क्या ईरान बनाने जा रहा है 10 परमाणु बम? IAEA की रिपोर्ट के बाद पश्चिमी देशों में खलबली, UNSC की दहलीज पर पहुंचा मामला
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव चरम पर है। IAEA की रिपोर्ट के बाद अमेरिका और यूरोपीय देश ईरान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ले जाने की तैयारी में हैं। ईरान के पास 10 परमाणु बम बनाने लायक यूरेनियम मौजूद है।
Tehran: दुनिया में एक और बड़े युद्ध की आशंका के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने ईरान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
20 सालों में यह पहला मौका है जब IAEA ने आधिकारिक रूप से माना है कि ईरान अपने परमाणु अप्रसार वादों से मुकर रहा है। अब इस मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ले जाने की तैयारी चल रही है।
बंद दरवाजों के पीछे 10 परमाणु बम की तैयारी?
अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के लिए सबसे बड़ी चिंता ईरान के पास मौजूद 440 किलोग्राम यूरेनियम का भंडार है, जो 60 प्रतिशत तक शुद्ध किया जा चुका है। परमाणु हथियार बनाने के लिए 90 प्रतिशत शुद्धता की आवश्यकता होती है, जिससे ईरान अब ज्यादा दूर नहीं है।
IAEA के प्रमुख राफेल ग्रॉसी के अनुसार, ईरान के पास मौजूद यूरेनियम की यह मात्रा सैद्धांतिक रूप से 10 परमाणु बम बनाने के लिए काफी है। जून में हमलों के बाद से ईरान ने अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को अपने परमाणु ठिकानों में प्रवेश से रोक रखा है।
पुराने निशानों का रहस्य और पश्चिमी देशों का शक
IAEA की खुफिया रिपोर्ट बताती है कि जिन अघोषित जगहों पर यूरेनियम के पुराने निशान मिले थे, उनकी जांच में ईरान बिल्कुल सहयोग नहीं कर रहा है। पश्चिमी देशों को आशंका है कि ईरान 2003 से ही गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित कर रहा था। हालांकि ईरान लगातार इन दावों का खंडन करता रहा है और अपने कार्यक्रम को केवल शांतिपूर्ण ऊर्जा जरूरतों से जोड़ता है।
क्या प्रतिबंध लगेंगे या वीटो बचाएगा?
यदि यह मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पहुंचता है, तो ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध और संपत्ति फ्रीज करने जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि, इसमें एक बड़ा पेंच यह भी है कि सुरक्षा परिषद में वीटो पावर रखने वाले रूस और चीन ईरान के करीबी सहयोगी हैं।
इसलिए वीटो के चलते कड़े प्रतिबंधों की राह आसान नहीं होगी। अब हर किसी की निगाहें वियना में होने वाली IAEA बोर्ड की आगामी बैठक पर टिकी हैं, जहां कूटनीति का भविष्य तय होगा।