तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर! फ्लोर टेस्ट से पहले दो गुटों में बंटी AIADMK, TVK को एक धड़े ने दिया समर्थन

तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज थी, लेकिन अब ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के भीतरखाने चल रही कलह खुलकर सामने आ गई है, जिसने राज्य की सियासत में एक बड़ा उलटफेर ला दिया है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी स्पष्ट रूप से दो गुटों

May 12, 2026 - 11:30
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर! फ्लोर टेस्ट से पहले दो गुटों में बंटी AIADMK, TVK को एक धड़े ने दिया समर्थन

तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज थी, लेकिन अब ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के भीतरखाने चल रही कलह खुलकर सामने आ गई है, जिसने राज्य की सियासत में एक बड़ा उलटफेर ला दिया है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी स्पष्ट रूप से दो गुटों में बंटती दिख रही है। वहीं इस सियासी उठापटक के बीच, AIADMK नेता सीवी शनमुगम ने आगामी 13 मई को होने वाले फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले मुख्यमंत्री विजय की तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) को अपना समर्थन देने की घोषणा कर दी है।

दरअसल पार्टी के भीतर इस फूट ने राज्य की राजनीतिक स्थिति को और भी दिलचस्प बना दिया है। AIADMK के विधायक वेलुमणि और सीवी शनमुगम के नेतृत्व वाले एक गुट ने मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK को समर्थन देने का ऐलान किया है। इस गुट के विधायक तमिलनाडु सरकार को अपना समर्थन देने के लिए मुख्यमंत्री विजय से जल्द ही मुलाकात करेंगे। शनमुगम ने इस निर्णय के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि पार्टी प्रमुख पलानीस्वामी सरकार बनाने के लिए द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के साथ गठबंधन करना चाहते थे, लेकिन उनके इस प्रस्ताव को पार्टी के अधिकांश सदस्यों ने अस्वीकार कर दिया और इसका पुरजोर विरोध किया। इसी बीच, अन्नाद्रमुक के विधायक वेलुमणि ने तत्काल प्रभाव से पार्टी की महापरिषद की बैठक बुलाने की मांग की है, जिससे पार्टी के भीतर के तनाव को और बल मिला है।

जनादेश को पूरी तरह स्वीकार करते हैं: सीवी शनमुगम

सीवी शनमुगम ने अपने इस फैसले को न्यायसंगत ठहराते हुए कहा, ‘हम जनता के जनादेश को पूरी तरह स्वीकार करते हैं। लोगों का जनादेश विशेष रूप से TVK के लिए नहीं, बल्कि विजय को मुख्यमंत्री के रूप में देखने के लिए है। हम मुख्यमंत्री विजय को बधाई देते हैं और उनके नेतृत्व वाली TVK सरकार को अपना पूर्ण समर्थन प्रदान करते हैं।’ उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि AIADMK की स्थापना DMK के विरोध में हुई थी और पिछले 53 वर्षों से उनकी राजनीति DMK के खिलाफ ही रही है। इस लंबे इतिहास को देखते हुए, DMK के समर्थन से AIADMK सरकार बनाने का पलानीस्वामी का प्रस्ताव पार्टी के मूल सिद्धांतों के खिलाफ था। शनमुगम ने चेतावनी दी कि यदि AIADMK DMK के साथ गठबंधन करती, तो पार्टी का अस्तित्व ही समाप्त हो जाता।

TVK को अपना समर्थन देने का फैसला किया

शनमुगम ने इस स्थिति को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा कि वर्तमान में AIADMK बिना किसी गठबंधन के है। उनका मानना है कि अब पार्टी का ध्यान अपनी आंतरिक शक्ति को पुनर्जीवित करने और मजबूत करने पर होना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने विजय की TVK को अपना समर्थन देने का फैसला किया है, जिसने विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की है।

वहीं विधानसभा चुनाव के परिणामों पर गौर करें तो, TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, हालांकि वह बहुमत के आंकड़े से 10 सीटें कम रह गई। मुख्यमंत्री विजय ने दो विधानसभा सीटों से जीत हासिल की है, जिसमें से उन्हें एक सीट खाली करनी होगी, जिससे TVK की सीटों की संख्या घटकर 107 रह जाएगी। TVK के सहयोगी दलों में कांग्रेस के 5 विधायक, सीपीआई, सीपीआई(एम), वीसीके और आईयूएमएल के 2-2 विधायक शामिल हैं। इन सभी को मिलाकर गठबंधन की कुल संख्या 120 तक पहुंच गई है, जो बहुमत के लिए आवश्यक आंकड़ा है। वहीं, विपक्ष की बात करें तो DMK ने 59, AIADMK ने 47 और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने केवल एक सीट पर जीत हासिल की है। ऐसे में AIADMK के एक धड़े का TVK को समर्थन देना मुख्यमंत्री विजय की सरकार के लिए बड़ी राहत साबित होगा और राज्य में राजनीतिक स्थिरता लाने में मदद करेगा।