इंदौर में ‘नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0’ अभियान शुरू, पुलिस कमिश्नर ने जागरूकता रैली को दिखाई हरी झंडी

मध्य प्रदेश में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे राज्यव्यापी अभियान “नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0 – नो टू ड्रग्स” के तहत इंदौर में सोमवार को जागरूकता कार्यक्रम की शुरुआत की गई। पलासिया स्थित पुलिस कंट्रोल रूम से निकली रैली को पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान

Jul 15, 2026 - 15:30
इंदौर में ‘नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0’ अभियान शुरू, पुलिस कमिश्नर ने जागरूकता रैली को दिखाई हरी झंडी

मध्य प्रदेश में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे राज्यव्यापी अभियान “नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0 – नो टू ड्रग्स” के तहत इंदौर में सोमवार को जागरूकता कार्यक्रम की शुरुआत की गई। पलासिया स्थित पुलिस कंट्रोल रूम से निकली रैली को पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं, एनसीसी कैडेट, डॉक्टर, पुलिस अधिकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

रैली पलासिया चौराहे से शुरू होकर 56 दुकान क्षेत्र तक पहुंची। रास्ते में लोगों को नशे के नुकसान और उससे बचने के तरीकों के बारे में जानकारी दी गई। प्रतिभागियों ने हाथों में जागरूकता संदेश लिखी तख्तियां लेकर लोगों से नशे से दूर रहने की अपील की। अभियान का उद्देश्य केवल रैली निकालना नहीं, बल्कि युवाओं और आम लोगों तक यह संदेश पहुंचाना है कि नशा सिर्फ व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है।

‘नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0’ अभियान का उद्देश्य क्या है?

यह अभियान मध्य प्रदेश शासन और पुलिस विभाग की संयुक्त पहल है, जिसकी शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल से की। इसके बाद सभी जिलों में स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इंदौर में पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने कहा कि कई बार युवा दोस्तों के दबाव, तनाव, जिज्ञासा या कुछ समय के आनंद के लिए नशे की ओर कदम बढ़ा देते हैं। शुरुआत भले ही छोटी लगती हो, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत व्यक्ति के स्वास्थ्य, करियर, परिवार और भविष्य पर गंभीर असर डालती है।

उन्होंने बताया कि अभियान के अगले चरण में पुलिस की टीमें स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों, औद्योगिक क्षेत्रों और विभिन्न सामाजिक संगठनों तक पहुंचेंगी। वहां विशेषज्ञों और डॉक्टरों की मदद से युवाओं को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभाव, कानूनी परिणाम और इससे बचने के उपायों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

इसके साथ ही अभिभावकों और शिक्षकों को भी जागरूक किया जाएगा, ताकि वे बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों को समय रहते पहचान सकें और जरूरत पड़ने पर उचित सलाह या मदद दिला सकें।

युवाओं की भागीदारी से ही सफल होगा नशामुक्त समाज 

विशेषज्ञों का मानना है कि नशे के खिलाफ किसी भी अभियान की सफलता तभी संभव है, जब समाज, परिवार, स्कूल, कॉलेज और प्रशासन मिलकर काम करें। केवल कानून लागू करने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती, बल्कि लगातार जागरूकता और सही मार्गदर्शन भी जरूरी होता है। यही वजह है कि इस अभियान में युवाओं की भागीदारी को सबसे अधिक महत्व दिया जा रहा है।

इंदौर की जागरूकता रैली में स्कूली छात्र-छात्राओं, एनसीसी कैडेट्स और डॉक्टरों की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा प्रयास है। पुलिस विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में शहर के अलग-अलग हिस्सों में संवाद कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक, सेमिनार और जनजागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर सहायता और परामर्श सेवाओं की जानकारी भी दी जाएगी।

प्रशासन का मानना है कि यदि युवा सही समय पर जागरूक हो जाएं और परिवार उनका सहयोग करे, तो नशे की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है। “नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0” अभियान इसी सोच के साथ लोगों को जोड़ने और एक स्वस्थ, सुरक्षित तथा नशामुक्त समाज बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।