श्री राम मंदिर दान विवाद पर VHP सख्त, आलोक कुमार ने की एफआईआर और फास्ट ट्रैक सुनवाई की मांग

अयोध्या श्री राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े दान अनियमितता विवाद को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने सख्त रुख अपनाया है। वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने सार्वजनिक रूप से मांग की है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया को तत्काल आगे बढ़ाया जाए और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आलोक कुमार ने

Jun 25, 2026 - 12:30
श्री राम मंदिर दान विवाद पर VHP सख्त, आलोक कुमार ने की एफआईआर और फास्ट ट्रैक सुनवाई की मांग

अयोध्या श्री राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े दान अनियमितता विवाद को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने सख्त रुख अपनाया है। वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने सार्वजनिक रूप से मांग की है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया को तत्काल आगे बढ़ाया जाए और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

आलोक कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्टर साझा करते हुए कहा कि राम जन्मभूमि मंदिर की गरिमा, पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन और जांच एजेंसियों से चार प्रमुख कदम उठाने की अपील की।

वीएचपी नेता आलोक कुमार ने की कड़ी कार्रवाई की मांग 

विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने राम जन्मभूमि मंदिर के ट्रस्ट में वित्तीय गड़बड़ियों की जांच के लिए तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से ठोस कदम उठाने की अपील की। वीएचपी की ओर से रखी गई मांगों में मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज करना, जांच प्रक्रिया तेज गति से पूरा करना, सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था करना तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों को कठोर दंड दिलाना शामिल है।

ये चार मांगें रखी

पोस्टर में उगते सूरज की रोशनी में भव्य राम मंदिर की तस्वीर के साथ चार प्रमुख मांगें दर्ज की गई हैं:

  • मंदिर से जुड़े मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए और कानूनी कार्यवाही शुरू की जाए।
  • चल रही जांच को तेज किया जाए।
  • फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन या सक्रिय कर रोजाना सुनवाई सुनिश्चित की जाए।
  • दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।

आलोक कुमार ने पोस्टर का समापन “जय श्री राम” के साथ किया। वीएचपी का कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर को दिए गए दान से जुड़ा कोई भी विवाद पारदर्शी जांच और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से स्पष्ट होना चाहिए, ताकि समाज में किसी प्रकार का भ्रम न रहे और लोगों का विश्वास बना रहे। संगठन का कहना है कि मंदिर की पवित्रता और श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा के लिए मामले का जल्द और पारदर्शी निपटारा होना चाहिए।