धान के बदले उगाएं मोटा अनाज, कम वर्षा की आशंका के बीच कृषि विभाग की किसानों से अपील, फसल का बीमा अवश्य कराएं

देश का किसान इस समय अलनीनो के प्रभाव को लेकर चिंतित है, संभावना जताई जा रही है कि इसके प्रभाव से मानसून के सीजन में अपेक्षाकृत कम वर्षा होगी, संभावनाओं को देखते हुए कृषि विभाग एलर्ट हो गे है, कृषि वैज्ञानिक किसानों की मदद के लिए उनको सलाह दे रहे हैं कि वे इस परिस्थिति

Jul 16, 2026 - 18:30
धान के बदले उगाएं मोटा अनाज, कम वर्षा की आशंका के बीच कृषि विभाग की किसानों से अपील, फसल का बीमा अवश्य कराएं

देश का किसान इस समय अलनीनो के प्रभाव को लेकर चिंतित है, संभावना जताई जा रही है कि इसके प्रभाव से मानसून के सीजन में अपेक्षाकृत कम वर्षा होगी, संभावनाओं को देखते हुए कृषि विभाग एलर्ट हो गे है, कृषि वैज्ञानिक किसानों की मदद के लिए उनको सलाह दे रहे हैं कि वे इस परिस्थिति में कौन सी फसल लगाये और कौन सी नहीं?

कृषि विभाग ग्वालियर ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे अलनीनो के संभावित प्रभाव और कम वर्षा की आशंका को देखते हुए धान के बजाय मोटे अनाज लगायें, विभाग द्वारा सभी किसानों से अपनी फसल का बीमा आवश्यक रूप से कराने की भी अपील की गई है।

धान की जगह मोटा अनाज उगाने की अपील 

किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के उप संचालक भानु प्रकाश शर्मा ने किसानों को सलाह दी है कि धान की जगह वे कम पानी में लगने वाली फसल जैसे ज्वार, बाजरा, मक्का, तिल, उड़द और मूंग की बुवाई करें क्योंकि इन फसलों को धान की तुलना में काफी कम पानी की आवश्यकता होती है।

किस फसल को कितने पानी की जरुरत 

कृषि विभाग ने तुलना करते हुए बताया कि ज्वार को 500 एम.एम., बाजरा, तिल, उड़द, मूंग को 400 एम.एम. और मक्का को 600 एम.एम. पानी की आवश्यकता होती है। इसके विपरीत धान को लगभग 1400 एम.एम. पानी की आवश्यकता होती है। इसलिए कम वर्षा की संभावना को देखते हुए धान की फसल लगाने से बचना चाहिए ।

बुवाई करते समय इन बातों का रखें ध्यान 

कृषि वैज्ञानिकों ने कहा है कि बुवाई के समय यह ध्यान अवश्य रहे कि जमीन में कम से कम 2-3 इंच नमी होना चाहिए। सीड ट्रीटमेंट और जैविक खाद का उपयोग करें जिससे पौधों का अंकुरण और प्रारंभिक वृद्धि बेहतर हो सके।
विभाग ने सलाह दी है कि कम अवधि की और सूखा प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें। कृषि विज्ञानिकों ने कहा है कि फसलों के लिए संतुलित उर्वरक प्रबंधन प्रणाली अपनाएं और नमी की कमी की स्थिति में नाइट्रोजन उर्वरकों का अधिक इस्तेमाल न करें।

31 जुलाई फसल बीमा कराने की अंतिम तारीख 

कृषि विभाग ने किसानों से उनकी फसल का बीमा आवश्यक रूप से कराने की अपील की है, विभाग ने बताया कि सभी ऋणी एवं अऋणी किसानों के लिए फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। किसान अपनी फसलों का बीमा किसान कॉमन सर्विस सेंटर, बैंक शाखाओं और फसल बीमा पोर्टल के माध्यम से करा सकते हैं।

फसल बीमा कराने के लिए जरूरी दस्तावेज 

फसल बीमा कराने के लिये किसान का आधार नंबर, बैंक पासबुक की फोटोकॉपी, भूमि से संबंधित दस्तावेज (खतौनी) इत्यादि व फसल बुवाई प्रमाण पत्र की जरूरत होती है। फसल बीमा प्राकृतिक आपदाओं और जोखिमों से होने वाली हानि को कवर करता है। किसी भी तरह की समस्या के लिए  जिले के किसान किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के खंड स्तरीय कार्यालयों व जिला कार्यालयों में भी संपर्क कर सकते हैं।

और अपनी फसल का बीमा कराने की अपील की गई है। मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा और वर्षा अंतराल अधिक होने की संभावना व्यक्त की गई है। इस बात को ध्यान में रखकर किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा किसानों को उचित सलाह दी गई है। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने कृषि एवं उससे जुड़े विभागों के मैदानी अधिकारी-कर्मचारियों को इस दिशा में लगातार किसानों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं।

Anand Sahay पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और ब्रेकिंग न्यूज़ तथा राष्ट्रीय खबरों को कवर करने में विशेष रुचि रखते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण कर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।