शवों पर पहरा और अस्पतालों से अगवा होते जख्मी! क्या मुजफ्फराबाद कूच से पहले PoK को पूरी तरह निगल जाएगी पाकिस्तानी फौज?
सस्ता आटा-बिजली मांगने पर PoK में पाकिस्तानी सेना का वीभत्स तांडव। 73 में से 56 शवों को कब्जे में रख अस्पतालों से घायलों को उठा रही फौज। अमान खान की चेतावनी- अब बलूचिस्तान जैसा अंजाम भुगतने को तैयार रहे इस्लामाबाद।
New Delhi: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले 38 दिनों से जारी अवामी विद्रोह अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां शांति की गुंजाइश खत्म होती दिख रही है। रावलकोट के ईदगाह मैदान से पाकिस्तानी हुकूमत को ललकारते हुए प्रदर्शनकारियों ने जो खुलासे किए हैं, वे रोंगटे खड़े करने वाले हैं।
निहत्थे नागरिकों पर 7 जून से लगातार गोलियां बरसा रही पाकिस्तानी रेंजर्स ने अब तक 73 लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। बर्बरता की हद यह है कि सेना ने इनमें से 56 शवों को उनके परिजनों को सौंपने से इनकार कर दिया है, ताकि इस दमन की गवाही दुनिया के सामने न आ सके।
अस्पतालों से जख्मियों का अपहरण और फौजी दहशतगर्दी
विद्रोह के प्रमुख रणनीतिकार सरदार अमान खान ने पाकिस्तानी सेना को दुनिया का सबसे कायर ‘दहशतगर्द’ करार दिया है। युद्ध के वैश्विक नियमों को ताक पर रखकर पाकिस्तानी रेंजर्स अस्पतालों में घुस रहे हैं। वहां बिना किसी एफआईआर के 219 गंभीर रूप से घायल लोगों को इलाज के बीच से ही अपनी गाड़ियों में भरकर जेलों में ठूंस दिया गया है। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि अपने साथियों के शवों को कंधा दिए बिना और जेल में बंद बेगुनाहों को छुड़ाए बिना यह आंदोलन थमने वाला नहीं है।
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बलूचिस्तान जैसी तबाही की चेतावनी
दमनकारी नीतियों का साथ दे रहे स्थानीय अधिकारियों (डीसी, एसपी, एसएचओ) को खुली चेतावनी देते हुए अमान खान ने कहा कि उनकी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। मुजफ्फराबाद कूच को 21 जुलाई तक टालना प्रदर्शनकारियों का आखिरी शांतिपूर्ण कदम है।
यदि इस्लामाबाद ने अपनी क्रूरता बंद नहीं की, तो बलूचिस्तान की तर्ज पर पीओके के बलूच इलाकों की तरह यहाँ भी सशस्त्र विद्रोह भड़क उठेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी रावलपिंडी के जनरलों की होगी।
जनरलों की अय्याशी और 27 जुलाई का चुनाव
पीओके में 27 जुलाई को होने वाले चुनावों पर भी जनता ने वीटो लगा दिया है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सेना प्रमुख आसिम मुनीर और आईएसआई सेक्टर कमांडर ब्रिगेडियर फैक अयूब का काम चुनाव करवाना नहीं, बल्कि बैरकों में रहना है।
जो जनरल ‘डीएचए’ में आलीशान मकानों और अय्याशी में डूबे हैं, उन्हें अवाम की ताकत का अंदाजा नहीं है। अगर धांधली हुई तो जनता चुनाव नहीं होने देगी। अब देखना होगा कि 22 जुलाई को मुजफ्फराबाद कूच से पहले क्या पीओके पाकिस्तान के चंगुल से हमेशा के लिए आजाद होने की इबारत लिख देता है।