अमेरिकी चुनाव में बढ़ेगा भारतवंशियों का दबदबा? डेमोक्रेटिक पार्टी ने दो उम्मीदवारों का किया समर्थन
अमेरिका के कांग्रेस चुनाव से पहले डेमोक्रेटिक पार्टी ने दो भारतवंशी उम्मीदवारों पर बड़ा भरोसा जताया है। पार्टी ने उन्हें खास चुनावी अभियान में शामिल कर जीत की तैयारी तेज कर दी है। क्या यह फैसला रिपब्लिकन की चुनौती को कमजोर करेगा और भारतीय मूल के नेताओं का असर अमेरिकी राजनीति में और बढ़ेगा?
New Delhi: अमेरिका में नवंबर में होने वाले कांग्रेस चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच डेमोक्रेटिक पार्टी ने भारतीय मूल के दो नेताओं अमीश शाह और पिया दांडिया पर बड़ा भरोसा जताते हुए उन्हें अपने अहम चुनावी अभियान ‘रेड टू ब्लू’ में शामिल किया है।
रेड टू ब्लू अभियान क्यों है खास?
डेमोक्रेटिक पार्टी का ‘रेड टू ब्लू’ अभियान उन उम्मीदवारों के लिए चलाया जाता है, जिनके पास चुनाव जीतने की मजबूत संभावना होती है। इस अभियान के जरिए उम्मीदवारों को फंड जुटाने, चुनावी रणनीति बनाने और संगठनात्मक मदद दी जाती है। इस बार पार्टी ने पांच नए उम्मीदवारों को इस सूची में शामिल किया है, जिनमें अमीश शाह और पिया दांडिया भी शामिल हैं।
ये भी पढ़ें- 1986 के बाद सबसे बड़ा बदलाव? H-1B वीजा होल्डर्स के लिए अमेरिका में नया बिल, भारतीयों को मिल सकती है बड़ी राहत
अमीश शाह पर क्यों लगा दांव?
अमीश शाह का जन्म शिकागो में गुजराती परिवार में हुआ। उनके माता-पिता 1960 के दशक में भारत से अमेरिका जाकर बसे थे। शाह ने नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और वहीं के मेडिकल स्कूल से डॉक्टर की डिग्री हासिल की। वह चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कई कार्यक्रमों में भी सक्रिय रहे हैं। अमीश शाह पेशे से डॉक्टर हैं और एरिजोना विधानसभा के तीन बार सदस्य रह चुके हैं। वह एरिजोना के पहले कांग्रेस जिले से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार और पूर्व एनएफएल खिलाड़ी जे फीली से होगा, जिन्हें पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन मिला हुआ है। ऐसे में यह मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है।
पिया दांडिया की एंट्री से बदलेगा समीकरण?
पिया दांडिया पहली पीढ़ी की अमेरिकी नागरिक हैं। उनका जन्म और पालन-पोषण फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में हुआ। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षिका के रूप में की और बाद में हार्लेम में हाई स्कूल की सबसे कम उम्र की प्रधानाचार्यों में शामिल हुईं। भारतीय मूल के माता-पिता की संतान पिया दांडिया पहले हाईस्कूल की प्रिंसिपल रह चुकी हैं। उन्होंने कम आय वाले परिवारों के बच्चों के लिए एक हाई स्कूल की स्थापना की, जिसका उद्देश्य छात्रों को उच्च शिक्षा और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना था।
उनके स्कूल से पढ़ने वाले सभी छात्रों को कॉलेज में प्रवेश मिला, जबकि उनमें से 86 प्रतिशत छात्र आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से थे। यही अनुभव अब उनके चुनाव प्रचार का भी अहम हिस्सा बना हुआ है। वह दक्षिण फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेस जिले से चुनाव मैदान में हैं। यह नया संसदीय क्षेत्र परिसीमन के बाद बना है और यहां कोई मौजूदा सांसद चुनाव नहीं लड़ रहा है। इससे मुकाबला और भी रोचक हो गया है।
पार्टी ने जताया पूरा भरोसा
डेमोक्रेटिक कांग्रेस अभियान समिति की अध्यक्ष सुजान डेलबेने ने पिया दांडिया को एक कामकाजी मां और आम लोगों की आवाज बताया। उन्होंने कहा कि पिया महंगाई से राहत, सामाजिक सुरक्षा और मेडिकेयर जैसी योजनाओं की रक्षा के लिए काम करना चाहती हैं। साथ ही रिपब्लिकन नेताओं से उनके वादों का जवाब भी मांगेंगी।
ये भी पढ़ें- 1986 के बाद सबसे बड़ा बदलाव? H-1B वीजा होल्डर्स के लिए अमेरिका में नया बिल, भारतीयों को मिल सकती है बड़ी राहत
कांग्रेस पर कब्जे की बड़ी रणनीति
डेमोक्रेटिक पार्टी इस चुनाव में प्रतिनिधि सभा का नियंत्रण दोबारा हासिल करना चाहती है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने करीब 30 ऐसे उम्मीदवारों को समर्थन दिया है, जिनसे जीत की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि पहले कुछ समर्थित उम्मीदवार चुनाव हार चुके हैं, लेकिन पार्टी को भरोसा है कि इस बार नए चेहरे बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
कांग्रेस में पहले से मजबूत है भारतवंशियों की मौजूदगी
इस समय अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भारतीय मूल के छह सांसद हैं। इनमें रो खन्ना, राजा कृष्णमूर्ति, श्री थानेदार, सुहास सुब्रमण्यम, अमी बेरा और प्रमिला जयपाल शामिल हैं। रो खन्ना भविष्य में राष्ट्रपति पद की दौड़ के संभावित दावेदारों में भी गिने जा रहे हैं, जबकि राजा कृष्णमूर्ति हाल ही में इलिनॉय से सीनेट के डेमोक्रेटिक प्राथमिक चुनाव में हार गए थे।