कैसे तय होता है कि किस देश को मिलेगी BRICS समिट की मेजबानी? 2027 में चीन में लगेगा जमावड़ा

भारत में 18वें BRICS Summit के बीच अगली मेजबानी को लेकर बड़ा सवाल सामने है। 2027 में BRICS की कमान चीन के हाथ में जाने की बारी है, लेकिन इसके पीछे कोई सीधा अल्फाबेटिकल फॉर्मूला नहीं है।

Sep 12, 2026 - 16:30
कैसे तय होता है कि किस देश को मिलेगी BRICS समिट की मेजबानी? 2027 में चीन में लगेगा जमावड़ा

New Delhi: नई दिल्ली में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है और इसके साथ ही अगली मेजबानी को लेकर भी चर्चा तेज है। भारत के बाद 2027 में BRICS Summit चीन में आयोजित होने की बारी है। लेकिन क्या इसके लिए कोई तय फॉर्मूला है? क्या सदस्य देशों में बारी अपने आप आती है या आपसी सहमति से फैसला होता है?

क्या है BRICS की थीम?

भारत ने 1 जनवरी 2026 को BRICS की अध्यक्षता संभाली और सितंबर में नई दिल्ली में 18वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत की 2026 की अध्यक्षता की थीम “Building Resilience, Innovation, Cooperation, and Sustainability” है।

भारत के बाद चीन क्यों करेगा मेजबानी?

BRICS में शिखर सम्मेलन की मेजबानी उस देश के पास रहती है, जो उस साल समूह की अध्यक्षता करता है। यानी जिस देश को Chairship मिलती है, वही पूरे साल बैठकों और प्रमुख कार्यक्रमों का नेतृत्व करता है और उसी के यहां Leaders’ Summit आयोजित होता है।

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BRICS का पहला शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुआ था। इसके बाद अलग-अलग सदस्य देशों ने बारी-बारी से इसकी मेजबानी की। विदेश मंत्रालय के रिकॉर्ड में 2012 और 2016 में भारत, 2017 में चीन, 2022 में चीन, 2023 में दक्षिण अफ्रीका और 2024 में रूस में हुए शिखर सम्मेलनों का उल्लेख है।

अब 2026 में भारत की अध्यक्षता के बाद 2027 में चीन की बारी प्रस्तावित है। इसका मतलब है कि अगला BRICS Leaders’ Summit चीन में होने की तैयारी है।

क्या BRICS में फिक्स रोटेशन है?

यहीं सबसे बड़ा सवाल आता है। BRICS की मेजबानी किसी साधारण अल्फाबेटिकल क्रम यानी A, B, C वाले नियम से नहीं चलती। शुरुआती पांच देशों- ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका, के बीच अध्यक्षता घूमती रही है। व्यवहार में अगली अध्यक्षता सदस्य देशों की आपसी सहमति और समूह की व्यवस्था के अनुसार तय होती है। इसलिए इसे केवल “हर पांच साल बाद अपनी बारी” जैसा सीधा नियम समझना सही नहीं होगा।

यही व्यवस्था BRICS को बाकी कई अंतरराष्ट्रीय समूहों से अलग बनाती है। यहां अध्यक्ष देश को सिर्फ सम्मेलन आयोजित करने की जिम्मेदारी नहीं मिलती, बल्कि वह पूरे साल समूह के एजेंडे को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।

हर साल बदलता है एजेंडा और प्राथमिकताएं

मेजबान देश के लिए BRICS की अध्यक्षता काफी महत्वपूर्ण होती है। अध्यक्ष देश सालभर होने वाली बैठकों की दिशा तय करता है और अपनी प्राथमिकताओं के मुताबिक मुद्दों को आगे रखता है। भारत की 2026 की अध्यक्षता में resilience, innovation, cooperation और sustainability पर जोर दिया जा रहा है। विदेश मंत्रालय से जुड़ी जानकारी के अनुसार, भारत की अध्यक्षता के दौरान BRICS Young Diplomats Forum जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं।

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यानी BRICS Summit सिर्फ दो दिन का बड़ा सम्मेलन नहीं है। इसके पीछे पूरे साल बैठकों और कई क्षेत्रों में सहयोग की लंबी प्रक्रिया चलती है।

चीन के लिए भी अहम होगी 2027 की अध्यक्षता

चीन पहले भी BRICS Summit की मेजबानी कर चुका है। 2011 में सान्या और 2017 में शियामेन में शिखर सम्मेलन हुआ था। 2022 में बीजिंग में 14वां BRICS Summit वर्चुअल रूप में आयोजित हुआ था।ऐसे में 2027 में चीन की संभावित मेजबानी उसके लिए एक और बड़ा कूटनीतिक मंच होगी। खास बात यह है कि BRICS अब अपने पुराने पांच देशों वाले स्वरूप से काफी आगे बढ़ चुका है और नए सदस्य और पार्टनर देश भी इसके दायरे में आ चुके हैं।

BRICS का बढ़ता दायरा

BRICS की शुरुआत BRIC के रूप में हुई थी, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे। 2011 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS हुआ। इसके बाद समूह का विस्तार हुआ और मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात तथा इंडोनेशिया जैसे देश पूर्ण सदस्य बने। इससे BRICS का प्रभाव और इसका दायरा दोनों बढ़े हैं।

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