मिडिल ईस्ट में सीजफायर तार-तार: ईरान के मिसाइल ठिकानों पर भीषण हमला, जानें अमेरिका ने क्यों लिया बड़ा सैन्य एक्शन
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमले के बाद अमेरिका ने ईरान पर बड़ी एयरस्ट्राइक की है। CENTCOM ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों को तबाह कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को गंभीर अंजाम भुगतने की कड़ी चेतावनी दी है।
Tehran: मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चला आ रहा तनाव एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक कमर्शियल जहाज पर हुए ड्रोन हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अख्तियार करते हुए बड़ा सैन्य एक्शन लिया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर दावा किया है कि उसने ईरान की सीमा के भीतर स्थित कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर जवाबी हवाई हमले (एयरस्ट्राइक) किए हैं। अमेरिकी प्रशासन का साफ कहना है कि यह आक्रामक कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हालिया हमले का करारा जवाब देने के लिए की गई है।
25 जून के हमले का अमेरिका ने लिया त्वरित बदला
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत बयान जारी कर इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की है। CENTCOM के मुताबिक, 26 जून को अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के विमानों ने ईरान के खिलाफ सुनियोजित जवाबी हमले किए। यह त्वरित कार्रवाई उस हमले के विरोध में की गई है, जिसमें 25 जून को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ओमान तट के पास से गुजर रहे एक बड़े कारोबारी जहाज को निशाना बनाया गया था। अमेरिका ने इसे अपनी संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों को सीधी चुनौती माना है।
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ड्रोन ठिकानों और रडार साइट्स को बनाया निशाना
अमेरिकी सेना द्वारा जारी की गई जानकारी के अनुसार, इस जवाबी कार्रवाई में बेहद सटीक रणनीति अपनाई गई। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के उन गुप्त भंडारण केंद्रों को तबाह कर दिया जहां मिसाइलें और घातक ड्रोन रखे गए थे। इसके साथ ही ईरान के तटीय रडार ठिकानों को भी नेस्तनाबूद कर दिया गया है ताकि उनकी निगरानी क्षमता को पंगु बनाया जा सके।
अमेरिका के मुताबिक, सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज ‘एम/वी एवर लवली’ पर एकतरफा हमलावर ड्रोन (Kamikaze Drone) से हमला किया गया था, जब वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बाहर निकल रहा था। CENTCOM ने जोर देकर कहा कि इस व्यावसायिक जहाज पर ईरानी बलों का हमला पूरी तरह से गैर-वाजिब और मौजूदा युद्धविराम समझौते का खुला उल्लंघन था।
व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा के लिए अमेरिका पूरी तरह सतर्क
इस भीषण सैन्य कार्रवाई के बाद भी CENTCOM ने साफ किया है कि उसका मिशन अभी खत्म नहीं हुआ है। अमेरिकी सेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और फारस की खाड़ी से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने के लिए लगातार गश्त और समन्वय जारी रखेगी।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने कहा है कि उसकी सेनाएं क्षेत्र में पूरी तरह मुस्तैद और हाई अलर्ट पर तैनात हैं ताकि ईरान के साथ हुए समझौतों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित कराया जा सके और किसी भी अन्य दुस्साहस का तुरंत जवाब दिया जा सके।
IMO ने रोकी जहाजों की निकासी
इस सैन्य टकराव के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है। ब्रिटेन की सेना ने भी पुष्टि की है कि ओमान के तट के पास एक कंटेनर जहाज किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल की चपेट में आया था, हालांकि यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर के अनुसार इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
दूसरी ओर, बिगड़ते हालातों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों की निकासी को अस्थायी रूप से रोक दिया है। आईएमओ के महासचिव अर्सेनियो डोमिंगुएज ने कहा कि जब तक क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा की 100% गारंटी नहीं मिल जाती, तब तक निकासी शुरू नहीं होगी। फिलहाल करीब 500 जहाज अब भी उस तनावग्रस्त क्षेत्र में फंसे हुए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि जहाज पर दागे गए चार ईरानी ड्रोन में से एक ने उसके ऊपरी हिस्से को नुकसान पहुंचाया, लेकिन जहाज अपनी यात्रा जारी रखने में सफल रहा, जबकि अमेरिकी सेना ने बाकी तीन ड्रोन को हवा में ही मार गिराया।
ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान को इसकी कीमत चुकानी होगी, तो उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “आपको जल्द ही पता चल जाएगा।” ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान ने यह हमला करके बहुत बड़ी मूर्खता की है और अब आगे क्या होगा, इसका अंदाजा उन्हें जल्द ही लग जाएगा।