TMC में टूट के बीच अभिषेक बनर्जी को लेकर ममता बनर्जी का बड़ा बयान, कहा – ‘उन्होंने किसी तरह का समझौता नहीं किया…’
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी में जारी सियासी उठापटक के बीच बड़ा बयान दिया है। दरअसल उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को लेकर नाराजगी जताई है। वहीं अभिषेक बनर्जी का खुलकर समर्थन किया है। ममता बनर्जी ने कहा है कि जो लोग आज अभिषेक बनर्जी की
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी में जारी सियासी उठापटक के बीच बड़ा बयान दिया है। दरअसल उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को लेकर नाराजगी जताई है। वहीं अभिषेक बनर्जी का खुलकर समर्थन किया है। ममता बनर्जी ने कहा है कि जो लोग आज अभिषेक बनर्जी की आलोचना कर रहे हैं वे उनके संघर्ष को भूल गए हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि TMC अपने कार्यकर्ताओं के दम पर दोबारा मजबूती से खड़ी होगी।
दरअसल हाल के दिनों में टीएमसी के कई नेताओं ने पार्टी से दूरी बनाई है। वहीं इनमें कुछ नेताओं ने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। इन्हीं आरोपों के बीच ममता बनर्जी ने सार्वजनिक मंच से अपने भतीजे का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने मुश्किल समय में भी हार नहीं मानी और लगातार संघर्ष किया।
अभिषेक बनर्जी को लेकर क्या कहा?
दरअसल ममता बनर्जी ने कहा कि अभिषेक बनर्जी पर कई तरह के दबाव बनाए गए लेकिन उन्होंने किसी तरह का समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि यदि अभिषेक चाहते तो आसान रास्ता चुन सकते थे लेकिन उन्होंने हर चुनौती का सामना किया। ममता बनर्जी ने कहा कि अगर उनसे कोई गलती हुई भी होगी तो उन्होंने उससे सीख लेकर आगे बढ़ने का काम किया है।
पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को लेकर दी तीखी प्रतिक्रिया
दरअसल उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। ममता बनर्जी ने कहा कि जिन लोगों ने टीएमसी के चुनाव चिन्ह पर जनता का समर्थन हासिल किया और बाद में पार्टी छोड़ दी, उन्होंने लोगों के भरोसे को तोड़ा है। उन्होंने जनता से इस स्थिति के लिए खेद भी जताया। ममता ने यह भी कहा कि न तो उन्होंने और न ही उनके परिवार ने कभी राजनीतिक फायदे के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता किया है।
वहीं ममता बनर्जी ने बीजेपी और प्रशासन पर भी कई आरोप लगाए है। दरअसल उन्होंने दावा किया है कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को बैठकों की अनुमति नहीं दी जा रही और कई जगहों पर राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है।