवस्था और छात्राओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी सामने आए। ऐसे में अब यूनिवर्सिटी प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह छात्रों की शिकायतों को सिर्फ आश्वासन तक सीमित न रखे, बल्कि व्यवस्था में स्थायी सुधार करे।
मैस ठेकेदार बदलने और मेडिकल रूम शुरू करने का आश्वासन मिलने के बाद छात्राओं को उम्मीद है कि अब उन्हें रोजमर्रा की इन परेशानियों से राहत मिलेगी। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मैस की व्यवस्था में कितना सुधार होता है और मेडिकल रूम में डॉक्टर की सुविधा कब से शुरू की जाती है।