शिक्षक दिवस पर PM मोदी ने शिक्षकों से की मुलाकात, पूछा सवाल – ‘अगर मैं आपका विद्यार्थी होता तो क्या सलाह देते?’

शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री आवास पर राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों से शिक्षा व्यवस्था, बच्चों के विकास और बदलती आदतों जैसे कई विषयों पर चर्चा की। मुलाकात का वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया गया है। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने काशी […]

Sep 5, 2026 - 12:30
शिक्षक दिवस पर PM मोदी ने शिक्षकों से की मुलाकात, पूछा सवाल – ‘अगर मैं आपका विद्यार्थी होता तो क्या सलाह देते?’

शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री आवास पर राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों से शिक्षा व्यवस्था, बच्चों के विकास और बदलती आदतों जैसे कई विषयों पर चर्चा की। मुलाकात का वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया गया है। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने काशी में ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि अब महिलाएं आगे बढ़कर जांच करा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एक दिन में सबसे ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग का विश्व रिकॉर्ड बनाने का अनुभव भी महत्वपूर्ण रहा।

वहीं कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक शिक्षिका से पूछा कि अगर वह उनके विद्यार्थी होते और एक कुशल वक्ता बनना चाहते, तो उन्हें क्या सलाह दी जाती। उन्होंने कहा, “अगर मैं आपके यहां विद्यार्थी होता और एक कुशल वक्ता बनना चाहता, तो आप मुझे क्या सुझाव देतीं? मुझे क्या करना चाहिए?”

जानिए शिक्षिका ने क्या दिया जवाब

दरअसल इस पर शिक्षिका ने जवाब दिया कि सबसे पहले आत्मविश्वास जरूरी है और आत्मविश्वास लगातार अभ्यास से आता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के सामने बात करते समय वह खुद भी थोड़ी घबरा गई थीं। प्रधानमंत्री ने बातचीत में बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि स्क्रीन टाइम अब एक तरह की लत बन गया है। उनके अनुसार, अगर बच्चे मैदान में जाकर असली खेलों में रुचि लें और उन्हें ज्यादा रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाए, तो इस आदत से बाहर निकलने में मदद मिल सकती है।

शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं: PM मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों को किताबों और सिलेबस तक सीमित रखने के बजाय उनके जीवन से जुड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बचपन को बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और इसमें शिक्षक की भूमिका सबसे अहम होती है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, शिक्षक का काम है कि बच्चे के अंदर बचपन हमेशा बना रहे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों ने भी अपने अनुभव साझा किए और शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रधानमंत्री के साथ चर्चा की।