सीएम डॉ मोहन यादव के निर्देश पर बालाघाट पहुंचीं 57 मेडिकल टीमें, 50 गांवों में 43 हजार से ज्यादा लोगों की जांच, बीमारी के खौफ पर काबू

मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य बालाघाट जिले में फैली बीमारी पर काबू पाने के लिए सरकार का तुरंत एक्शन सफल सिद्ध हुआ है, घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश पर प्रशासन ने बहु-स्तरीय प्रयास शुरू किए, 57 मेडिकल टीमों को बालाघाट के दुर्गम स्थानों पर 50 गांवों में भेजा गया , टीमों […]

Sep 30, 2026 - 19:30
सीएम डॉ मोहन यादव के निर्देश पर बालाघाट पहुंचीं 57 मेडिकल टीमें, 50 गांवों में 43 हजार से ज्यादा लोगों की जांच, बीमारी के खौफ पर काबू

मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य बालाघाट जिले में फैली बीमारी पर काबू पाने के लिए सरकार का तुरंत एक्शन सफल सिद्ध हुआ है,  घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश पर प्रशासन ने बहु-स्तरीय प्रयास शुरू किए, 57 मेडिकल टीमों को बालाघाट के दुर्गम स्थानों पर 50 गांवों में भेजा गया , टीमों ने इन गांवों में 43 हजार से ज्यादा लोगों की जांच की और फिर उन्हें उनके मुताबिक इलाज मुहैया कराया गया , परिणाम ये निकला कि आज गांवों से बीमारी का खौफ गायब हो गया है।

जुलाई के दूसरे सप्ताह में बालाघाट जिले के बिरसा विकासखंड के बोंदारी, कुंडेकसा, कोरका, डंडेकसा और सोनगुड्डा उप-स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के आसपास के बैगा आदिवासी बाहुल्य गांवों में बच्चों में अचानक बुखार और दाने होने की शिकायतें मिलीं। इस दौरान कुछ बच्चों की मौत की ख़बरें भी आई, बीमारी की जानकारी सरकार तक पहुंची जिसके बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने स्थानीय प्रशासन से बात की स्वास्थ्य मंत्री को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए इसके तुरंत मेडिकल टीमों ने तत्काल वहां जाने की तैयारी की। टीमें दुर्गम स्थानों में भारी बारिश के बावजूद वहां पहुंचीं, जाना पहुंचना आसान नहीं था। लेकिन टीमों ने यहां पहुंचकर टीमों ने बच्चों का उपचार शुरू किया।

सरकार का त्वरित एक्शन 

प्रशासन ने प्रभावित गाँवों के लिए  तत्काल डिस्ट्रिक्ट रैपिड रिस्पॉन्स टीम (DRRT) को सक्रिय किया। बाल रोग विशेषज्ञों, महामारी वैज्ञानिकों और कीट वैज्ञानिकों की विशेष टीम मौके पर भेजी गई। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। 57 स्वास्थ्य दलों ने 50 गांवों में जाकर 43 हजार 451 लोगों की जांच की। इनमें से 6,537 का घर पर ही इलाज किया गया। जबकि, गंभीर रूप से बीमार 647 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

  • बिरसा विकासखंड के 35 हजार 827 बच्चों को खसरा-रूबेला का टीका लगाया गया।
  • दस्त से बचाव के लिए 1 लाख 63 हजार 902 परिवारों को ओआरएस और जिंक के पैकेट बांटे गए।
  • इसके अलावा मलेरिया की रोकथाम के लिए 8 हजार 610 घरों में कीटनाशक छिड़काव और फॉगिंग की गई।
  • 26 हजार 865 लोगों की मलेरिया जांच की गई। उनमें से 980 लोग संक्रमित पाए गए। उनका तत्काल इलाज कराया गया।
  • प्रभावित क्षेत्रों में 3 हजार 600 मच्छरदानियां भी बांटी गईं।

 ऐसे बचाईं हजारों लोगों की जान

बालाघाट में सरकारी महकमों का संयुक्त और संवेदनशील प्रयास रंग लाया यहाँ राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर की टीमों का आपसी समन्वय और त्वरित कार्रवाई के कारण हजारों लोगों की जानें बच गईं। इन टीमों ने केवल बीमारी का इलाज नहीं किया, बल्कि उसके पीछे छिपे कारणों, दूषित पेयजल, अंधविश्वास, झोलाछाप डॉक्टरों की परेशानी को भी दूर किया।  गंभीर रूप से बीमार गर्भवती महिलाओं और बच्चों के सुरक्षित परिवहन के लिए बैहर, बिरसा और कटंगी विकासखंडों के लिए 3.60 लाख रुपये आवंटित किए गए। टीकों के सुरक्षित परिवहन के लिए अतिरिक्त 3.40 लाख रुपये प्रदान किए गए।

जिले के 22 उप-स्वास्थ्य केंद्रों की मरम्मत के लिए 1.93 करोड़ और आवश्यक उपकरणों की खरीद के लिए 24 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। घुम्मुर उप-स्वास्थ्य केंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में बदलने के लिए 66 लाख का प्रस्ताव मंत्रिमंडल को भेजा गया। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जिले में 54 नए डॉक्टरों की पदस्थापना की गई। इसके अतिरिक्त, मलेरिया नियंत्रण के लिए 1 सलाहकार और 4 तकनीकी सुपरवाइजर तैनात किए गए। महिला बाल विकास विभाग द्वारा 4 नए सीडीओपी नियुक्त किए गए और आंगनवाड़ियों में खाली पड़े 52 कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं के पदों को भरा गया।

Anand Sahay पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और ब्रेकिंग न्यूज़ तथा राष्ट्रीय खबरों को कवर करने में विशेष रुचि रखते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण कर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।