केंद्र सरकार का बड़ा एक्शन, CBSE चेयरमैन और सचिव का तबादला, विशेष जांच समिति का भी किया गठन

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। इस क्रम में, बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण कर दिया गया है। इस महत्वपूर्ण फेरबदल के साथ ही,

Jun 2, 2026 - 19:30
केंद्र सरकार का बड़ा एक्शन, CBSE चेयरमैन और सचिव का तबादला, विशेष जांच समिति का भी किया गठन

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। इस क्रम में, बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण कर दिया गया है। इस महत्वपूर्ण फेरबदल के साथ ही, सीबीएसई द्वारा ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सेवाओं की खरीद प्रक्रिया की गहन जांच के लिए एक विशेष जांच समिति का गठन भी किया गया है, जो इस पूरे प्रकरण की बारीकी से पड़ताल करेगी।

यह जांच समिति विशेष रूप से सीबीएसई द्वारा ओएसएम सेवाओं की खरीद, उससे संबंधित निविदा (टेंडर) प्रक्रिया और इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की गहनता से पड़ताल करेगी। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस नवगठित जांच समिति की अध्यक्षता क्षमता निर्माण आयोग (कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन) की चेयरपर्सन एस. राधा चौहान करेंगी। उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे ओएसएम सिस्टम के लिए सेवाओं की खरीद से जुड़े सभी मामलों की विस्तृत जांच करें और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

अध्यक्ष एस. राधा चौहान को दिए गए विशेष अधिकार

सरकारी आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि समिति की अध्यक्ष एस. राधा चौहान को आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार के अन्य विभागों और कार्यालयों के अधिकारियों की सहायता लेने का पूर्ण अधिकार होगा। यह प्रावधान जांच को अधिक व्यापक और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया गया है। समिति को सचिवीय सहायता क्षमता निर्माण आयोग द्वारा ही उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि जांच कार्य सुचारु रूप से संपन्न हो सके और किसी भी प्रकार की बाधा न आए।

जांच प्रक्रिया के लिए मिली समय-सीमा

केंद्र सरकार ने इस जांच समिति को अपनी रिपोर्ट एक महीने की समय-सीमा के भीतर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को सौंपने का निर्देश दिया है। यह समयबद्धता इस बात का संकेत है कि सरकार इस मामले की गंभीरता को समझती है और जल्द से जल्द तथ्यों को सामने लाना चाहती है। रिपोर्ट में ओएसएम खरीद प्रक्रिया से संबंधित सभी तथ्यों, अनियमितताओं (यदि कोई हों) और भविष्य के लिए आवश्यक सुझावों को शामिल किया जाएगा।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया और ओएसएम निविदा प्रक्रिया को लेकर विभिन्न स्तरों पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे थे। छात्रों और अनेक संगठनों द्वारा भी इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग लगातार की जा रही थी। इन मांगों और उठते सवालों के बीच, सरकार का यह कदम सीबीएसई के आंतरिक मामलों में जवाबदेही तय करने तथा व्यवस्था में सुधार लाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय माना जा रहा है। यह निर्णय न केवल मौजूदा अनियमितताओं की जांच करेगा, बल्कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए भी एक मजबूत तंत्र स्थापित करने में सहायक होगा। इस प्रशासनिक कार्रवाई से केंद्रीय शिक्षा प्रणाली में विश्वास और विश्वसनीयता बहाल होने की उम्मीद है, खासकर तब जब लाखों छात्र और अभिभावक बोर्ड की निष्पक्षता पर निर्भर करते हैं।